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नए खुदरा कर्जदारों को राहत, छोटे कारोबारों को भी सहूलियत

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह /  December 09, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फ्लोटिंग दर वाले सभी नए ऋणों को अप्रैल से एक बाहरी बेंचमार्क से जोडऩे का फैसला किया है। इससे खुदरा और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र के ऋण लेने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक के फैसले से आवास ऋण खंड पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। आम तौर पर पर्सनल लोन और कार लोन फिक्स ब्याज दर वाले ऋण होते हैं। एमएसएमई क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पडऩे के आसार हैं। 

 
एक बड़े बैंक के पूर्व खुदरा ऋण प्रमुख कहा, 'अगर बैंकरों ने बाहरी बेंचमार्क के नियमों का ठीक से पालन किया तो खुदरा कर्जदारों को फायदा होगा।' बाहरी बेंचमार्क रीपो दर, 91 दिन का ट्रेजरी बिल, 182 दिन का ट्रेजरी बिल या अन्य प्रासंगिक बेंचमार्क हो सकता है। अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक अश्विनी पारेख ने कहा, 'इस कदम और कुछ अन्य नीतिगत फैसलों के जरिये आरबीआई ने यह सुनिश्चित किया है कि खुदरा और एमएसएमई दोनों के लिए तरलता बनी रहे, लेकिन इसके साथ ही लागत भी तय की है। पारदर्शिता से कर्जदारों को भी फायदा होगा और बैंकिंग प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा।'
 
किसी भी नए कर्जदार को मामूली फायदा होगा। माना कि कोई बैंक अपनी आवास ऋण दर को रीपो दर से जोड़ता है, जो इस समय 6.5 फीसदी पर है। अगर स्प्रेड (अंतर) 200 आधार अंक है तो कर्ज लेने वाले को आïवास ऋण 8.5 फीसदी की दर पर मिलेगा। इस समय भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आवास ऋण पर ब्याज 8.7 से 9.25 फीसदी तक वसूलता है, जबकि आईसीआईसीआई की दर 9 से 9.25 फीसदी है। पैसाबाजार डॉट कॉम के आवास ऋण प्रमुख रतन चौधरी ने कहा, 'अगर जुड़ी हुई बेंचमार्क दर में कोई बदलाव होता है तो इसका असर ऋण दरों में भी दिखेगा। हालांकि बैंक ऋण देने के समय इस बात के लिए स्वतंत्र हैं कि वे बाहरी बेंचमार्क से कितने आधार अंक अधिक (स्प्रेड) पर ऋण देंगे। लेकिन यह स्प्रेड ऋण की अवधि के दौरान एकसमान बना रहेगा, बशर्ते कि कर्जदार के क्रेडिट प्रोफाइल में कोई बड़ा बदलाव न हो। किसी विशेष ऋण श्रेणी के लिए एकसमान बाहरी बेंचमार्क से कर्जदारों के लिए पारदर्शिता, मानक और समझने में आसानी सुनिश्चित होगी। इस समय फ्लोटिंग रेट पर ऋण लेने वालों के लिए ब्याज दरों में बदलाव हर बैंक में अलग-अलग होता है।'
 
हालांकि इस कदम से वर्तमान कर्जदारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जिन ग्राहकों ने हाल में लंबी अवधि के आवास ऋण लिए हैं, उन्हें घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। एक पूर्व बैंक अधिकारी ने कहा, 'अगर वर्तमान और अप्रैल में नई ऋण दरों के बीच 50 से 100 आधार अंक का अंतर होता है तो ऋण को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना अच्छा मौका साबित हो सकता है क्योंकि फ्लोटिंग रेट ऋणों में कोई पूर्व-भुगतान जुर्माना नहीं है।' इस समय सिटीबैंक की एक योजना बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी हुई है। इस आवास ऋण योजना का बेंचमार्क तीन महीने के ट्रेजरी बिल की दर है। इस बैंक में आवास ऋण की दर हर तिमाही में फिर से तय होती है। ऐसा मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर की पहली तारीख को किया जाता है। 
 
आरबीआई और बैंकों के बीच दशकों से मौद्रिक नीति के फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाने को लेकर असहमति रही है। नियामक ने कहा है कि बैंकों को ब्याज दरों का निर्धारण इस तरह से करना चाहिए कि ग्राहकों को फायदा मिले। दरअसल जब आरबीआई नीतिगत दरें बढ़ाता है तो बैंक तुरंत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन जब आरबीआई दरें घटाता है तो बैंक ब्याज दरों में कटौती में देरी करते हैं। आरबीआई के मौद्रिक नीति विभाग के मुख्य सलाहकार जनक राज की अगुआई में बनी आंतरिक समिति ने सुझाव दिया था कि फ्लोटिंग रेट ऋणों के लिए बाहरी बेंचमार्क का इस्तेमाल किया जाए ताकि मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों तक जल्द पहुंचे और ऋणदाताओं के दरें तय करने में पारदर्शिता सुधरे। इस समिति की सिफारिशों के बाद ही आरबीआई ने यह फैसला लिया है। 
 
इस समिति का गठन कोष की सीमांत लागत आधारित ऋण दर प्रणाली (एमसीएलआर) की समीक्षा करने के लिए किया गया था। समिति ने कहा था कि बैंक वर्षों से खुदरा ग्राहकों के साथ मनमानी करते आ रहे हैं। रिपोर्ट में चार बड़े बैंकों (दो सरकारी और दो निजी) का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि एक सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक ने एमसीएलआर दर का निर्धारण 7 दिन से एक साल की खुदरा सावधि जमा की दर के आधार पर किया। इसने चालू खाता-बचत खाता या कासा जमाओं की पूरी तरह अनदेखी की। 
 
एक निजी क्षेत्र के बैंक की आधार दर मार्च 2017 में सुझाए गए आधार दर फॉमूले से 80 आधार अंक अधिक थी। कुछ बैंकों ने सभी उत्पादों के लिए एक एमसीएलआर रखने के बजाय कई दरें रखीं और इस तरह उन्होंने केंद्रीय बैंक के दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन किया। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, rate,,
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