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दो साल में 1,490 एनबीएफसी के पंजीकरण रद्द

अभिजित लेले / मुंबई December 23, 2018

वित्तीय कंपनियों पर नियामकीय सख्ती बढ़ाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मानकों को पूरा करने और में विफल रहने के लिए 1,490 एनबीएफसी के पंजीकरण रद्द किए हैं। साथ ही कुछ पंजीकरण कंपनियों द्वारा स्वैच्छिक तौर पर पंजीकरण समाप्त कराए जाने की वजह से रद्द किए गए हैं।  आरबीआई द्वारा लोकसभा को मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार रद्द पंजीकरण के संदर्भ में 617 पंजीकरण कोलकाता में रद्द किए गए जिसके साथ ही पश्चिम बंगाल इस सूची में शीर्ष पर रहा। इसके बाद 203 पंजीकरण रद्द किए जाने के साथ नई दिल्ली दूसरे स्थान पर, 190 के साथ मुंबई तीसरे पायदान पर रहे। 
 
ये पंजीकरण 2 करोड़ रुपये के न्यूनतम नेट ऑन्ड फंड (एनओएफ), सांविधिक प्रतिफल नहीं सौंपने, दिए गए पतों पर नहीं पाए जाने जैसे अनिवार्य शर्तों के गैर-अनुपालन की वजह से रद्द किए गए हैं। आरबीआई ने कहा है कि कुछ पंजीकरण कंपनियों द्वारा स्वेच्छापूर्वक पंजीकरण प्रमाणपत्र सौंपने की वजह से रद्द किए गए।  आरबीआई ने कहा है कि नियामक के साथ पंजीकृत एनबीएफसी रिटर्न जमा करने और सांविधिक ऑडिटरों की रिपोर्ट के जरिये ऑन-साइट निरीक्षण और ऑफ-साइट निरीक्षण के अधीन हैं। उपर्युक्त निगरानी प्रक्रिया से संबंधित आकलन के आधार पर जरूरत पडऩे पर पंजीकृत एनबीएफसी पर जरूरी निगरानी कार्य किया जाता है।
 
एक विश्लेषक ने कहा है कि जहां संरचनात्मक और स्टाफ की संख्या को ध्यान में रखते हुए बैंकों के लिए सीमाएं हैं, वहीं वित्तीय कंपनियां ग्राहकों तक पहुंच बनाने के प्रयास में वित्तीय सहायता मुहैया कराने के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। वित्तीय कंपनियां दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच बनाने के लिहाज से बेहद तेज और स्वतंत्र हैं। वे (एनबीएफसी) सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक प्रमुख माध्यम हैं।  जून 2018 में आरबीआई द्वारा प्रकाशित वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट (एफएसआर) के अनुसार, सेक्टर के  ऋण और अग्रिमों में 21.2 प्रतिशत और निवेश में 13.4 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। मार्च के अंत में संपूर्ण बैलेंस शीट 22.1 लाख करोड़ रुपये पर थी।
 
एक एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वित्तीय कंपनियों द्वारा जोखिम प्रबंधन और प्रशासन का व्यवस्था की वित्तीय मजबूती पर दबाव पड़ा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) और उसकी समूह की इकाइयों द्वारा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भुगतान चूक संपूर्ण वित्तीय प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका थी और इससे वित्तीय कंपनियों के लिए तरलता काफी हद तक प्रभावित हुई। आरबीआई ने निगरानी बढ़ाई है और अब वह खामियों और जोखिमों से मुकाबले के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता के लिए नकदी प्रबंधन और ऋण बहीखातों पर ध्यान दे रहा है। वित्तीय कंपनियों से जुड़ी मुख्य चिंताओं में दीर्घावधि परिसंपत्तियों को उधारी के लिए अल्पावधि उधारी शामिल है, जिससे अक्सर परिसंपत्ति देनदारी असंतुलन को बढ़ावा मिलता है। प्रशासन और जोखिम प्रबंधन प्रणालियों में भी सुधार लाए जाने की जरूरत है। 
 
एफएसआर के अनुसार, एनबीएफसी की शेयर पूंजी वृद्घि में सुस्ती आई है जबकि उधारी 19.1 प्रतिशत तक बढ़ी है, जिससे लाभ में वृद्घि का संकेत मिलता है।  मार्च 2018 में, जहां 11,402 कंपनियां रिजर्व बैंक के साथ पंजीकृत थीं, वहीं इनमें से 155 जमा स्वीकारने (एनबीएफसी-डी) वाली थीं। यह संख्या सितंबर 2018 के अंत में घटकर 10,102 रह गई। 249 कंपनियों को व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारने वाली एनबीएफसी समझा गया। 
Keyword: NBFC, bank, micro finance,,
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