बिजनेस स्टैंडर्ड - रुपये में उतार-चढ़ाव और ऊंची लागत से परेशान निर्यातक
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रुपये में उतार-चढ़ाव और ऊंची लागत से परेशान निर्यातक

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली December 23, 2018

नकदी संकट, रुपये में उतार-चढ़ाव और कर्ज तक पहुंच मुश्किल होने के साथ साथ निर्यातकों की कई अन्य शिकायतों के बावजूद 2018-19 में देश से होने वाला निर्यात अब तक के शीर्ष स्तर पर रहने की उम्मीद है। निर्यातकों का कहना है कि पिछले साल मामूली वृद्धि दर और निम्न आधार के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान ज्यादातर महीनों में वृद्धि दर दो अंक में बनी रही।  उद्योग जगत और सरकार के अनुमानों के मुताबिक भारत के सामान के बड़े निर्यात केंद्रों पर मांग बढऩे की वजह से इस वित्त वर्ष में वाणिज्यिक सामान का निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 325 अरब डॉलर होने की संभावना है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह अब तक भारत के निर्यात के शीर्ष स्तर 305 अरब डॉलर की तुलना में ज्यादा रहने की उम्मीद है, जिसके बाद से 2012 के वैश्विक वित्तीय संकट के कारण लाभ खत्म हो गया था।' 
 
यह लक्ष्य हासिल करने के लिए जरूरी है कि चालू वित्त वर्ष के शेष 4 महीनों में हर महीने कम से कम 27 अरब डॉलर का निर्यात हो, जो आराम से हो सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि निर्यातक नाखुश हैं क्योंकि नकदी का संकट और कर्ज लेने में दिक्कत है।  सहाय ने कहा कि इन कठिनाइयों और नकदी पर आधारित अनौपचारिक  क्षेत्र के छोटे कारोबारों की हालत नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद खराब हुई है। सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक निर्यातकों में संख्या के हिसाब से इस तरह की फर्में 75 प्रतिशत से ज्यादा हैं। 
 
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-नवंबर की अवधि के दौरान निर्यात 271 अरब डॉलर रहा, लेकिन इसमें 42 प्रतिशत से भी कम निर्यात प्राप्तियां हुईं। फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि निर्यात के बड़े क्षेत्रों में नकदी का संकट बना हुआ है। गुप्ता ने यह भी कहा कि भारतीय निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम, जो निर्यात क्रेडिट बीमा देता है, नए आवेदन स्वीकार करने के मामले में बहुत सुस्त है और बहुत साधारण वजहों से दावे खारिज कर रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर बैंक और ईसीजीसी इस तरह का व्यवहार जारी रखते हैं तो हम निर्यात में दो अंक की वृद्धि दर हासिल करने में सफल नहीं होंगे।'  
 
कच्चा माल लेने के मामले में स्वर्ण उद्योग में उतार-चढ़ाव जारी है। जुलाई में सोने का आयात बढ़ा, जबकि लगातार 6 महीने आयात नकारात्मक बना रहा है। इस साल की शुरुआत में 14,300 करोड़ रुपये के नीरव मोदी घोटाले बाद से सोने में सुस्ती बनी हुई है।  परिधान जैसे श्रम आधारित उद्योगों में भी अक्टूबर 2017 से लगातार सुस्ती थी, जिसमें दो महीने से सुधार आया है। अक्टूबर में निर्यात 36 प्रतिशत बढऩे के बाद नवंबर महीने में निर्यात वृद्धि महज 9 प्रतिशत रही। ज्यादातर निर्यातक मुनाफा कम होने की शिकायत कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र के 80 प्रतिशत कारोबारी एसएमई क्षेत्र से होते हैं, जिनकी हालत खराब रही है। 
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