बिजनेस स्टैंडर्ड - कारोबारी माहौल में विविधता का रंग
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कारोबारी माहौल में विविधता का रंग

अमृता पिल्लई /  12 09, 2018

बदलाव का दौर

बिजनेस स्टैंडर्ड कारोबारी माहौल में विविधता का रंगसूचना एवं तकनीक कंपनी कॉग्निजेंट ने नवंबर में 'कारोबारी वरीयताओं में विविधता और समावेशन की महत्ता' पर पहली बार कॉन्क्लेव का आयोजन कराया। इसमें  स्पष्ट संकेत दिया गया कि भारतीय कंपनी जगत अपने कारोबारी माहौल में बदलाव ला रहा है। यह सम्मेलन बदलते माहौल के बारे में इंगित करते हुए बताता है कि किस तरह देश में कंपनियां विविधता और समावेशन की जरूरत महसूस करती हैं। हालांकि कंपनियों को विविधता लाने के विचार और वास्तविकता में कार्यान्वयन के बीच लंबा रास्ता तय करना होगा।

अवतार समूह की संस्थापक-अध्यक्ष सौंदर्या राजेश कहती हैं, 'हमारी सहयोगी कंपनियों में से 65 प्रतिशत से अधिक ने केवल नियुक्तियों से आगे बढ़कर ऐसे तरीकों पर काम शुरू कर दिया है जिनके माध्यम से कंपनी के सभी कर्मचारी खुद को विभिन्न गतिविधियों में शामिल कर सकें।' वह कहती हैं, 'लेकिन मेरा मानना है कि इस काम में अभी लगभग 40 प्रतिशत कंपनियों को ही सफलता मिली है। इसके लिए शीर्ष प्रबंधन को अधिक जिम्मेदारी से काम करना होगा। साथ ही, बेहतर नेतृत्व प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।' वह बताती हैं कि विविधता और समावेशन को कार्यप्रणाली में शामिल करने के मामले में अवतार समूह काफी पहले से विचार कर रहा था। 

कई भारतीय कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर और विशेष कार्यक्रमों की सहायता से कार्यप्रणाली में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हालांकि अनस्र्ट एंड यंग (ईवाई) ने कुछ दूसरे विकल्पों को सामने रखा। ईवाई कंपनी 'वुमन ऑन बोर्डस' नामक वर्कशॉप चलाती है जो प्रतिभावान महिला निदेशकों को निदेशक की भूमिका तथा बोर्ड में कुशलतापूर्वक कर्तव्य का निर्वहन करने के बारे में बताती है।  कंपनी के ईवाई वुमन बिज़नेस लीडर नेटवर्क में कंपनी ने भारतीय कंपनियों में सी-लेवल की महिला अधिकारियों (सीएक्सओ) को साथ आने तथा नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में अपने अनुभव साझा करने के लिए मंच प्रदान किया है। कुछ लोग पुरुषों के 'बॉयज क्लब' की तर्ज पर महिलाओं के लिए बनाए गए समूह से इसकी तुलना करते हैं। 

रोश डायग्नोस्टिक्स इंडिया आदि कुछ कंपनियां उलट पिरामिड रणनीति अपनाती हैं जहां विभिन्न पदों पर काम करने वाले कर्मचारी समितियां बनाते हैं। इन्हें बनाने के 2 प्रमुख उद्देश्य हैं, एक विविधता तथा समावेशन के लिए और दूसरा लैंगिक समानता के लिए। रोश डायग्नोस्टिक्स इंडिया में मानव संसाधन प्रमुख (शी एवं प्रशासन, भारत एवं पड़ोसी बाजार) राधा श्रीवास्तव कहती हैं, 'हमारा मानना है कि यहां के कर्मचारी कंपनी में इस तरह का माहौल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमने लोगों की समितियां बनाई हैं जो विविधता तथा समावेशन के हमारे विचार को वास्तविकता में तब्दील कर रही हैं। इन समितियों की खास बात यह है कि इनमें किसी तरह के वरीयता क्रम को नहीं रखा गया।'

सौंदर्या कहती है कि जब कंपनियां कर्मचारियों में विविधता को ध्यान में रखकर भर्तियां करती हैं तो वे केवल लैंगिक और कर्मचारी की क्षमता जैसे दो स्तरों पर ही विविधता का ध्यान रख पाती हैं। वह कहती हैं, हालांकि पिछले कुछ सालों में इस प्रवृत्ति में बदलाव के आसार दिखे हैं। उनके अनुसार, 'कुछ संस्थाओं ने ट्रांसजेंडरों की भर्ती के लिए हमसे संपर्क किया। यह केवल एक शुरुआत है और हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण है।' सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को समाप्त किए जाने का फैसला भारतीय कंपनी जगत को अधिक समावेशी बनाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा। उदाहरण के लिए कॉग्निजेंट एक समान सेक्स वाले पार्टनर के लिए सर्जरी परामर्श के साथ-साथ मास्टक्टोमी और हिस्टरेक्टॉमी को शामिल करने वाले चिकित्सकीय बीमा की सुविधा दे रही है। किसी घरेलू कंपनी के लिए इस तरह का उदाहरण फिलहाल काफी दुर्लभ है। 

हालिया मीटू कैंपेन और सितंबर माह में धारा 277 पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद अधिकांश कंपनियां कर्मचारियों में विविधता और समावेशन पर अधिक ध्यान दे रही हैं।  सौंदर्या कहती है कि लगभग पिछले 5 सालों से भारत में कार्यरत घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विविधतापूर्ण माहौल बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही थी और अब ग्राहकों की मांग के चलते बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा और सलाहकार क्षेत्र की कंपनियां भी इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। वह कहती हैं कि पिछले कुछ सालों में बहुत सी कंपनियों को विविधतापूर्ण माहौल की आवश्यकता महसूस हुई है। उनके अनुसार, 'सिर्फ विविधतापूर्ण दिखना नहीं, बल्कि इसके साथ समावेशी दिखना भी बड़ी चुनौती है।'
Keyword: Cognizant, digital, IT,,
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