बिजनेस स्टैंडर्ड - 'ई-कॉमर्स नीति पेश करे सरकार'
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'ई-कॉमर्स नीति पेश करे सरकार'

शुभायन चक्रवर्ती और करण चौधरी / नई दिल्ली December 17, 2018

साझा दुश्मन से लडऩे के लिए एक साथ आए कारोबारियों, ऑफलाइन परंपरागत किराना दुकानदारों और किसानों के अधिकार के लिए लडऩे वाले संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने ई-कॉमर्स फर्मों की भारी छूट और बेहद कम मूल्य की रणनीति खत्म करने की मांग की है। सरकार ने जहां यह साफ किया है कि वे भारी छूट और बेहद कम मूल्य की रणनीति के खिलाफ काम करेगी, वहीं कारोबारी संगठन चाहते हैं कि सरकार अभी कार्रवाई करे। संगठनों का कहना है कि सरकार को चुनाव का इंतजार नहीं करना चाहिए और तत्काल ई कॉमर्स नीति पेश करना चाहिए। 
 
कॉन्फे डरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, 'बेहद कम मूल्य के तरीके पर लगाम लगाने की जरूरत है। इसने घरेलू कारोबार में हस्तक्षेप कर उसे नष्ट किया है। इस तरह के कारोबार और इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त कंपनियों पर नियंत्रण किए जाने की जरूरत है। कोई नीतिगत व्यवस्था न होने की वजह से उन्हें अपने मुताबिक काम करने की छूट मिल जाती है। सरकार को जल्द आवश्यक कदम उठाना चाहिए। चुनाव का इंतजार क्यों हो रहा है? ई कॉमर्स नीति और नियामकीय प्राधिकरण वक्त की जरूरत है।' 
 
बहरहाल ई-कॉमर्स फर्मों ने दावा किया कि वे सभी मानकों का पालन कर रही हैं और वे कोई छूट दे रही हैं, बल्कि विक्रेता छूट देते हैं। देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस में से एक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा, 'मॉलों की तरह हम भी त्योहारी बिक्री करते हैं, हम ऑनलाइन माध्यम हैं, जहां बिक्रेता, खुदरा कारोबारी छूट की पेशकश करते हैं। हमारी साफ नीतियां हैं, जिनके मुताबिक हम किसी छूट के लिए वित्तपोषण नहीं करते न ही बिक्रेताओं को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।'  सरकार ने अपनी तरफ से यह साफ किया है कि कोई नई ई कॉमर्स नीति आती है तो उसमें प्रीडेटरी प्राइसिंग पर लगाम लगाने के लिए प्रावधान होंगे, जिसे ई कॉमर्स फर्में छूट के माध्यम से प्रोत्साहित करती हैं और अपने मार्केटप्लेसपर कीमतों को प्रभावित करती हैं। डीआईपीपी के एक अधिकारी ने कहा, 'भारी छूट के मामले में प्रावधान को लेकर हमें कोई बड़ी कठिनाई नहीं है क्योंकि ई कॉमर्स कंपनियां, खुदरा संगठन और उपभोक्ता समूह तीनों ही सहमत हैं कि यह तरीका टिकाऊ नया कारोबार का स्वस्थ मॉडल नहीं है। ऐसे में नया मसौदा जब भी आएगा, निश्चित रूप से इसके लिए प्रावधान होगा।'
Keyword: e commerce, policy, company,,
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