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नए नियमों से बढ़ेगा निवेशक आधार

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई December 13, 2018

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की नई स्टार्टअप सूचीबद्घता पहल से संस्थागत निवेशकों का आधार मजबूत होगा। स्टार्टअप अब इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म ((आईजीपी) पर सूचीबद्घ हो सकेंगे और इससे बड़ी तादाद में स्टार्टअप को इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। संस्थागत सेगमेंट में अब ऑफशोर फंड, अमीर निवेशक और प्रमुख नेटवर्क शामिल हैं जिनमें से कई ऑफशोर फंड मॉरिशस और अमेरिका के हैं।  पूर्व के संस्थागत कारोबार प्लेटफॉर्म (आईटीपी) के लिए नियामकीय ढांचा पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी), फैमिली ट्रस्टों और व्यवस्थित तौर पर महत्वपूर्ण एनबीएफसी के लिए सीमित रहा है। 
 
नया प्लेटफॉर्म उन कंपनियों के लिए कोष उगाही का वैकल्पिक माध्यम मुहैया करा सकता है जो अब तक पूंजी जुटाने के लिए निजी इक्विटी और उद्यम पूंजी निवेशकों पर निर्भर थीं। रिपोर्टों के अनुसार, स्टार्टअप ने 2018 की पहली छमाही में लगभग 400 सौदों के जरिये 3.5 अरब डॉलर से अधिक की रकम जुटाई।  ऑनवार्ड टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं चेयरमैन हरीश मेहता ने कहा, 'प्रमुख निवेशकों को मान्यताप्राप्त निवेशकों (एआई) के दायरे में लाना दिशा-निर्देशों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि एंजल्स (प्रमुख निवेशक) भारत में उद्यमिता का इंजन हैं।'
 
आईजीपी के उद्देश्य के लिए मान्यताप्राप्त निवेशकों में सालाना 50 लाख रुपये की सकल आय वाले लोग और 0.5 अरब रुपये की न्यूनतम लिक्विड निवेश पूंजी या 2.5 अरब रुपये की निवेश पूंजी वाली कोई भी कंपनी शामिल हैं।  टीआईई मुंबई के अध्यक्ष अतुल निशार ने कहा, 'नए मानक देश में स्टार्टअप्स और उद्यमियों द्वारा ज्यादा रोजगार सृजन का रास्ता साफ करेंगे, क्योंकि बाजार में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। हम सेबी द्वारा इन सुधारों के परिणामस्वरूप भारत से कई और दिग्गजों के उभरने की उम्मीद कर सकते हैं।'
 
नए नियमों के तहत सेबी ने उस क्लॉज को हटा दिया है जिसके तहत पहले किसी व्यक्ति को स्टार्टअप में निर्गम पूंजी के बाद 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं थी।  थिंकिंग लीगल के संस्थापक वनीसा अग्रवाल ने कहा, 'इस मानक का मकसद बड़े निवेशकों से बड़े आकार के निवेश को बढ़ावा देना है। विभिन्न शर्तों को आसान बनाना स्टार्टअप के लिए सूचीबद्घता को आकर्षक बनाने के लिए जरूरी है।' ऐसे कुछ क्षेत्र हैं जिनमें सुधार लाया जा सकेगा। पैंटोमैथ कैपिटल एडवायजर्स के संस्थापक महावीर लूणावत ने कहा, 'स्वीकृत आईजीपी ढांचे पर आईपीओ लाने के लिए पूर्व शर्तों में से एक यह है कि स्टार्टअप के पास कम से कम 25 प्रतिशत संस्थागत शेयरधारिता होनी चाहिए। परिभाषा के लिहाज से, सीरीज बी या सी के बाद ही स्टार्टअप आईजीपी तक पहुंचने में सक्षम होंगे। आईजीपी में सभी चरणों के स्टार्टअप की सूचीबद्घता सक्षम बनाई जानी चाहिए। एक्सचेंजों को पूरे तंत्र को विकसित बनाने के लिए व्यापक तौर पर काम करने और सूचीबद्घ इक्विटी के तौर पर स्टार्टअप के लिए निवेशक दिलचस्पी बढ़ाने की जरूरत होगी।'
 
स्टार्टअप के साथ सौदे करने वाले एक प्रतिभूति अधिकारी ने कहा, 'नए मानक छोटे स्टार्टअप को इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं बनाएंगे। सेबी की अनुपालन शर्तों को पूरा करना आसान नहीं होगा और इस प्लेटफॉर्म को लोकप्रिय बनाने में समय लग सकता है।' उन्होंने कहा कि कई और गैर-टेक स्टार्टअप को शामिल करने के लिए मौजूदा दायरा बढ़ाया जा सकता है। नई कंपनियों की सूचीबद्घता को सक्षम बनाने के लिए आईटीपी के लिए नियामकीय ढांचे की घोषणा सबसे पहले 14 अगस्त 2015 को की गई थी। उसके बाद सेबी ने इस प्लेटफॉर्म को लोकप्रिय बनाने के लिए 29 जुलाई 2016 को एक चर्चा पत्र के जरिये कई सुझाव दिए। हालांकि प्लेटफॉर्म इसमें विफल रहा क्योंकि इसे उपयुक्त मंच नहीं समझा गया। 
Keyword: invest, ITP, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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