बिजनेस स्टैंडर्ड - अकेले बुजुर्गों का जीवन कैसे बने सुगम
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अकेले बुजुर्गों का जीवन कैसे बने सुगम

प्रियदर्शिनी माजी /  12 09, 2018

बुढ़ापे की लाठी बन रही कंपनियां

जनगणना आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 तक 60 से अधिक उम्र के लोगों की तादाद बढ़कर 17.3 करोड़ होने का अनुमान
जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.5 करोड़ बुजुर्ग व्यक्ति अकेले जीवन यापन कर रहे
बुजुर्गों की देखभाल के लिए समाधान लेकर आई हैं आईवीएचसीनियरकेयर, सिल्वर टॉकीज और समर्थ जैसी कंपनियां
यह समाधान उन बुजुर्गों के लिए मददगार हैं, जिनके परिवार उनसे दूर रहते हैं
कंपनियां बुजुर्गों के लिए क्लब चलाती हैं और कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं ताकि उन्हें अपने जैसे विचारों वाले लोग मिल सकें
समर्थ और आईवीएचसीनियरकेयर वरिष्ठ नागरिकों को मदद मुहैया कराती हैं और अकेले रहने वाले बुजुर्गों के शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक बेहतरी का खयाल रखती है

बिजनेस स्टैंडर्ड अकेले बुजुर्गों का जीवन कैसे बने सुगमभारत में आबादी का समीकरण तेजी से बदल रहा है। अभी तक युवा देश कहे जाने वाले देश में बूढ़े हो रहे लोगों की तादाद बढ़ रही है। जनगणना आंकड़ों के मुताबिक 60 से अधिक उम्र के लोगों की तादाद वर्ष 2025 तक बढ़कर 17.3 करोड़ होने का अनुमान है। देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बुढ़ापे के ये दिन आसान नहीं होते हैं। बहुत से वरिष्ठ नागरिकों को अकेले जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनके बच्चे एकल परिवार बना रहे हैं, जिसमें दो या अधिक लोग काम करते हैं। जनगणना के आंकड़े दर्शाते हैं कि करीब 1.5 करोड़ बुजुर्ग व्यक्ति अकेले जीवन जी रहे हैं। 

अकेलेपन से अवसाद और अन्य मानसिक विकृतियां पैदा होती हैं, जिससे उनका शारीरिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है। सिल्वर टॉकीज की सह-संस्थापक निधि चावला कहती हैं, 'अकेलेपन और अलगाव की भावना से अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की परेशानियां पैदा हो सकती हैं। चिंताजनक बात यह है कि भारत में बुजुर्गों में अवसाद की दर 21.9 फीसदी के ऊंचे स्तर पर है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 5 से 16 फीसदी के बीच है।'

ऐसे माहौल को मद्देनजर रखते हुए आईवीएचसीनियरकेयर, सिल्वर टॉकीज और समर्थ जैसी कंपनियां बुजुर्गों की देखभाल के समाधान लेकर आई हैं। ये समाधान उन बुजुर्गों के लिए मददगार हैं, जिनके परिवार उनसे दूर रहते हैं। सिल्वर टॉकीज जैसी कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों को समाज से जुड़े रहने और मानसिक रूप से सक्रिय रहने में मदद करती हैं। वे बुजुर्गों के लिए क्लब चलाती हैं और कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं ताकि उन्हें अपने जैसे विचारों वाले लोग मिल सकें। इसी तर्ज पर काम करते हुए समर्थ और आईवीएचसीनियरकेयर वरिष्ठ नागरिकों को मदद मुहैया कराती हैं और अकेले रहने वाले बुजुर्गों के शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक बेहतरी का खयाल रखती है। 

बुजुर्गों के लिए समाधान

इस क्षेत्र की कंपनियां देखभाल प्रबंधकों के जरिये पेशेवर सेवाएं मुहैया कराती हैं। इन कंपनियों में से कुछ रक्षा पृष्ठभूमि की हैं। आईवीएच सीनियर केयर के चीफ बिलिफ ऑफिसर स्वदीप श्रीवास्तव ने कहा, 'पूर्व रक्षाकर्मियों को देखभाल प्रबंधकों के रूप में जोडऩे से दोहरे उद्देश्य पूरे होते हैं। उनसे बुजुर्गों को सुरक्षा और भरोसे की भावना मिलती है और सेवानिवृत्त जवानों को रोजगार मिलता है।' ये कंपनियां जो सेवाएं मुहैया कराती हैं, उनमें 24 घंटे की आपात देखभाल, स्वास्थ्य सहायता, आवास मरम्मत एवं सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव, यात्रा और स्वैच्छिक या पार्ट टाइम काम आदि शामिल हैं। 

इन चिकित्सा सहायक

स्वास्थ्य समाधानों में घर पर एक अटेंडेट और फिजियोथैरेपी जैसी बुनियादी सेवाएं और घर पर आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) और कीमोथैरेपी की व्यवस्था जैसी एडवांस्ड सेवाएं शामिल हैं। ये कंपनियां अस्पताल में भर्ती कराने के मामलों में परिवहन, प्रवेश, बिलिंग, छुट्टी में मदद और बाद में डॉक्टर को दिखाने जैसे कार्यों में मदद करती हैं। ये दवा और अन्य स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद और उनका ध्यान रखने में भी मदद करती हैं। 

