बिजनेस स्टैंडर्ड - अपोलो: दवा स्टोर भी बढ़ाएगी और ऑनलाइन भी आजमाएगी
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अपोलो: दवा स्टोर भी बढ़ाएगी और ऑनलाइन भी आजमाएगी

टी ई नरसिम्हन /  December 07, 2018

कर्ज कम करने और फंड बढ़ाने के लिए अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज की राइट्स इश्यू के जरिये विदेशी निवेशकों से करीब 7.5 अरब रुपये जुटाने की योजना है। लेकिन पिछले तीन साल से नियामकीय अड़चनों से उसकी यह योजना अटकी पड़ी है। लेकिन पिछले महीने समूह को इसका इलाज मिल गया जिससे उसके दवा कारोबार को बहुत फायदा होगा। अपोलो ने घोषणा की है कि वह अपने दवा कारोबार को अलग करके एक अलग कंपनी बनाएगी। कारोबार बढ़ाने और विदेशी निवेश के मानकों का पालन करने के लिए समूह ने यह फैसला किया है। विदेशी निवेश संवद्र्घन बोर्ड ने अपोलो को अपने दवा कारोबार का पुनर्गठन करके इसे अलग करने को कहा था ताकि यह मल्टी ब्रांड रिटेल के नियामकीय दिशानिर्देशों को पूरा कर सके।

 
अपोलो हॉस्पिटल्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी अखिलेश्वरन कृष्णन ने कहा, 'अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज में हमारे पास विदेशी निवेशक हैं जो नहीं चाहते कि हमारा दवा कारोबार मौजूदा स्थिति में रहे।' हालांकि अपोलो 2008 से ही अपने दवा कारोबार को अलग करने और रणनीतिक साझेदार लाने की कोशिश कर रही है। लगता है कि अब इस योजना को अंजाम देने का सही समय आ गया है। कंपनी के दवा कारोबार से जुड़े स्टोरों, कर्मचारियों और उत्पादों को अब एक अलग कंपनी अपोलो फार्मेसीज के तहत लाया जाएगा। 
 
अपोलो हॉस्पिटल्स की वित्तीय सेहत में दवा कारोबार की अहम भूमिका है। देशभर में कंपनी के 3,000 से अधिक स्टोर हैं और 2017-18 में अपोलो हॉस्पिटल्स के कुल राजस्व में इसका योगदान करीब 40 फीसदी था। नए ढांचे के तहत दवा कंपनी अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी घटकर 25 फीसदी रह जाएगी। इसमें जरूरत पडऩे पर शेयरों की पुनर्खरीद का विकल्प भी होगा।  नई कंपनी का पुनर्गठन अपोलो मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की सहयोगी कंपनी के तौर पर किया जाएगा जिसमें निवेशकों ने 74.5 फीसदी हिस्सेदारी 1.06 अरब रुपये में खरीदी है। अपोलो ने इसमें 35 करोड़ रुपये निवेश किया है और 3.87 अरब रुपये बैंक उधारी के जरिये आएंगे। इस ढांचे ने नई कंपनी को कीमत वसूली में मदद की है। बैक-एंड सहित कंपनी का दवा कारोबार करीब 50 अरब रुपये का है।
 
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज की कार्यकारी वाइस चेयरपर्सन शोभना कामिनेनी दवा कारोबार की प्रमुख बनी रहेगी। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि इस फैसले का मकसद न केवल एफडीआई मानकों का अनुपालन करना है बल्कि दवा कंपनी की संभावनाओं के लिए दरवाजे खोलना और कारोबार पर ध्यान केंद्रित करना है। कंपनी के नए निवेशकों में झेलम इनवेस्टमेंट फंड, दिग्गज निवेश बैंकर और डीएसपी ब्लैकरॉक के चेयर हेमेंद्र कोठारी तथा इनाम सिक्योरिटीज हैं। इन सभी को अपोलो फार्मेसीज के बोर्ड में जगह मिलेगी। इनाम सिक्योरिटीज की इसमें 44.7 फीसदी, झेलम इनवेस्टमेंट फंड की 19.9 फीसदी और कोठारी की 9.9 फीसदी हिस्सेदारी होगी। 
 
