बिजनेस स्टैंडर्ड - विनिवेश का लक्ष्य होगा पार!
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विनिवेश का लक्ष्य होगा पार!

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 12 17, 2018

... विनिवेश का मामला

दीपम को भरोसा, चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से मिल सकते हैं 850 अरब रुपये
एयर इंडिया का निजीकरण विफल रहने के बाद सरकार ने विनिवेश योजना में किया बदलाव
भारत 22 ईटीएफ की एक और खेप से सरकार जुटा सकती है 100 अरब रुपये
पीएफसी-आरईसी सौदा पूरा होने का भरोसा
ड्रेजिंग कॉर्प, स्कूटर्स इंडिया, पवन हंस और सीईएल में रणनीतिक बिक्री
आ सकता है मझगांव डॉक्स, आरवीएनएल और आईआरएफसी का आईपीओ

बिजनेस स्टैंडर्ड विनिवेश का लक्ष्य होगा पार!वित्त वर्ष 2018-19 के लिए तय 800 अरब रुपये का विनिवेश लक्ष्य पूरा होने पर पहले संशय जताया जा रहा था लेकिन निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को अब भरोसा है कि लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जाएगा। उनके अनुसार विनिवेश से 850 अरब रुपये तक जुटाए जा सकते हैं। साल के बाकी बचे महीनों में सरकार की योजना भारत 22 एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) का एक और अनुवर्ती निर्गम लाने की योजना है, जो करीब 100 अरब रुपये का होगा। इसके साथ ही पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग इकाई और स्कूटर्स इंडिया की रणनीतिक बिक्री 31 मार्च से पहले पूरा करने की योजना है। 

मझगांव डॉक्स, रेलवे की कंपनियों आरवीएनएल और आईआरएफसी (दोनों में 10-10 फीसदी विनिवेश) तथा एमएसटीसी का भी आईपीओ लाया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की शेयर पुनर्खरीद से भी विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार सार्वजनिक उपक्रमों की पुनर्खरीद से सरकार को करीब 120 से 150 अरब रुपये मिल सकते हैं। इसके अलावा सामान्य बीमा कंपनियों जीआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस की बिक्री पेशकश लाई जा सकती है।

एक शीर्षस्थ सूत्र ने संकेत दिया कि सरकार एनटीपीसी पर दबाव डाल रही है वह एसजेवीएन में सरकारी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करे, जिसका मूल्य करीब 70 अरब रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल 'शत्रु की संपत्ति' बेचने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूर कर चुका है। इसके साथ ही ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी पूरी हिस्सेदारी चार बंदरगाहों के कंसोर्टियम को बेचने की अनुमति दे दी है। इन दोनों से करीब 30.7 अरब रुपये मिल सकते हैं। यह पीएफसी द्वारा आरईसी की प्रस्तावित 121 अरब रुपये में हिस्सेदारी अधिग्रहण से इतर होगा।

एक अधिकारी ने कहा, 'हमें इन सौदों में अच्छा प्रीमियम मिलने की उम्मीद है।' बिजली क्षेत्र की दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बीच प्रस्तावित सौदा इस साल अकेला सबसे बड़ा विनिवेश होगा और इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड तथा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी की जरूरत होगी। दीपम के अधिकारियों ने भरोसा जताया कि नियामकीय मंजूरी मिल जाएंगी और सौदा समय पर पूरा होगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'सरकार के अंदर इसे लेकर संशय है कि विनिवेश का लक्ष्य पूरा होगा या नहीं, खासकर एयर इंडिया के निजीकरण की विफलता के बाद ऐसे सवाल उठ रहे हैं। लेकिन विभिन्न विभाग साथ मिलकर वैकल्पिक उपायों पर काम कर रहे हैं तथा राजनीतिक नेतृत्व से भी समर्थन मिल रहा है। हम 800 अरब रुपये के लक्ष्य को पार कर सकते हैं।' आज की तारीख में विनिवेश से कुल 340 अरब रुपये जुटाए गए हैं। आरईसी-पीएफसी सौदे से यह आंकड़ा 500 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में दो ईटीएफ - भारत 22 ईटीएफ और सीपीएसई ईटीएफ से क्रमश: 83 अरब रुपये और 170 अरब रुपये जुटाए जा चुके हैं।

Keyword: Disinvestment, dipam, IPO,,
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