बिजनेस स्टैंडर्ड - ईईटी को लेकर हुआ नए कर पर मतभेद?
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ईईटी को लेकर हुआ नए कर पर मतभेद?

अभिषेक वाघमारे और ईशान बख्शी / नई दिल्ली December 09, 2018

वित्त मंत्री ने हाल ही में  नई प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) तैयार करने के लिए कार्यबल का पुनर्गठन किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य अखिलेश रंजन को समिति का संयोजक बनाया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब  खबरें आ रही थीं कि अरविंद मोदी के नेतृत्व में बने कार्यबल की रिपोर्ट पर कई मसलों पर आम राय नहीं बन पाई।  बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक मोदी समिति के प्रस्ताव में असहमति की मुख्य वजह दीर्घ कालीन बचत को छूट, छूट, कर (ईईटी) मोड में रखना था क्योंकि मौजूदा छूट, छूट, छूट (ईईई) श्रेणी का विरोध किया गया था। पहले मसौदे के 12वें अध्याय में राजनीतिक विवाद का मामला बचत पर कर प्रोत्साहनों को लेकर है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी कराधान व बचत के ईईटी तरीके को अपनाने की वकालत की थी। 
 
ज्यादातर विकसित एवं विकासशील देश कर लगाने के ईईटी तरीके को अपनाते हैं।  इस समय कर्मचारी भविष्य निधि और सार्वजनिक भविष्य निधि जैसी दीर्घावधि बचत योजनाओं को ईईई कराधान व्यवस्था में रखा गया है, जिसके तहत अंशदान, संग्रह और निकासी तीनों ही स्तरों पर कर छूट होती है।   दूसरी तरफ ईईटी व्यवस्था में राशि की निकासी कर के दायरे में आएगी, जितना व्यक्तिगत कर ढांचे में है। इसमें अंशदान और संग्रह शामिल नहीं है। इस समय  नई पेंशन व्यवस्था (एनपीएस) ईईटी के तहत आता है, जिसमें निकासी पर कर लगता है। 
 
ईईई से ईईटी तरीके में जाने को लेकर भी कुछ तर्क हैं। कुछ को ईईई और कुछ को ईईटी की श्रेणी में रखने पर निवेश फैसले प्रभावित होते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में विशेषज्ञोंं ने कहा कि इससे कर मध्यस्थता की संभावनाएं पैदा होती हैं।  इसके अलावा कर प्रोत्साहन के हिसाब से यह प्रतिगामी कदम है क्योंक ज्यादा कर ढांचे वाले लोग कर छूट पाने के लिए इसमें निवेश करते हैं। 2015-16 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, 'ये तुलनात्मक रूप से ज्यादा कर दायरे में आने वाले लोगों को ज्यादा कर लाभ दिलाते हैं।' इसके अलावा निकासी पर कर नहीं लगने से अन्य व्यक्तिगत लोगों को बचत करने को लेकर प्रोत्साहन नहीं मिलता। ईईटी से जहां बचत को प्रोत्साहन मिलता है, बचत न करने वालों को यह दंडित करता है। सर्वे में कहा गया है, 'खासकर ज्यादा उम्र में ईईटी में खपत की रफ्तार धीमी होती है, क्योंकि निकासी पर कर लगने से व्यक्ति खपत को टालता है।'
 
इसमें कहा गया है, 'कुल मिला जुलाकर असर यह है कि यह बचत करने वाले को प्रोत्साहित करता है, जिससे सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में ज्यादा उम्र के लिए स्ववित्त पोषण हो सके।' संयुक्त राष्ट्र की बुजुर्गों की आबादी पर 2015 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 2015 के 11.6 करोड़ से बढ़कर 2030 में 19 करोड़ और 2050 में 33 करोड़ होने की संभावना है।  अबसे तीन दशक बाद 2050 तक 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा होगा, जो अभी 8.9 प्रतिशत है। 
Keyword: EET, DTC, tax,,
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