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हमारे लिए बाजार का विस्तार कर रहा है रुपे

करण चौधरी और इंदिवजल धस्माना /  December 17, 2018

मास्टरकार्ड द्वारा अमेरिकी अधिकारियों को भारत द्वारा रुपे को सुविधाएं देने की शिकायत संबंधी विवाद के बीच कंपनी के दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पौरुष सिंह ने करण चौधरी और इंदिवजल धस्माना से बातचीत में कहा कि वैश्विक भुगतान और तकनीक कंपनी की रिपोर्ट में बहुत कुछ है, जिसका कुछ अंश पढ़ा गया है। बातचीत के अंश...

 
क्या आप भारत में रुपे से पिछड़ रहे हैं?
 
अगर आप भारत जैसे बाजार की ओर देखें तो सिर्फ डेबिट कार्ड से 400 अरब डॉलर नकदी का लेनदेन एटीएम के माध्यम से होता है। सच यह है कि किसी को नुकसान नहीं हो रहा है। वाणिज्यिक भुगतान में 500 अरब डॉलर तक का लेनदेन चेक या नकदी के माध्यम से होता है। ऐसे में बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। यहां तीन कारोबारी हैं, जो मुझे लगता है कि अच्छा है। इससे ग्राहकों को विकल्प मिलता है। हमारी हिस्सेदारी कम होने को लेकर बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहा जा रहा है। भारत में 2016 तक सिर्फ 15 लाख प्वाइंट आफ सेल थे, जो 30 साल में बने। इस साल के अंत तक 50 लाख से ज्यादा टर्मिनल होंगे। यह बहुत तेज वृद्धि है और इसमें सबकी भूमिका है। 
 
लेकिन आपने अमेरिका से शिकायत की है कि भारत में रुपे को बढ़ावा दिया जा रहा है?
 
लोगों ने इसका एक हिस्सा लिया है। वह रुपे के बारे में नहींं था। वह शिकायत नहीं थी। हम अमेरिका की कंपनी हैं, हमें अपने दायित्वों के रूप में तमाम अद्यतन जानकारी देनी होती है। इसी तरह का दायित्व हमें भारत में भी निभाना पड़ता है। 
 
क्या आपको लगता है कि स्वदेशी कार्ड ग्रामीण बाजारों में बढ़त बना सकता है?
 
कारोबार के हिसाब से देखें तो इस कार्ड या उस कार्ड में कोई अंतर नहीं है। हर किसी का शुल्क एक ही है। ग्राहक के हिसाब से देखें तो वे बैंक से कार्ड के लिए कहते हैं न कि मास्टरकार्ड, वीजा या रुपे से। सिर्फ एक अंतर जनधन योजना के मामले में है, जो एक बड़ा सेग्मेंट है लेकिन वही एकमात्र नहीं है। दरअसल इससे वितरण की पूर्णता में मदद मिल रही है। ऐसे में बाजार को जिसकी जरूरत है, उसमें यह पूरक है। 
 
निवेश की क्या योजना है?
 
2014 से 2019 के लिए हमने कहा था कि हम करीब 7,000 करोड़ रुपये निवेश करेगे। लेकिन भविष्य के लिए कोई आंकड़ा नहींं तय किया गया है। हमने इंडिया इन्वेस्टमेंट फंड शुरू किया है, जो हमेशा ज्यादा कंपनियों को खरीदने के लिए नहीं बल्कि साझेदारी के लिए है। हमने कुछ किया है, कुछ सफलता भी मिली है। कुछ जगहोंं पर हम पूरी खरीद करेंगे जबकि कुछ कंपनियों में कुछ हिस्सेदारी खरीदेंगे। हमने कोई लक्ष्य नहीं रखा है कि कितनी कंपनियों में निवेश किया जाएगा। हम नए दौर की फिनटेक फर्मों पर विचार कर रहे हैं, जो कुछ अलग कर रही हैं। हम उन तकनीकों पर विचार कर रहे हैं, जिनसे सुरक्षा और संरक्षा के साथ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सकता है।
 
क्या रुपे की वजह से आपके साझेदार कम हो रहे है?
 
नहीं, दरअसल विस्तार हो रहा है। अब मास्टर कार्ड के लिए कार्ड जारी करने वाले बैंकों की संख्या तीन साल पहले की तुलना मेंं ज्यादा है। 
 
हाल में आपने कहा था कि आप साइबर सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ऐसा क्यों?
 
जब आप दुनिया से बहुत ज्यादा जुड़ते हैं तो हैकर हमेशा हमले करते हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि भारत आसान जगह है, वे हर बाजार पर हमले करेंगे। हैक हमले इस समय संगठित हैं और इनका वैश्विक असर है। धोखाधड़ी से ग्राहकों का आत्मविश्वास कमजोर होता है। हम हर तीन साल पर अरबोंं डॉवर सुरक्षा पर खर्च करते हैं। 
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