सामाजिक सहायक

ये कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक रूप से सक्रिय रखने के लिए समाज से जुड़ाव वाली सेवाएं मुहैया कराती हैं। इनमें धार्मिक स्थलों का दौरा, फिल्म दिखाना और रोचक स्थानीय या बाहरी स्थानों का दौरा आदि शामिल हैं। ये कंपनियां उन्हें कुछ सामान्य सेवाएं भी मुहैया कराती हैं, जिनमें बुजुर्गों को उनके संबंधियों के घर ले जाना या उन्हें परिवार की शादी में शरीक होने में मदद करना आदि शामिल हैं। श्रीवास्तव ने कहा, 'उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय रखकर हम उन्हें अकेलेपन और मानसिक बीमारियों से दूर रखने की कोशिश करते हैं।' ये सेवाएं केवल ऊपर जिक्र की गई सेवाओं तक ही सीमित नहीं हैं। 

समर्थ का खुद का मोबाइल ऐप और तिमाही पत्रिका है। यह साल भर कार्यक्रमों का आयोजन करती है। समर्थ के मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने कहा, 'यह उन्हें एक-दूसरे से बातचीत करने और जुडऩे और स्वास्थ्य, तंदुरुस्ती, घर पर देखभाल और पैसे से जुड़े मामलों की सूचनाएं, विशेषज्ञ सलाह हासिल करने में मदद करती है। लोगों को भी सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी और स्वयंसेवी बनने के मौके मिलते हैं। उन्हें कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल लेनदेन जैसी उपयोगी चीजों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।'

इन सुविधाओं की लागत

समर्थ के देखभाल सुविधाओं की लागत 2,500 रुपये प्रति महीने से शुरू होती है। इसमें घर का हिसाब-किताब, दस्तावेजों को संभालकर रखना, देखभाल सलाहकार, कामकाज में मदद और घर की मरम्मत आदि शामिल हैं। सिल्वर टॉकीज क्लब का सालाना सदस्यता शुल्क 1,500 से 2,500 रुपये है। ये सेवाएं 55 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति हासिल कर सकते हैं। आईवीएचसीनियरकेयर के बुनियादी देखभाल पैकेज की लागत 1,800 रुपये प्रति महीना और 11,400 रुपये प्रति वर्ष है। इस पैकेज में देखभाल प्रबंधक का महीने में एक दौरा (अतिरिक्त दौरों की अतिरिक्त शुल्क), सामााजिक सहायता, अस्पताल सेवा और अन्य सामान्य सेवाएं शामिल हैं। हरेक पैकेज में कुछ चीजें शामिल हैं और कुछ बाहर हैं। नियमित पैकेज के अलावा कुछ जरूरत के हिसाब से भी पैकेज हैं, जो बुजुर्ग व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से बनाए जाते हैं।  

बुजुर्गों के लिए विशेष सोसायटी

बहुत से वरिष्ठ नागरिक और वृद्ध जीवनयापन में सहायता सुविधाओं को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। इस मॉडल में सेवानिवृत्त व्यक्ति विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई सोसायटी में रहने जाते हैं, जो कम से कम 55 साल के हैं। खाना, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधाएं या नर्सिंग मदद जैसी सभी सुविधाएं सोसायटी द्वारा महुैया कराई जाती हैं। इसके अलावा थियेटर, क्लब जैसी मनोरंजन सुविधाएं और पुस्तकालय मुहैया कराए जाते हैं। हालांकि आम तौर पर ऐसे होम सामान्य घरों की तुलना में महंगे होते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए इन आवासीय इमारतों की लागत उसी इलाके के सामान्य घरों की तुलना में 500 से 700 रुपये प्रति वर्ग फुट अधिक आती है। इसके अलावा 20,000 से 70,000 रुपये का सालाना मरम्मत शुल्क देना पड़ता है। 

वरिष्ठ नागरिक अपने जाने-पहचाने इलाके में रहने में सबसे ज्यादा खुश रहते हैं। वे उस घर में रहना पसंद करते हैं, जो उन्होंने बनाया है। या वे पड़ोस के उस इलाके में रहना चाहते हैं, जहां वे वर्षों तक रहे। समर्थ के अग्रवाल कहते हैं, 'एक वद्धाश्रम की सबसे बड़ी समस्या रहती है कि इनमें वरिष्ठ नागरिक अफने जैसे बुजुर्ग लोगों से घिरा रहता है। इसका अत्यधिक एवं नुकसानदेह मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है।'  वह कहते हैं, 'वित्तीय लिहाज से यह लंबी अवधि का कारगर समाधान नहीं है क्योंकि ऐसे घरों का बाजार बहुत अधिक नहीं है।'
Keyword: oldage, society, care,,
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