बिजनेस स्टैंडर्ड - खुदरा महंगाई घटी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा
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खुदरा महंगाई घटी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा

ईशान बख्शी, शुभायन चक्रवर्ती और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 12 12, 2018

रिजर्व बैंक की बैठक में बदल सकता है रुख

औद्योगिक गतिविधियां 11 माह के उच्चतम स्तर 8.1 प्रतिशत पर
खुदरा महंगाई दर 17 महीने के न्यूनतम स्तर 2.33 प्रतिशत पर पहुंच गई
विनिर्मााण के 23 उपक्षेत्रों में से सिर्फ 2 में ही सालाना आधार पर सुस्ती आई
खाद्य वस्तुओं में सब्जियों, चीनी और दलहन के दाम में आई गिरावट
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह स्थिति जारी रहती है तो मौद्रिक नीति समिति अपना रुख बदल सकती है

बिजनेस स्टैंडर्ड खुदरा महंगाई घटी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ाअर्थव्यवस्था के दो संकेतकोंं- औद्योगिक उत्पादन और खुदरा महंगाई दर के प्रदर्शन में अक्टूबर और नवंबर में क्रमश: सुधार रहा। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी हाल के आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक गतिविधियां जहां 11 माह के उच्चतम स्तर 8.1 प्रतिशत पर रहीं, जबकि खुदरा महंगाई दर 17 महीने के न्यूतम स्तर 2.33 प्रतिशत पर पहुंच गई। महंगाई दर लगातार मौद्रिक नीति समिति के लक्ष्यों से कम बनी हुई है। इसकी वजह से नीतिगत बदलाव और दरों में कटौती पर विचार हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास फरवरी में मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक की अध्यक्षता करेंगे। 

प्रमुख क्षेत्र मजबूत

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक सितंबर के 4.5 प्रतिशत से बढ़ा है। सभी प्रमुख क्षेत्रों मेंं मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 11 महीने के उच्चतम स्तर 8.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसे विनिर्माण क्षेत्र की तेजी और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में बढ़ोतरी ने बल दिया। बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक दो अन्य क्षेत्रों बिजली और खनन का उत्पादन भी बढ़ा है।  अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में सितंबर में हुई 4.46 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में तेजी आई है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र ने अहम भूमिका निभाई है, जिसकी सूचकांक में हिस्सेदारी 77.6 प्रतिशत है। इसमें अक्टूबर में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसके पहले के सितंबर महीने के 4.61 प्रतिशत की तुलना में करीब दोगुना है। 

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'अक्टूबर 2018 में औद्योगिक वृद्धि उल्लेखनीय रही, जो उम्मीद से कुछ ज्यादा रही है। इस पर त्योहारी सीजन के भंडार समायोजन और अनुल आधार का असर नजर आता है।' उन्होंने कहा कि यह अस्थायी साबित हो सकता है क्योंकि ऑटो उत्पादन, बिजली उत्पादन और कोल इंडिया लिमिटेड के उत्पादन में नवंबर 2018 में कमी दिख रही है।  विनिर्माण के 23 उपक्षेत्रोंं में से सिर्फ 2 में ही सालाना आधार पर सुस्ती आई है और सितंबर में इनकी वृद्धि 7 प्रतिशत से नीचे रही है। ऑटो, दवा, खाद्य, धातु और गैर धातु उत्पादों के साथ अन्य उद्योगों ने बेहतर प्रदर्शन किया। फर्नीचर और लकड़ी के उत्पाद वृद्धि को बढ़ाने में बड़े मददगार रहे।

केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'व्यवस्था में नकदी की कमी नजर आई, जिनका एसएमई और ऑटो क्षेत्र पर असर हो सकता था, लेकिन इस महीने कोई असर नहीं रहा। ऐसे में यह देखना होगा कि इसका असर नवंबर में दिख सकता है। इसके अलावा आधार का असर भी रहेगा, जिसे वृद्धि पर दबाव रहेगा।'  

