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पुराने फंडों में निवेश के समय इन बातों का रखें ध्यान

संजय कुमार सिंह /  December 16, 2018

फ्रैंकलिन टेंपलटन के दो फंडों- फ्रैंकलिन इंडिया ब्लूचिप और फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड ने इस साल 25 साल पूरे कर लिए हैं। इन दोनों फंडों का शानदार रिकॉर्ड है। इन्होंने अपनी शुरुआत से क्रमश: 20.30 फीसदी और 19.57 फीसदी चक्रवृद्धि सालाना प्रतिफल दिया है। रोचक बात यह है कि अन्य 22 इक्विटी फंडों के 20 साल से अधिक के आंकड़े उपलब्ध हैं। उनमें से 14 फंडों ने निवेशकों को 12 फीसदी से अधिक प्रतिफल दिया है। म्युचुअल फंड उद्योग में जो फंड अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं, उनका या तो विलय कर दिया जाता है या उन्हें बंद कर दिया जाता है। ये फंड डार्विन के योग्यतम की उत्तरजीविता के सिद्धांत पर काम करते हैं, इसलिए निवेशकों को निवेश के लिए विंटेज फंडों के बारे में विचार करना चाहिए। 

 
निरंतरता और स्थायित्व 
 
फ्रैंकलिन के फंड अपनी एक निर्धारित रणनीति पर लगातार टिके रहे हैं, जिसकी उसके फंडों की सफलता में अहम भूमिका रही है। फ्रैंकलिन टेंपलटन एसेट मैनेजमेंट में पोर्टफोलियो प्रबंधक और मुख्य निवेश अधिकारी के एन शिवसुुब्रमण्यन ने कहा, 'हमने अपनी शुरुआती गलतियों से सबक सीखा है। कुछ समय में इन फंडों के प्रबंधन के तरीके एवं प्रक्रिया पटरी पर आ गई। एक रणनीति से जुड़े रहने की बदौलत ही ये फंड बाजारों के उतार-चढ़ावों को पार करने में कामयाब रहे हैं।' शिवसुब्रमण्यन फ्रैंकलिन के दोनों फंडों का प्रबंधन कर चुके हैं। 
 
विशेषज्ञों ने कहा कि इन फंडों का शानदार प्रदर्शन इसलिए रहा क्योंकि एक ही फंड प्रबंधन टीम लंबे समय तक बनी रही। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक (प्रबंध अनुसंधान) कौशतुभ बेलापुरकर ने कहा, 'शिवसुुब्रमण्यन ने बहुत लंबे समय तक इस प्रबंधन टीम की अगुआई की और फिर यह कमान आनंद राधाकृष्णन और आर जानकीरामन को सौंप दी। इस फंड हाउस ने उन लोगों को चुनने पर बहुत अधिक ध्यान दिया है, जो अपनी निवेश की रणनीति पर टिके रहना चाहते हैं।' उस समय भारतीय बाजार का ठीक से शोध नहीं हुआ था। इससे भी फंडों को मदद मिली। 
 
बाजार के विभिन्न दौरों का अनुभव 
 
अगर कोई फंड लंबे समय से मौजूद है तो उसमें निवेश करने के बहुत से फायदे मिलते हैं। उस फंड के प्रदर्शन का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड फंड प्रबंधन टीम के कौशल को दर्शाता है। इसके अलावा ये फंड और उनके प्रबंधक (अगर उनमें बदलाव नहीं हुआ है) बाजार के कई उतार-चढ़ावों से गुजर चुके होते हैं। प्लान एहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन ने कहा, 'अनुभवी फंड प्र्रबंधक बाजारों की तेजी और गिरावट से विचलित नहीं होते हैं। वे ऐसी परिस्थितियां देख चुके होते हैं और इसलिए उनसे अपनी रणनीति नहीं बदलते हैं।'
 
निवेशक बहुत से मानकों के आधार पर पुराने फंडों का आकलन कर सकते हैं। शिवसुब्रमण्यन ने कहा, 'वे यह जांच सकते हैं कि क्या फंड प्रबंधन की रणनीति में निरंतरता है। क्या फंड ने अपनी रणनीति से भटक रहा है।' आम तौर पर पुराने फंड बड़ी मात्रा में प्रबंधनाधीन संपत्तियां (एयूएम) एकत्र कर लेते हैं। फंडों में खर्च का अनुपात एयूएम स्लैब पर आधारित है, इसलिए आम तौर पर उनकी लागत कम होती है। 
 
रास्ता नहीं भटकें 
 
इन विंटेज फंडों की लंबी और सफल यात्रा निवेशकों को कुछ महत्त्वपूर्ण सीख देती है। सुब्रमण्यन ने कहा, 'निवेेशकों को शेयरों में निवेश करना चाहिए क्योंकि आम तौर पर यह संपत्ति वर्ग लंबे समय में अच्छा प्रतिफल देता है। आपके निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, उतना ही शेयरों में निवेश का जोखिम कम हो जाएगा।' मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी ने कहा, 'लंबी अवधि के लिए निवेश करके ही आप शेयरों की चक्रवृद्धि प्रतिफल की ताकत का फायदा उठा सकते हैं। वे लंबी अवधि में सावधि जमा और सोने जैसी अन्य परिसंपत्तियों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।'
 
