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माल्या के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ

एजेंसियां / लंदन December 10, 2018

कानून से बच कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन की अदालत ने सोमवार को करारा झटका दिया और उन्हें भारत के हवाले करने की अनुमति दे दी। इस समय ब्रिटेन में रह रहे 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर हैं। उन पर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये बकाया है। साथ ही उन पर किंगफिशर एयरलाइन के लिए लिए बैंकों से लिए गए कर्ज में हेराफेरी और और धनशोधन का आरोप है। यह एयरलाइन अब बंद हो चुकी है। 
 
ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत की मुख्य मजिस्ट्रेट जज एम्मा आबुथनॉट ने कहा कि प्रथम दृष्टïया माल्या के खिलाफ मामला बनता है और उनके भारत प्रत्यर्पण से उनके मानवाधिकारों का हनन नहीं होगा। उन्होंने माल्या के भारत प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी ताकि उनके खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के आधार पर मुकदमा चलाया जा सके। उनके प्रत्यर्पण का मामला आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्री को भेजा जाएगा जिन्हें उसे मंजूर करना ही होगा। माल्या मार्च 2016 में ब्रिटेन भाग गए थे। अदालत के फैसले के खिलाफ माल्या 14 दिन के भीतर लंदन के हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। गृह मंत्री के फैसले को भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। माल्या ने कहा कि उनकी कानूनी टीम इस फैसले की समीक्षा के बाद आगे कदम उठाएगी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आज का दिन भारत के लिए बड़ी सफलता का दिन है।  उन्होंने कहा कि माल्या को पिछली संप्रग सरकार के दौरान फायदा मिला जबकि राजग सरकार ने उसे कटघरे में खड़ा किया है।
 
माल्या को भारत को सौंपने की अर्जी को माल्या ने चुनौती दी थी और यह बहुचर्चित मामला वहां करीब एक साल चला। माल्या ने दलील दी थी कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और उनके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। माल्या ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा, 'मैंने कर्ज निपटाने की पेशकश कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष की  है। प्रत्यर्पण मुकदमे से उसका संबंध नहीं है। कोई फर्जी पेशकश कर के न्यायालय की अवमानना नहीं कर सकता। ईडी ने संपत्तियां कुर्क की हैं। वे फर्जी संपत्तियां नहीं हैं।'
 
माल्या ने कहा कि उनकी संपत्तियों का मूल्य इतना है जिससे वह सभी का भुगतान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान इसी पर है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष की गई पेशकश के बारे में माल्या ने कहा कि यदि निपटान की अनुमति दी जाती है तो सबसे पहले किंगफिशर के कर्मचारियों का भुगतान किया जाना चाहिए। अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले माल्या का प्रत्यर्पण मोदी सरकार के लिए बड़ी जीत होगी। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने माल्या के विदेश भागने में मदद की थी। हालांकि सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है। 
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