फंड की उपलब्धता के बाद अब अपोलो फार्मेसी जल्द से जल्द ई-कॉमर्स के क्षेत्र के उतरना चाहती है। अभी तक कंपनी की इसमें मौजूदगी नहीं है। इसके साथ वह ऑनलाइन और ऑफलाइन के बीच अंतर पाटना चाहती है। कामिनेनी ने कहा, 'भविष्य में हम रणनीतिक या नए इक्विटी निवेशकों की तलाश करेंगे। आईपीओ का विकल्प भी तलाशा जा सकता है।' अलबत्ता उन्होंने कहा किअगर मल्टी ब्रांड कारोबार में एफडीआई की अनुमति दी जाती है तो इससे कंपनी को आसानी से फंड हासिल करने में मदद मिल सकती है।
 
अपोलो फार्मेसी की योजना अगले पांच साल में अपने स्टोर की संख्या 3,167 से बढ़ाकर 5,000 करने और राजस्व 100 अरब रुपये पहुंचाने की है। साथ ही उसने प्राइवेट लेबल बिजनेस को छह फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। देश के 15 अरब डॉलर के दवा बाजार में संगठित फार्मेसी रिटेल की हिस्सेदारी पांच फीसदी से भी कम है। देश में दवा बाजार के अगले दशक के दौरान 10-12 फीसदी के सालाना चक्रवृद्घि दर से बढऩे की उम्मीद है। खर्च करने लायक आय में बढ़ोतरी, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की मांग, गंभीर बीमारियों के प्रसार, जांच को लेकर बढ़ती जागरूकता और जेनेरिक दवाओं के जरिये इलाज की बढ़ती पहुंच से दवा बाजार में बढ़ोतरी हो रही है।
 
अपोलो फार्मेसी के स्टोरों की संख्या 2004-05 में 170 थी जो सितंबर 2018 के अंत तक 3,167 पहुंच गई। कंपनी का देश के 20 राज्यों के 400 शहरों में कारोबार है और वह सालाना तीन लाख ग्राहकों को दवा बेचती है। कामिनेनी का ऑनलाइन माध्यम से कुल राजस्व का 20 फीसदी हिस्सा जुटाने का लक्ष्य है। कंपनी का मौजूदा राजस्व करीब 43 अरब रुपये है। ऑनलाइन मार्केट रिसर्च डेटा प्लेटफॉर्म रिसर्चऐंडमार्केट्स.कॉम के मुताबिक देश में ई-फार्मेसी बाजार के सालाना 20 फीसदी की चक्रवृद्घि दर से बढऩे की उम्मीद है। अभी यह एक अरब डॉलर है और 2024 तक इसके तीन अरब डॉलर के पार पहुंचने की संभावना है। कंपनी के नए स्वरूप का मूल कंपनी अपोलो हॉस्पिटल्स को भी फायदा है। कंपनी ने दवा कारोबार में 8.50 अरब रुपये की पूंजी लगाई है जिसमें से करीब 5 अरब रुपये नई कंपनी को मिलेंगे। इससे अपोलो हॉस्पिटल्स को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और उसके बैक-एंड बिजनेस की कीमत बढ़ेगी। 
 
कंपनी प्रबंधन ने पिछले महीने एक कांफ्रेंस कॉल में कहा था, 'अपोलो हॉस्पिटल्स इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल दूसरे कारोबारों को बढ़ाने में कर सकता है।' अलबत्ता मूल कंपनी को राजस्व के नुकसान की आशंकाएं भी हैं। लेकिन प्रबंधन का मानना है कि इससे एबिटा पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि निकट भविष्य में अपोलो हॉस्पिटल्स की कमाई में 40 करोड़ रुपये की कमी आएगी लेकिन दीर्घकालीन अवधि में इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। अभी केवल कंपनी के दवा कारोबार के खुदरा हिस्से को ही अलग किया गया है, इसलिए अपोलो हॉस्पिटल्स के पास अब भी दवा कारोबार 85 फीसदी एबिटा और इसका 90 फीसदी नकदी प्रवाह बरकरार रहेगा। साथ ही फ्रंट-एंड दवा कारोबार बढऩे से बैक-एंड को भी फायदा मिलेगा।
Keyword: pharma, medicine, appolo,,
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