अमूमन निवेशकों का प्रतिफल निवेश प्रतिफल से अलग होता है। धवन कहते हैं, 'भले ही बहुत से पुराने फंडों ने ऊंचा प्रतिफल दिया हो, लेकिन संभव है कि बहुत से निवेशकों को यह नहीं मिल पाया हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निवेशक बाजारों के दौर के हिसाब से फंडों में प्रवेश और निकासी की कोशिश करते हैं। उन्हें लंबे समय तक अपना निवेश बनाए रखना चाहिए।' उन्होंने कहा कि अगर आपने ऐसे किसी फंड में निवेश किया हुआ है, जो लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहा है तो उस फंड से बाहर निकलकर उसी श्रेणी के किसी अन्य फंड में निवेश करने से आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा। वह कहते हैं कि असली नुकसान तब होता है, जब निवेशक एक श्रेणी से बाहर निकलकर दूसरी श्रेणी में जाते हैं। बहुत से निवेशकों ने 2017 में ऐसा ही किया। उन्होंने लार्ज-कैप फंडों से पैसा निकालकर मिड और स्मॉल-कैप फंडों में लगाया क्योंकि उस समय उन श्रेणियों का पिछला प्रदर्शन बेहतर नजर आ रहा था। 
 
निवेशकों के लिए अपनी उम्मीदों में बदलाव करना भी जरूरी है। शिवा कहते हैं, 'प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और अब सूचना एक वस्तु बनती जा रही है, इसलिए बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन का स्तर नीचे आने के आसार हैं।' केवल कुछ कुशल फंड प्रबंधक ही अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। पैसिव फंडों की अहमियत ज्यादा बढऩे की उम्मीद है, विशेष रूप से लार्ज-कैप श्रेणी में। पैसिव फंड लगातार बाजार के बराबर प्रतिफल देते हैं। 
 
जरूरी पड़ताल करें 
 
किसी निवेश फंड में निवेश करने से पहले कुछ आवश्यक जांच-पड़ताल करें। यह सुनिश्चित करें कि फंड के कामकाज का तरीका और दायरा एकसमान बना रहे। हाल में फंडों की श्रेणियों का फिर से वर्गीकरण किया गया था, जिसमें कई फंडों को अपने कामकाज के तरीके और दायरे में बदलाव करने को बाध्य होना पड़ा। कुछ फंडों ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया। एक फंड कुछ वर्षों के दौरान मिड-कैप से मल्टी-कैप और फिर से मिड-कैप फंड के रूप में आ सकता है। बेलापुरकर ने कहा, 'विभिन्न बाजार चक्र निवेश के अलग-अलग तरीकों के लिए उपयुक्त हैं। अगर कोई फंड किसी एक तरीके पर लगातार टिका रहता है तो वह एक पूरे बाजार चक्र के दौरान अच्छा प्रदर्शन करेगा। लेकिन अगर वह बाजार चक्र के हिसाब से अपनी तरीके में बदलाव करता है तो उसके मुश्किल में फंसने का जोखिम होता है।' फ्रैंकलिन इंडिया ब्लूचिप को लगातार लार्ज-कैप पर जोर रखने के लिए जाना जाता है। फंड प्रबंधकों में भी बहुत अधिक बदलाव भी खतरे का संकेत है। एक स्थायी प्रबंधन टीम से फंड प्रबंधन की प्रक्रिया में निरंतरता आती है। बनर्जी ने कहा, 'फंड प्रबंधक फंड के साथ कम से कम तीन साल से जुड़ा होना चाहिए और वह बाजार में तेजी और गिरावट दोनों तरह के दौर देख चुका हो।'
 
फंड का हाल के प्रदर्शन की पड़ताल करने के लिए पिछले पांच वर्षों का प्रदर्शन देखें। इससे आपको पता चलेगा कि फंड अब भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या उसकी चमक पिछले प्रदर्शन से ही नजर आ रही है। बनर्जी ने कहा, 'प्रदर्शन में निरंतरता पर ध्यान दें। तेजी के बाजार में बेंचमार्क को मात देना और गिरते हुए बाजार में कम गिरना किसी फंड प्रबंधन की सबसे बड़ी योग्यता है।' उन फंडों के पीछे भागने से बचें, जिन्होंने केवल हाल-फिलहाल में अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे फंड तलाशें, जिनका एयूएम कम से कम 5 अरब रुपये है। बहुत कम फंडों के बंद होने का जोखिम होता है। ऐसे फंडों के पास उस बड़ी टीम की नियुक्ति के लिए संसाधनों का अभाव होता है, जो फंड प्रबंधक को लगातार निवेश के नायाब विचार मुहैया करा सकें। स्मॉल-कैप श्रेणी में बड़े आकार के फंडों के लिए बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन लार्ज-कैप श्रेणी में आकार एक बड़ी चिंता नहीं है। 
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