बिजनेस स्टैंडर्ड - विकास की रणनीति का खाका
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विकास की रणनीति का खाका

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 12 19, 2018

न्यू इंडिया @ 75 के लिए रणनीति

20918-10 से 2022-23 तक सालाना औसत जीडीपी वृद्धि 8 फीसदी हासिल करना
भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2017-18 के 2.7 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 4 लाख करोड़ डॉलर करना
निवेश की दर जीडीपी के 29 फीसदी से बढ़कर 36 फीसदी करना
वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात 478 अरब डॉलर से बढ़ाकर 800 अरब डॉलर करना
कर और जीडीपी अनुपात को मौजूदा 17 फीसदी बढ़ाकर 2022-23 तक 22 फीसदी करना
मुद्रास्फीति को जीडीपी के 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य

बिजनेस स्टैंडर्ड विकास की रणनीति का खाकाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार अगले कुछ महीनों में आम चुनावों में जाने की तैयारी कर रही है, वहीं नीति आयोग ने अपने रणनीतिक दस्तावेज में 2022-23 तक औसतन सालाना 8 फीसदी वृद्धि दर का लक्ष्य रखा है। हालांकि आयोग ने कहा कि पर्याप्त रोजगार पैदा करने और भारत को 4 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए इस दौरान विकास दर को 9 फीसदी तक बढ़ाने की जरूरत होगी। राजग सरकार के पांच साल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था के औसतन 7.4 फीसदी की दर से बढऩे का अनुमान लगाया है। 8 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर 2015-16 में हासिल हुई थी। 

पंचवर्षीय योजना की जगह नीति आयोग ने यह दस्तावेज पेश किया है जिसमें वृद्धि दर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार मुख्य कदम का उल्लेख किया गया है। इससे पहले आयोग ने 2107-18 से 2019-20  के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना जारी की थी।  रणनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के कदमों में निवेश को जीडीपी के मौजूदा 29 फीसदी से बढ़ाकर 2022-23 तक 36 फीसदी करना है। इनमें से आधा सरकारी निवेश से आएगा। 'न्यू इंडिया ञ्च७५ के लिए रणनीति' नाम से जारी इस दस्तावेज में कहा गया है कि वृद्धि दर के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात मौजूदा 478 अरब डॉलर से बढ़ाकर 800 अरब डॉलर करना होगा। इसके साथ ही कृषि की अड़चनों को दूर करने और किसानों को कृषक उद्यमी बनाने, श्रम कानूनों को संहिता का रूप देने तथा एप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि 2018-19 से 2022-23 तक औसतन सालाना 8 फीसदी की वृद्धि दर का लक्ष्य हासिल करना 'व्यवहार्य और मुमकिन' है। इंडिया ग्रोथ सेंटर के कार्यक्रम निदेशक प्रणव सेन ने कहा, 'सभी क्षेत्रों के सतत विकास के बिना आप 8 फीसदी या उससे अधिक की वृद्धि निरंतर हासिल नहीं कर सकते। निवेश को 29 से बढ़ाकर 36 फीसदी करने और इनमें से आधा सार्वजनिक निवेश से करने के लिए बेहतर नीतिगत माहौल की जरूरत होगी।' सेन ने कहा कि लक्ष्य से ज्यादा महत्त्वपूर्ण यह होगा कि सरकार इस दिशा में किस तरह से खाका तैयार करती है। 

कृषि क्षेत्र के लिए रणनीतिक दस्तावेज में कर्ज माफी या आय के प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजना का उल्लेख नहीं है, वहीं इसमें कहा गया है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 2015-16 से 2022-23 के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 10.4 फीसदी होनी चाहिए।दस्तावेज में एपीएमसी कानूनों में संशोधन करने और टिकाऊ कृषि प्रणलियों के लिए राज्यों के साथ काम करने की बात कही गई है।  इसमें बहुचर्चित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव कर मौसम आधारित बीमा को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह न्यूनतम आरिक्षत मूल्य की अवधारणा लानी चाहिए और विभिन्न मंडियों में नीलामी हो जिससे किसान कम से कम बुनियादी आय प्राप्त कर सकें।नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा, 'हम एपीएमसी कानूनों में संशोधन के लिए राज्यों द्वारा किए गए सुधारों के साथ सरकार के सहयोग को जोडऩे के लिए कृषि मंत्री के साथ बैठक करने की योजना बना रहे हैं।' दस्तावेज में 2022-23 तक मुद्रास्फीति को 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने का भी लक्ष्य निर्धारित किया है। 

बुनियादी ढांचे के लिए दस्तावेज में मालढुलाई बढ़ाने के लिए रेल विकास प्राधिकरण स्थापित करने की जरूरत बताई।सभी सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप में ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाई जाएंगी। स्वास्थ्य के बारे में रणनीति पत्र का कहना है कि 150,000 स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर के साथ 'आयुष्मान भारत' कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने की जरूरत है।  दस्तावेज में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में सस्ते आवास के लिए आने वाले वर्षों में खासा जोर लगाया जाएगा। इस बारे में नीति आयोग के चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा, 'रणनीतिक दस्तावेज के बाद दृष्टि पत्र जारी होगी, जिसमें अगले 15 सालों के लिए भारत की विकास गति का खाका होगा। इन दोनों पत्रों का मुख्य मकसद सुधारों और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचाना है।'

दस्तावेज में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे व्यवहार के अनुसार ही सेवा समाप्त किए जाने पर मुआवजा दिया जाना चाहिए। वेतन के बारे में दस्तावेज में कहा गया है कि सरकार को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 का दायरा बढ़ाना चाहिए ताकि इसमें सभी तरह के रोजगार आ सके। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि सभी के लिए चेक या आधार के माध्यम से वेतन के भुगतान पर जोर दिया जाना चाहिए।  दस्तावेज में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राज्य सभा में विचाराधीन मोटर वाहन (संशोधन विधेयक), 2016 बिना किसी देरी के पारित होना चाहिए। दस्तावेज में प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता पूर्ण निगरानी के साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का पहला चरण पूरा किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है और राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई दोगुनी कर 2022-23 तक 2 लाख किलोमीटर तक करने की बात कही गई है।

Keyword: narendra modi, BJP, economy, niti ayog,,
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