वहींं दूसरी तरफ कंप्यूटर हॉर्डवेयर के उत्पादन में वृद्धि दर बेहतरीन रही। सरकार दी ओर से इस क्षेत्र में विनिर्माण पर जोर दिए जाने से स्थिति बेहतर हुई है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सामान के आयात को कम करने के लिए तमाम लाभ और चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम चलाए हैं।  संवेदनशील पूंजीगत वस्तु क्षेत्र, जिसमें निवेश आता है, में 16.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसके पहले महीने की 6.5 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में बहुत ज्यादा है। मशीनरी और भारी परिवहन, पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन मेंचालू वित्त वर्ष के हर महीने में बढ़ोतरी हो रही है। 

पंत ने कहा, 'बुनियादी ढांचा, वस्तु एवं उपभोक्ता गैर टिकाऊ वस्तुओं में अगस्त महीने में वृद्धि दर बेहतर रही। बहरहाल अप्रैल अगस्त के दौरान बिजली, उपभोक्ता वस्तुओं, बुनियादी ढांचा और प्राथमिक सामान की वृद्धि दर उच्च एकल अंक में रही।'अगस्त महीने में उपभोक्ता वस्तुओंं की वृद्धि दर भी 17.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही। जुलाई महीने में इसकी वृद्धि दर सुस्त रही थी।  खनन उत्पादन अक्टूबर में 7 प्रतिशत बढ़ा है, जो सितंबर की तुलना में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी है। यह उम्मीद के मुताबिक ही है। परिणामस्वरूप बिजली उत्पादन भी बढ़ा है। हाल के महीने में उत्पादन 10.8 प्रतिशत बढ़ा है, जो सितंबर मेंं 8.23 प्रतिशत बढ़ा था। 

खुदरा महंगाई से राहत

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर गिरकर 17 महीने के निम्न स्तर पर पहुंच गई है। यह नवंबर मेंं 2.33 प्रतिशत रही, जो इसके पहले महीने में 3.38 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं के दाम में लगातार दूसरे महीने गिरावट की वजह से ऐसा हुआ। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह स्थिति जारी रहती है तो मौद्रिक नीति समिति अपना रुख बदल सकती है। बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में खाद्य वस्तुओंं की दरोंं में 2.61 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि अक्टूबर में 0.86 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 45 प्रतिशत भार खाद्य वस्तुओं का होता है। ऐसे में इनके दाम में तेज गिरावट की वजह से महंगाई दर में बहुत ज्यादा कमी नजर आ रही है। खाद्य वस्तुओं में सब्जियोंं, दलहन और चीनी के दाम में कमी आई है। सब्जियों व चीनी के दाम में गिरावट का प्रतिशत नवंबर में क्रमश: 15.59 और 9.02 रहा है, जबकि इसके पहले महीने में 8.06 प्रतिशथ और 7.64 प्रतिशत की गिरावट आई थी। दलहन के दाम में 9.22 प्रतिशत गिरावट आई है।  इक्रा रेटिंग में अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'हमारे विचार से मॉनसून के बाद बारिश कम होने और रबी की बुआई को लेकर देरी की वजह से यह संदेह है कि कब तक खाद्य वस्तुओं के दाम सस्ते बने रहेंगे।' कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम का भी महंगाई दर पर असर पड़ा है। ईंधन की दरों में गिरावट 7.39 प्रतिशत रही, जो पहले 8.55 प्रतिशत थी। मकान के किराये में वृद्धि दर 6.06 प्रतिशत से गिरकर 5.99 प्रतिशत पर आ गई। नैयर ने कहा, 'सीपीआई महंगाई दर में तेज गिरावट की कई वजहें हैं, जिसमें ईंधन के खुदरा दाम में कमी, खाद्य वस्तुओं के दाम कम होना और आधार का असर है।' 
Keyword: IIP, WPI, economy,,
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