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जल्द आ सकती है मेथनॉल नीति

शाइन जैकब / नई दिल्ली December 17, 2018

केंद्रीय मंत्रिमंडल स्वच्छ ऊर्जा मिशन के तहत एक बड़े कदम के रूप में अगले दो महीने में मेथनॉल के संबंध में एक विस्तृत नीति ला सकता है। इस नीति में मेथनॉल आयात को भी शामिल किया जा सकता है। इसमें सब्सिडी से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है। खाना पकाने की गैस के रूप में मेथनॉल का इस्तेमाल भी इसमें शामिल है। असम पेट्रोकेमिकल्स के नक्शे कदम पर चलते हुए ऐसा किया जा रहा है। इसके तहत 5 नवंबर को मेथनॉल कुकिंग स्टोव का उपयोग करते हुए 500 अलग-अलग परिवारों को मेथनॉल सिलेंडरों की आपूर्ति की गई है। उपभोक्ताओं को इस ईंधन के लिए 600 रुपये प्रति सिलेंडर का व्यय करना होता है जबकि बाजार में गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडरों के लिए 809.5 रुपये का व्यय करना होता है।
 
नीति आयोग भी खाना पकाने के ईंधन के तौर पर मेथनॉल को तरजीह देने के लिए मास्टर प्लान लेकर आया है। इसमें असम में 50,000 परिवारों और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरीबी-रेखा से नीचे के 20,000 परिवार को शामिल किया जा रहा है। मंत्रिमंडल देश के विभिन्न हिस्सों में चार डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) संयंत्रों की स्थापना को भी मंजूरी देगा। डीएमई डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का विकल्प हो सकता है। नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने कहा कि हमें उम्मीद है कि 2022 तक देश में परिवहन, खाना पकाने और जलमार्ग जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग शुरू होने बाद देश में मेथनॉल की मांग एक करोड़ टन हो जाएगी। इस प्रारंभिक मांग को पूरा करने के लिए हम वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान दस लाख टन मेथनॉल आयात करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि भारत में 12 लाख टन की क्षमता है लेकिन वर्तमान में क्षमता उपयोग केवल 7,00,000 टन ही है।
 
भारत में प्रमुख मेथनॉल उत्पादक हैं - गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर ऐंड केमिकल्स (जीएनएफसी), राष्ट्रीय केमिकल्स ऐंड फर्टिलाइजर्स (आरसीएफ) और असम पेट्रोकेमिकल्स ऐंड नैशनल फर्टिलाइजर्स। इस ईंधन का आयात करने के लिए भारत ईरान, सऊदी अरब, कतर और चीन जैसे देशों पर विचार करेगा। देश मेथनॉल उत्सर्जन के लिए अपने बड़े कोयला भंडार को लेकर भी योजना बना रहा है और प्राकृतिक गैस ब्लॉक पर भी उसकी निगाहें हैं। फिलहाल भारत में व्यावसायिक तौर पर कोयले से मेथनॉल बनाने का संयंत्र नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा संचालित कोल इंडिया लिमिटेड पश्चिम बंगाल के डानकुनि में इस प्रकार की परियोजना और ओडिशा के तालचर में कोयला से गैस बनाने वाली परियोजना पर काम कर रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अब परिवहन ईंधन के रूप में मेथनॉल (एम 15 श्रेणी) को मंजूरी दे दी है। चीन और इजराइल उन प्रमुख देशों में शामिल हैं जिन्होंने मेथनॉल को परिवहन ईंधन के रूप में स्वीकार कर लिया है। 
 
नीति आयोग के अनुसार इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की अनुसंधान शाखा वाहनों में मेथनॉल के सही मिश्रण को लेकर अध्ययन कर रही है। वर्तमान अनुमान के आधार पर प्रति दिन 1,600 टन क्षमता वाले मेथनॉल संयंत्र के लिए 12 अरब रुपये के पूंजीगत व्यय की जरूरत होगी और यह 17-19 रुपये प्रति लीटर की दर से उत्पादन करने में सक्षम होगा।
Keyword: methanol, subsidy, policy,,
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