बिजनेस स्टैंडर्ड - जॉनसन मामले में कानूनी विकल्पों पर हो रहा विचार
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जॉनसन मामले में कानूनी विकल्पों पर हो रहा विचार

वीणा मणि और सोहिनी दास / नई दिल्ली/मुंबई 12 13, 2018

त्रुटिपूर्ण कूल्हे के प्रत्यारोपण पर मुआवजा दिए जाने का मामला

जॉनसन ऐंड जॉनसन के त्रुटिपूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण में मुआवजे का मामला

भारत के औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम में इस तरह के मामलों में मुआवजे का प्रावधान नहीं

उपभोक्ता संरक्षण कानून, दंड संहिता सहित विभिन्न कानूनों पर विचार 

जॉनसन ऐंड जॉनसन का कहना है कि सरकार ने मुआवजा तय करते समय कंपनी की नहीं सुनी बात

सरकार को उच्चतम न्यायालय के फैसले से भी मामला सुलझने की उम्मीद

बिजनेस स्टैंडर्ड जॉनसन मामले में कानूनी विकल्पों पर हो रहा विचारवैश्विक मेडिकल उपकरण विनिर्माता कंपनी जॉनसन ऐंड जॉनसन (जेऐंडजे) इस समय त्रुटिपूर्ण कूल्हा प्रत्यारोपण के मामले में प्रभावित मरीजों को मुआवजे के भुगतान को लेकर सरकार की अधिसूचना को लेकर जूझ रही है। सरकार को उम्मीद है कि वह बहुराष्ट्रीय कंपनी को मुआवजा फॉर्मूले के लिए बाध्य करने में सफल होगी। वहीं सरकार इस मसले पर विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर भी विचार कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया कि वैश्विक रूप से जेऐंडजे या इसकी सहायक इकाइयों ने याचिका के आधार पर या मरीजों से न्यायालय के बाहर समझौते के आधार पर मुआवजे का भुगतान किया है। यह मुआवजा बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा तैयार किए गए त्रुटिपूर्ण घुटनों के प्रत्यारोपण से मरीजों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए किया गया।  एक सूत्र ने कहा, 'हमारे औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 में मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।

जेऐंडजे का मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा कानून के तहत मरीजों को मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। हम इसे ठीक करने के लिए पहले ही कदम उठा चुके हैं। वैश्विक रूप से जेऐंडजे प्रभावित मरीजों को भुगतान कर रही है, जिनमें ज्यादातर न्यायालय के आदेश के मुताबिक या न्यायालय के बाहर समझौते के आधार पर किया गया है। इसकी कोई वजह नहीं है कि वे भारत के मरीजों को मुआवजा न दें।'

उन्होंने आगे कहा कि उत्पाद त्रुटिपूर्ण होने की स्थिति में कुछ देशों के औषधि अधिनियम में मरीजों को हर्जाना देने का प्रावधान नहीं है।  अधिकारी ने साफ किया कि अमेरिका में भी कंपनी न्यायालय के बाहर दावों पर समझौते की कोशिश कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय का नियम उसके पक्ष में होगा। दरअसल सरकार शीर्ष न्यायालय मेंं एक एफिडेबिट दाखिल करने और जेऐंडजे को मरीजों को मुआवजे के भुगतान देने के  दिशानिर्देश देने का अनुरोध करने की योजना बना रही है।

उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने कहा, 'हम सभी मरीजों से दावे प्राप्त कर रहे हैं और उसका मूल्यांकन कर रहे हैं, जब मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। बहरहाल हमने जरूरत के मुताबिक न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल कर दी है।' सरकार कानून में अन्य प्रावधान डालने को लेकर तैयार है, जिससे कि बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा भारत के मरीजों को मुआवजा दिया जाना सुनिश्चित हो सके। अधिकारी ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो सरकार कानूनी रास्ता अख्तियार करेगी, जिसमें जेऐंडजे को उपभोक्ता संरक्षण कानून, दंड संहिता आदि में लाया जाना शामिल है।' 

इस मामले में जनहित याचिका (पीआईएल) उच्चतम न्यायालय में लंबित है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय को दी गई सूचना को संत्रान में लिया, जो पहले ही इस मसले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि जेऐंडजे की याचिका सुनने के पहले वह शीर्ष न्यायालय के फैसले का इंतजार करेगा।  

एएसआर कूल्हा प्रत्यारोपण से प्रभावित मरीजोंं को हर्जाना देने को लेकर जॉनसन ऐंड जॉनसन सरकार के फॉर्मूले को लेकर जूझ रही है। सरकार ने विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी, जिसने मरीजों को मुआवजा देने को लेकर फॉमूला तैयार किया है। कंपनी का दावा है कि विशेषज्ञों की समिति ने फॉर्मूला तैयार करते समय उससे बात नहीं की गई। 

जेऐंडजे मेडिकल इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने पूरी प्रक्रिया में सभी प्राधिकारियोंं का सहयोग किया। बहरहाल हमें केंद्रीय विशेषज्ञ समिति के सामने पेश होने का मौका नहीं दिया गया। इसमें तथ्यात्मक त्रुटियां हैं। मुआवजे का फॉर्मूला पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए और कानूनी ढांचा एक प्रक्रिया के तहत तैयार होना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब सभी पक्षों की उचित सुनवाई हो। इसके निष्कर्ष भी कानूनी ढांचे के अंतर्गत होने चाहिए, जो पूरे उद्योग पर एकसमान लागू हो।' कंपनी ने कहा कि वह सहयोग करने को लेकर प्रतिबद्ध है, जिसमें कानून के तहत उचित मुआवजा दिया जाना शामिल है। 

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