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ऊर्जित ने दिया आरबीआई से इस्तीफा

सोमेश झा और अनूप रॉय / नई दिल्ली/मुंबई December 10, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चकित कर दिया। आरबीआई के 24वें गवर्नर ने अपना कार्यकाल पूरा होने के 9 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल अगले साल 4 सितंबर को खत्म होना था। जैसा कि अंदेशा जताया जा रहा है कि पटेल ने सरकार के साथ मतभेदों की वजह से इस्तीफा दिया है। अगर यह सही है तो सरकार के साथ मतभेद के कारण कार्यकाल के बीच में ही पद छोडऩे वाले वह देश के दूसरे गवर्नर होंगे। इससे पहले बेनेगल रामा राव ने तत्कालीन वित्त मंत्री के साथ विवाद की वजह से 1957 में इस्तीफा दे दिया था।

 
पटेल से पहले आरबीआई के गवर्नर रहे रघुराम राजन ने कार्यकाल का विस्तार नहीं मिलने की वजह से तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद सितंबर 2016 में पद छोड़ दिया था। आरबीआई की वेबसाइट पर पटेल के हवाले से कहा गया है, 'व्यक्तिगत कारणों से मैंने अपने मौजूदा पद से तुरंत प्रभाव से हटने का फैसला किया है। यह मेरा सौभाग्य रहा है कि पिछले कई वर्ष तक मुझे रिजर्व बैंक में विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिला। रिजर्व बैंक के कर्मचारियों, अधिकारियों और प्रबंधन की कड़ी मेहनत से बैंक ने हाल के वर्षों में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं।' 
 
पटेल ने कहा, 'मैं इस अवसर पर अपने साथियों और आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल के निदेशकों का आभार व्यक्त करता हूं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।'विश्लेषकों ने कहा कि पटेल ने अपने बयान में सरकार में किसी को भी धन्यवाद नहींं दिया जबकि आरबीआई गवर्नर एक संवैधानिक पद है जिसकी नियुक्ति सरकार करती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनके इस्तीफे पर आश्चर्य जताया। पेटल के अचानक पद छोडऩे से केंद्रीय बैंक और आरबीआई बोर्ड में सरकार के प्रतिनिधियों के बीच संबंधों को लेकर कई सवाल उठेंगे। आरबीआई बोर्ड के सदस्यों को भी पटेल के इस्तीफे की भनक नहीं थी।आरबीआई बोर्ड के सदस्य सतीश मराठे ने कहा, 'मुझे उनके इस्तीफे से दुख और आश्चर्य हुआ है, खासकर तब जब लग रहा था कि चीजें पटरी पर लौट आई हैं।'मामलेे के जानकार एक शख्स ने कहा कि ऐसे वक्त आया है जब सरकार और आरबीआई के बीच विभिन्न मुद्दों के समधान पर सहमति बन रही थी। आरबीआई के आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा के लिए दोनों पक्षों के बीच एक समिति के गठन पर सहमति बनी थी। पटेल और जेटली ने बिमल जालान को समिति का चेयरमैन और राकेश मोहन को वाइस चेयरमैन बनाने का फैसला किया था। इससे पहले आरबीआई ने समिति के चेयरमैन के लिए राकेश मोहन के नाम को आगे बढ़ाया था जबकि सरकार जालान को नियुक्त करने के पक्ष में थी। 
 
सूत्रों के अनुसार पटेल का स्वास्थ्य अच्छा नहीं चल रहा था। सूत्र ने कहा, 'पिछले कुछ समय से वह कार्यालय नहीं आ रहे थे। सूत्र ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि वह (पटेल) केवल मौद्रिक नीति समिति और बोर्ड ऑफ फाइनैंशियल सर्विसेस बैठक समिति की बैठकों में भाग लेने आए थे।' सूत्र ने कहा कि पटेल के इस्तीफे के पीछे कई कारण हो सकते हैं और इसके लिए किसी खास कारण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। सूत्र ने कहा कि इस्तीफा देने से कुछ मिनट पहले पटेल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को अपने फैसले के बारे में बता दिया था।
 
बोर्ड के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि पटेल ने शनिवार को उन्हें 14 दिसंबर को आरबीआई के ए के झा मेमोरियल लेक्चर्स में शरीक होने के लिए कहा था। इसी दिन आरबीआई के बोर्ड की बैठक भी होने वाली थी। सदस्य ने कहा,'जब मैंने यह पूछा कि इसका यह मतलब हुआ कि बोर्ड की बैठक कुछ ही देर तक चलेगी तो उन्होंने केवल कुछ संकेत दिए और आगे कुछ नहीं कहा। उनका इस्तीफा अचानक आया है, जिससे सभी हैरान हैं।' बोर्ड के एक सदस्य ने कहा कि आरबीआई के वरिष्ठïतम डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथ आरबीआई गवर्नर का पद संभाल सकते हैं और वह यह तय करेंगे कि पटेल के इस्तीफे के बाद 14 को प्रस्तावित बैठक होगी या नहीं। हालांकि कई मायने में इस्तीफा पूरी तरह अनापेक्षित भी नहीं था, लेकिन ज्यादातर टीकाकारों का मानना था कि 19 नवंबर को चली लंबी बैठक में सरकार और आरबीआई के बीच सहमति बन गई थी। बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि आरबीआई का मुद्रा भंडार टटोला नहीं जाएगा, लेकिन केंद्रीय बैंक कुछ बैंकों को पीसीए से बाहर लाने की समीक्षा करने में लचीला रुख अपनाएगा। बैठक में यह भी तय हुआ था कि वित्तीय संकट में फंसी सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए पुनर्संरचना योजना नहीं लाई जाएगी।
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