बिजनेस स्टैंडर्ड - विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत और हिंदुत्व की हार का मिथक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, March 21, 2019 09:53 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत और हिंदुत्व की हार का मिथक

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  December 13, 2018

उदारवादी और कांग्रेस पार्टी हिंदी प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार का जश्न हिंदुत्व की विचारधारा को नकारे जाने के रूप में मना रहे हैं। परंतु बहुत संभव है कि यह विजय एक नाशकारी विजय साबित हो। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों स्थानों पर जहां भाजपा के दो दिग्गज नेता वर्ष 2005 और 2003 से लगातार शासन कर रहे हैं, वहां असल समस्या ग्रामीण क्षेत्र की दिक्कतों और बेरोजगारी में निहित थी। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस को जीत मुख्यतौर पर कृषि ऋण की माफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा करने और किसानों का बिजली बिल सस्ता करने के नाम पर मिली। आर्थिक वृद्घि का खाका लगभग नदारद रहा। 

 
प्रश्न यह है कि दोनों सत्ताधारी मुख्यमंत्री कांग्रेस के दावों का मुकाबला क्यों नहीं कर सके? मध्य प्रदेश में तो किसान असंतोष हिंसा का रूप तक ले चुका था?  मोटेतौर पर ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दोनों को समझदारी भरी अर्थनीति पर चलना पड़ा। अतीत में किसानों को भारी भरकम मूल्य समर्थन देने, वेतन आयोग का बकाया भुगतान करने और राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए बनी केंद्र सरकार की उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के बोझ के कारण मध्य प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उदय योजना के अधीन राज्य के दायित्व के तहत उसे बिजली कीमतों में सब्सिडी भी कम करनी है। 
 
यानी मध्य प्रदेश में अपना चुनावी वादा पूरा करने के लिए कांग्रेस को राजकोषीय दायित्व के उस मामूली हिस्से का भी त्याग करना होगा जो राज्य सरकार ने दर्शाया था। वित्त वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश का राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी है और वित्त वर्ष 2019 के लिए इसके 3.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। ये दोनों 14वें वित्त आयोग की 3 फीसदी की अनुशंसा से अधिक हैं। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के उत्तराधिकारी इन विरोधाभासी मांगों के बीच संतुलन कैसे कायम करेंगे, यह देखने वाली बात होगी। 
 
ठीक यही बात छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के उत्तराधिकारी पर भी लागू होती है। यहां कांग्रेस ने सत्ता में आने के 10 दिन के भीतर कृषि ऋण माफ करने का वादा किया है। उसने धान के समर्थन मूल्य में अहम इजाफा करने और बिजली की दर आधी करने की बात भी कही है। छत्तीसगढ़ एक खनिज संसाधन संपन्न राज्य है लेकिन मानव विकास के मोर्चे पर राज्य काफी पीछे है। ऐसे में उसका राजकोषीय प्रबंधन बेहतर रहा है। राज्य राजस्व अधिशेष की स्थिति में है और वर्ष 2019 में उसका राजकोषीय घाटा 2.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यानी वहां नई सरकार के पास अपने चुनावी वादे पूरे करने की कुछ गुंजाइश है। 
 
बड़ा मुद्दा यह है कि राज्य का विकास तो तेज गति से हुआ है लेकिन इतना भी तेज नहीं कि वह पर्याप्त रोजगार तैयार कर सके। माओवादी विद्रोहियों से निपटने में कमजोरी ने बड़े निवेशकों को हतोत्साहित किया है। नोटबंदी ने छोटे और मझोले उपक्रमों को ठप कर दिया है। छत्तीसगढ़ को सुचारु संचालन के लिए केंद्र के अनुदान और करों की आवश्यकता होती है। राजस्व व्यय में राज्य का अपना राजस्व 40 फीसदी से भी कम है। सार्थक निवेश के अभाव में वृद्घि इतनी गति नहीं पकड़ सकती कि राज्य के किसानों की कर्ज माफी और बिजली शुल्क दरों में कमी को व्यवहार्य बनाया जा सके।
 
छत्तीसगढ़ की नई सरकार को प्रदेश में शराबबंदी के वादे को पूरा करने में भी दिक्कत होगी। यह कतई समझदारी भरा कदम नहीं है। बिहार में हम इस प्रयोग की नाकामी देख चुके हैं। वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने केवल सरकारी दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री की व्यवस्था की थी। इससे उसे शराब से मिलने वाले 2,000 करोड़ रुपये के राजस्व में काफी बढ़ोतरी हुई। यह बात समझ से परे है कि एक पार्टी जो कई लोकलुभावने वादे कर रही है वह राजस्व के एक बड़े स्रोत को बंद क्यों करने जा रही है। 
 
राजस्थान में दोनों दल बारी-बारी से सरकार बनाते आए हैं। इस वर्ष के आरंभ में प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 8,000 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ किया था। परंतु तमाम वजहों से वह दोबारा सरकार नहीं बना पाईं लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने संकेत दिया है कि नई सरकार सत्ता संभालने के 10 दिन के भीतर इस वादे को पूरा करेगी। राजस्थान देश के सबसे तेज विकसित होते राज्यों में से एक है लेकिन वह अपने संसाधनों में काम चलाने के लिए संघर्षरत है। राज्य का वित्तीय घाटा वर्ष 2018 में 3.5 फीसदी था और वर्ष 2019 में उसके 3 फीसदी रहने की उम्मीद है। परंतु अगर कृषि ऋण की माफी की जाती है तो यह लक्ष्य हासिल होता नहीं दिखता। यानी तीनों राज्यों को बाजार से उधारी लेनी होगी। नोटबंदी और जीएसटी के हड़बड़ी भरे क्रियान्वयन ने इन राज्यों में बेरोजगारी को एक बड़ी समस्या बना दिया। गोकशी पर प्रतिबंध ने डेयरी किसानों की चिंता को बढ़ा दिया। इस समस्या ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को प्रभावित किया। यह सब तब हुआ जबकि केंद्र में उन्हीं की पार्टी की सरकार है और उन्होंने किसानों की दिक्कत दूर करने के प्रयास किए। उसने घरेलू बाजार में ढांचागत बदलाव और निर्यात की समस्या को हल करने की दिशा में काम किया। इन तीनों राज्यों में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन के लिए हिंदुत्व कतई जिम्मेदार नहीं रहा। इसके पीछे आर्थिक मुद्दे जरूरी वजह थे। कांग्रेस की नई सरकारों को यह बात समझनी होगी। 
Keyword: election, chattisgarh, telangana, rajsthan, madhya pradesh, mizoram, BJP, congress,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जेट एयरवेज को उबारने में कारगर होगी बैंक की योजना?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.