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वाडिया परिवार जिन्ना हाउस को लेकर कानूनी जंग रखेगा जारी

देव चटर्जी /  12 20, 2018

विवादास्पद मामला

जिन्ना हाउस को दिल्ली के हैदराबाद हाउस की तर्ज पर किया जाएगा विकसित
वाडिया परिवार इस इमारत पर अपने मालिकाना हक की लड़ रहा है लड़ाई
जिन्ना की इकलौटी बेटी दीना वाडिया ने 2007 में दायर किया था मुकदमा
2.5 एकड़ में फैले जिन्ना हाउस की कीमत कम से कम 5-6 अरब रुपये
पाकिस्तान सरकार ने भी इमारत पर अपने हक का दावा किया
पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल थे मोहम्मद अली जिन्ना

बिजनेस स्टैंडर्ड वाडिया परिवार जिन्ना हाउस को लेकर कानूनी जंग रखेगा जारीकेंद्र सरकार ने मुंबई के मालाबार हिल में जिन्ना हाउस को विदेश मामलों के मंत्रालय को सौंपने की योजना बनाई है, ताकि इस भवन का दिल्ली में हैदराबाद हाउस की तर्ज पर कायाकल्प कर इसे विदेशी हस्तियों को ठहराने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि सरकार की इस योजना को वाडिया परिवार ने स्वीकार नहीं किया है। वाडिया परिवार इस संपत्ति का मालिकाना हक हासिल करने के लिए बंबई उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।

पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल मोहम्मद अली जिन्ना के उत्तराधिकारी नुस्ली वाडिया ने भारतीय अदालतों में यह लड़ाई जारी रखने की योजना बनाई है। यह लड़ाई 2007 में नुस्ली वाडिया की मां दीना वाडिया (अब दिवंगत) ने शुरू की थी। दीना जिन्ना की इकलौटी बेटी थीं। सूत्रों के मुताबिक, 'वाडिया परिवार इस बारे में कानूनी राय ले रहा है कि क्या इस संपत्ति पर सरकार उस समय कब्जा कर सकती है, जब इसका मुकदमा बंबई उच्च न्यायालय में चल रहा है।' हालांकि वाडिया परिवार ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन सूत्रों ने कहा कि कानूनी टीम मामले की पड़ताल कर रही है। 

जिन्ना हाउस 2.5 एकड़ भूखंड में बना है और इसकी कीमत कम से कम 5 से 6 अरब रुपये है। इस पर मालिकाना हक का दावा पाकिस्तान सरकार ने भी किया है, जो यहां अपना मुंबई दूतावास बनाना चाहती है। यह संपत्ति 1948 से 1983 के बीच ब्रिटिश उच्चायोग को लीज पर दी गई थी और यह उच्चायुक्त का आधिकारिक आवास था।  यह भवन 2003 तक खाली रहा। वर्ष 2003 में इस भवन का एक हिस्सा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) को सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने को दिया गया। अब यह भवन आईसीसीआर की जगह विदेश मामलों के मंत्रालय को सुपुर्द किया जा रहा है। 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुंबई के एक बिल्डर और भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष मंगल प्रभात लोढा को भेजे एक पत्र में कहा कि मंत्रालय इस संपत्ति को मंत्रालय के नाम पर हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में है ताकि इसे हैदराबाद हाउस की तर्ज पर विकसित किया जा सके। स्वराज ने कहा कि मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिल गई है।   राज्य सभा में भाजपा के सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने ट्वीट किया कि यह संपत्ति वाडिया को मिलनी चाहिए। उन्होंने लिखा, 'जिन्ना ने एक पारसी महिला से शादी की थी। लेकिन उनकी एकमात्र बेटी ने उनके पाकिस्तान को नकार दिया और भारत में ही रहने का फैसला किया। इससे जिन्ना का दिल टूट गया। आज जिन्ना के एकमात्र वारिस नुस्ली वाडिया हैं, जो आजीवन जनसंघ/भाजपा के समर्थक रहे हैं। मुझे नहीं पता कि किस वजह से सरकार का मन बदला है, जिससे वह उनके परिवार को मुंबई में पैतृक जिन्ना हाउस पर मालिकाना हक देने से इनकार कर रही है।'

प्रॉपर्टी मामलों से जुड़े वकीलों ने कहा कि मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 में संशोधन किए हैं, जिससे सरकार के लिए ऐसी संपत्तियों को अपने कब्जे में लेना आसान हो गया है। मुंबई के एक वकील ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा, 'अगर भारत सरकार इस संपत्ति को अपने कब्जे में लेना चाहती है तो वाडिया समेत अन्य  किसी पक्ष के लिए इसमें दखल देना बहुुत मुश्किल होगा।' वकीलों ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों की ज्यादातर अचल संपत्तियां भारत में शत्रु संपत्तियों के संरक्षक के पास हैं, जिसने 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू होने के बाद इन संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया था। 

पाकिस्तान का दावा खारिज 

भारत ने जिन्ना हाउस पर मालिकाना हक के पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह संपत्ति उसकी है। विदेश मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को कहा, 'इस संपत्ति पर पाकिस्तान का कोई हक नहीं है। यह भारत सरकार की संपत्ति है और हम इसका नवीनीकरण कराने जा रहे हैं।' दरअसल बुधवार पाकिस्तान ने कहा था कि जिन्ना हाउस पर उसका हक है और इस इमारत को अपने कब्जे में लेने की भारत की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Keyword: india, pakistan, jinna, wadia,,
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