बिजनेस स्टैंडर्ड - उठापटक का विश्व व्यापार पर हो सकता है असर
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उठापटक का विश्व व्यापार पर हो सकता है असर

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  December 12, 2018

पिछले एक पखवाड़े के दौरान भूराजनीतिक तनाव बढ़ा है और यह तनाव आगे भी बना रह सकता है। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के अनुमानों के चलते बाजारों का रुझान पहले से ही नकारात्मक था। वैश्विक स्तर पर रूस के यूक्रेन के समुद्री जहाज को 'जब्त' करने, फ्रांस में दंगे, ब्रिटेन में ब्रेक्जिट के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और एंगेला मर्केल के अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी नियुक्ति करने जैसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं। हुआवेई की सीएफओ को अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर कनाडा में गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटनाक्रम का चीन में बड़ा विरोध हुआ है। 

 
विशेष वकील रॉबर्ट मुलर ने ट्रंप के दो अहम सहयोगियों पर आरोप लगाए हैं, जिससे चुनाव प्रचार में नियमों के उल्लंघन की जांच व्हाइट हाउस के बिल्कुल नजदीक पहुंच गई है। ये घटनाक्रम वृद्धि के लिए अनुकूल नहीं हैं, इसलिए इनका बाजार के रुझान पर असर पड़ सकता है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह (ओपेक) की वियना बैठक में यह सहमति बनी है कि ओपेक और रूस उत्पादन में 12 लाख बैरल की दैनिक कटौती करेंगे। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और रुपये पर फिर से दबाव बना है। 
 
अमेरिकी बॉन्ड बाजार ने भी नकारात्मक संकेत दिया है। यह मंदी का मुख्य संकेतक है। बॉन्ड प्रतिफल में बदलाव आया है। अल्पावधि (दो साल के ट्रेजरी बिल) के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल लंबी अवधि (तीन साल और पांच साल) के प्रतिफल से ऊपर पहुंच गया है। नवंबर में नए गैर-कृषि रोजगारों का सृजन भी उम्मीद से कम रहा। इससे फेडरल रिजर्व दरों में बढ़ोतरी की अपनी योजना से पीछे हट सकता है। पूरे अटलांटिक क्षेत्र में अगर यूरोपीय केंद्रीय बैंक यूरोपीय संघ में संभावित मंदी को मात देना चाहता है तो उसे अपनी प्रतिभूति खरीद में कमी नहीं करने का फैसला करना पड़ सकता है। ऐसे अहम केंद्रीय बैंकों की समीक्षा का बाजार की दिशा पर असर पड़ेगा। अगर फेड नकदी उपलब्धता में सख्ती के वर्तमान कार्यक्रम को जारी रखते हुए दरों में बढ़ोतरी करता है और यूरोपीय केंद्रीय बैंक प्रतिभूति खरीद घटाने का फैसला करता है तो मुद्रा आपूर्ति का नुकसान होगा। इससे सभी बाजारों पर असर पड़ेगा। 
 
पटेल के इस्तीफे की वजह अभी पता नहीं चली है। पिछले सप्ताह तक इसकी कोई आहट नहीं थी। उस समय मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया था। हालांकि कम महंगाई और धीमी जीडीपी वृद्धि के कारण दरों में कटौती की गुंजाइश बनती थी। आरबीआई ने वृद्धि के पहले के अनुमान बरकरार रखते हैं, जबकि उसने महंगाई के अनुमानों में कटौती की है। समीक्षा में यह भी संकेत दिया गया कि मौद्रिक नीति समिति फरवरी में भी दरों को यथावत बनाए रख सकती है। लेकिन उसने राजकोषीय अनुशासन की जरूरत को लेकर चेतावनी जारी की। राजकोषीय घाटा पहले ही पूरे वर्ष के बजट अनुमानों को पार कर चुका है। वहीं चुनावी बाध्यताओं के चलते खर्च में कटौती करना भी संभव नजर नहीं आता है। चालू खाते का घाटा जीडीपी के 2.9 फीसदी पर है, मगर कच्चे तेल की कीमतें घटने पर इसमें कमी आ सकती है। 
 
बजट अनुमान हासिल करने के लिए जीएसटी संग्रह में दिसंबर से मार्च के दौरान वर्तमान स्तरों से करीब 45 फीसदी बढ़ोतरी की जरूरत होगी। लेकिन दूसरी तिमाही में सुस्ती और वाहन बाजार के कमजोर संकेतों को देखते हुए कर में इतनी बढ़ोतरी संभव नजर नहीं आ रही है। त्योहारी सीजन में नवंबर के दौरान वाहनों की बिक्री कमजोर रही है। डीलरों का कहना है कि उनके पास भारी स्टॉक है और कृषि क्षेत्र के संकट से ग्रामीण मांग में कमी आई है। होंडा एकमात्र ऐसी वाहन कंपनी थी, जिसने दीवाली सीजन के दौरान बिक्री में वृद्धि दर्ज की। दोपहिया की ही तरफ वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में भी गिरावट आई है। इसकी वजह बीमा की ज्यादा दरें, अधिक ईएमआई और महंगे ईंधन को बताया गया है। 
 
सरकार विनिवेश के लक्ष्य हासिल करने के लिए सार्वजनिक कंपनियों के एक-दूसरे की हिस्सेदारी हासिल करने के तरीके का इस्तेमाल कर रही है। पीएफसी-आरईसी सौदा इस तरीके से हुआ है। पिछले साल ओएनजीसी-एचपीसीएल सौदा भी इसी पद्धति से हुआ था। इन कंपनियों पर सरकार का ही नियंत्रण बना रहता है। केवल किसी कंपनी का कोष सरकारी खजाने में चला जाता है। ओएनजीसी-एचपीसीएल की तरह पीएफसी के कर्ज लेने से इस पीएसयू की बैलेंस शीट प्रभावित होगी। यह अल्पांश शेयरधारकों के साथ गलत व्यवहार है, लेकिन पहले से चला आ रहा तरीका है। अगर यह मानकर चलते हैं कि इस तरीके से 140 अरब रुपये आते हैं तो विनिवेश चालू वित्त वर्ष में 460 अरब रुपये के आसपास पहुंच जाएगा। विनिवेश का लक्ष्य 800 अरब रुपये है, इसलिए हमें आगे ऐसे और सौदे देखने को मिल सकते हैं।
 
कॉरपोरेट स्तर पर एक अन्य घटनाक्रम के तहत सन फार्मा की जांच से कई खुलासे हो सकते हैं। आईएलऐंडएफएस की वित्तीय स्थिति को लेकर आगे और जानकारियों का खुलासा होता रहेगा। यह गड़बड़झाला कहीं और बड़ा साबित हो सकता है। यूनिलीवर-जीएसके कंज्यूमर के बीच करार कुछ समय के लिए अटक गया है। स्टीर इंजीनियरिंग यह आश्वासन चाहती है कि उसकी बौद्धिक संपदा का संरक्षण होगा। इस मामले की अगली सुनवाई दिल्ली उच्च न्यायालय 23 जनवरी को करेगा। इन्हीं वजहों से रुझान कमजोर है। यह तब तक कमजोर बना रहेगा, जब तक भूराजनीतिक तनाव कम नहीं होगा। घरेलू संस्थान और एफपीआई ने पिछले 10 सत्रों के दौरान भारी बिकवाली की है। निफ्टी एक बार 200 दिन के औसत के ऊपर पहुंचा, लेकिन फिर गिरकर नीचे आ गया। 
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