बिजनेस स्टैंडर्ड - अति महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य
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अति महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  December 21, 2018

मोदी सरकार की खासियतों में से एक यह भी है कि वह विभिन्न कार्यक्रमों के लिए महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करती है और उन्हें हासिल करने के लिए प्रतिबद्घ प्रयास करती है। नीति आयोग द्वारा जारी किए गए दस्तावेज 'स्ट्रैटेजी फॉर न्यू इंडिया एट 75' में भी यह महत्त्वाकांक्षा साफ नजर आती है। परिभाषा के आधार पर देखा जाए तो चार वर्ष से कम अवधि में 'नया भारत' बनाने की किसी भी कोशिश को शंका की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। फिर भी इसके विस्तृत ब्योरे पर नजर डाली जानी चाहिए। वर्ष 2022-23 तक 9-10 फीसदी की जीडीपी वृद्घि दर हासिल करने का लक्ष्य कुछ ज्यादा ही बड़ा है। उस तक पहुंचने के लिए कई छोटे लक्ष्य तय किए गए हैं। ये कितने विश्वसनीय हैं? कुछ बातों पर नजर डालते हैं (टिप्पणियां कोष्ठक में हैं):

विनिर्माण वृद्घि दर को 7.7 फीसदी से दोगुना बढ़ाना। 

खनन क्षेत्र की वृद्घि दर को वर्ष 2017-18 के तीन फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी करना। इसके लिए वर्ष 2018-23 के बीच 8.5 फीसदी की दर हासिल करनी होगी। 
सभी खेतों को सिंचाई सुविधा। 

हवाई अड्डा क्षमता में पांच गुने से अधिक का इजाफा ताकि हर वर्ष 100 करोड़ यात्राओं से निपटा जा सके। 

शिक्षा पर सरकारी व्यय को दोगुना कर जीडीपी का 6 फीसदी करना। (यह बार-बार दोहराई हुई बात है।)
औपचारिक रूप से कुशल श्रमिकों के अनुपात को श्रम शक्ति के मौजूदा 5.4 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 15 फीसदी करना (यानी हर वर्ष करीब एक करोड़ श्रमिकों को कुशल बनाना।)
कर-जीडीपी अनुपात को 16-17 फीसदी के स्तर से बढ़ाकर 22 फीसदी करना। 
सार्वजनिक निवेश को जीडीपी के 4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करना (प्रश्न: जबकि कृषि ऋण माफी के मामले बढ़ रहे हैं?)
देश में आने वाले वैश्विक पर्यटकों की संख्या को 1.18 फीसदी से बढ़ाकर 3 फीसदी करना। परंतु (इसमें विरोधाभास है) विदेशी पर्यटकों का आगमन 88 लाख से बढ़कर केवल 1.2 करोड़ होने की बात कही गई है। 
राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई को 2022-23 तक बढ़ाकर 2 लाख किलोमीटर करना जो अभी 1.22 लाख किलोमीटर है। (हकीकत में यह वृद्घि 64 प्रतिशत होगी और इसके लिए रोज 60 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग बनाना होगा। यह काम राज्य राजमार्गों तथा अन्य सड़कों के अलावा है।)
सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों की संख्या को 2020 तक 50 फीसदी कम करना जबकि रेलवे दुर्घटनाओं में मृत्यु के मामलों को पूरी तरह समाप्त करना। 
ब्रॉड गेज ट्रैक का 100 फीसदी विद्युतीकरण करना। यह 2016-17 तक 40 प्रतिशत था। 
शोध एवं विकास व्यय को जीडीपी के 0.7 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी करना। 
खनन के लिए संभावित क्षेत्र को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करना। 
प्रमुख बंदरगाहों पर पलटी के समय को 2016-17 के 3.44 दिन से घटाकर 1-2 दिन के वैश्विक औसत पर लाना। सन 2020 तक निर्यात के लिए व्यापक अनुपालन समय को घटाकर 24 घंटे और आयात के लिए 48 घंटे करने का लक्ष्य। 
सन 2022-23 तक राज्य, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर सारी सेवाओं को डिजिटली प्रदान करना और डिजिटल खाई को पूरी तरह पाटना। 
इन भौतिक लक्ष्यों के अलावा हर क्षेत्र के लिए नीतिगत उपायों का भी उल्लेख किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है ये भी आर्थिक समीक्षा और पुरानी पंचवर्षीय योजना के तर्ज पर किए गए दावे हैं या फिर इन्हें हासिल करने के लिए प्रयास भी किया जाएगा। इसके बावजूद कुछ नीतिगत उपचार इस प्रकार हैं:
अर्थव्यवस्था को पूरी तरह औपचारिक स्वरूप प्रदान करना। 
जिन सरकारी उपक्रमों की प्रकृति सामरिक नहीं है उनका निजीकरण करना। बड़े उपक्रमों के लिए व्यापक धारिता वाली कंपनी बनाना ताकि निवेश कम करके ऐसे संस्थान बनाए जाएं जहां एकल प्रवर्तक का नियंत्रण न हो (सरकार समेत)।
सरकारी बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण। 
बिजली शुल्क दरों को तार्किक बनाना ताकि भारतीय उपक्रम वैश्विक प्रतिस्पर्धा कर सकें। (यानी उच्च औद्योगिक विद्युत शुल्क दर में कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रियायत नहीं होगी?)
रेल शुल्क दरों पर नए सिरे से दृष्टि डालना ताकि यात्री और मालवहन क्षेत्र में स्थायित्व आ सके। माल भाड़ा, सड़क परिवहन की लागत की दृष्टि से प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। (स्थायित्व और प्रतिस्पर्धा में विरोधाभास हो सकता है।)
अनिवार्य जिंस अधिनियम का खात्मा करना। 
कुछ वर्ष पहले जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तो मैकिंजी ने उन्हें ऐसे ही महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य सौंपे थे। इस पर उनका जवाब था, 'यह सब कैसे होगा?' पुरानी स्कॉटिश कहावत याद आती है: अगर इच्छाएं घोड़ा होतीं तो भिखारी उन पर सवारी करते। 
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