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प्रो कबड्डी लीग की पहेली और स्टार इंडिया की उलझन

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  December 07, 2018

प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) देश में क्रिकेट की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के बाद सर्वाधिक चर्चित लीग है। इसके मौजूदा सीजन के दशर्कों की संख्या में करीब 40 फीसदी की कमी आई है। 200 करोड़ डॉलर वाली देश की सबसे बड़ी मीडिया फर्म में से एक स्टार इंडिया ने इसका प्रबंधन कैसे किया और इसका अर्थ क्या हुआ? स्टार इंडिया ने वर्ष 2012 में 20,000 करोड़ रुपये की राशि के साथ खेलों पर जोर देना शुरू किया। इस राशि का करीब 30-40 फीसदी हिस्सा क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के लिए था। लगभग यही वह समय था जब आनंद महिंद्रा और चारु शर्मा के मशाल स्पोट्र्स को एक प्रसारक की आवश्यकता थी जो कबड्डी को बढ़ावा दे सके। उन्हें वह प्रसारक स्टार के रूप में मिला। स्टार ने न केवल लीग में निवेश किया बल्कि उसने इस खेल को स्टेडियम, खिलाड़ी और बुनियादी स्तर पर विकसित किया। उसने नेटवर्क के सभी 52 चैनलों पर भी इस खेल को बढ़ावा दिया। उनमें से 9 पर अभी पीकेएल का प्रसारण हो रहा है। 

 
परिणाामस्वरूप आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय रहा यह खेल बीते कुछ वर्षों में भारतीय खेल जगत की बड़ी सफलता बनकर उभरा है। वर्ष 2014 में पहले सीजन के बाद से ही इसके दर्शकों की तादाद लगातार बढ़ी है और ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के आंकड़ों के मुताबिक वह क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। ऐसे में पीकेएल के 6वें सीजन में शुरुआती 78 मैचों में दर्शकों की संख्या में 40 फीसदी की गिरावट बहुत बड़ी गिरावट है। आप कह सकते हैं कि पूरी तस्वीर जनवरी के शुरुआती दिनों में सीजन खत्म होने के बाद सामने आएगी। परंतु पीकेएल के शुरुआती चार सप्ताह में ही रेटिंग के उम्मीद के मुताबिक न रहने से निराशा पैदा हुई थी। पटना पायरेट्स के मालिक मुकंद के सह-अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राजेश शाह के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दर्शक उसी समय हो रही कई खेल प्रतियोगिताओं के बीच बंट गए थे। वैसे भी यह पीकेएल का सामान्य सीजन नहीं है। यह बात सच है। इस बात पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है कि आखिर क्यों पीकेएल को त्योहारी सीजन और बड़ी फिल्मों की रिलीज के बीच शुरू किया गया। आमतौर पर ऐसा जून-जुलाई में होता है। इसके अलावा पीकेएल के दर्शकों में से करीब एक चौथाई आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आते हैं जहां इस खेल को क्रिकेट की तुलना में दोगुने दर्शक मिलते हैं। परंतु वर्ष से उलट इस बार पहला चरण हैदराबाद में नहीं बल्कि चेन्नई में आयोजित किया गया। आश्चर्य नहीं कि इससे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दर्शक कम हुए। 
 
इसके लिए कई वजहों को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। मूल रूप से मनोरंजन जगत की एक ऐसी कंपनी जो दबाव में है और जिसके प्रबंधन में भी गहराई नहीं है, वह कई क्षेत्रों में हाथ पैर मार रही है। इसके बावजूद टीम मालिकों को लग रहा है कि स्टार चीजों को ठीक कर लेगी। शाह कहते हैं, 'पांचवे सप्ताह से दर्शकों की संख्या बढ़ी है और अब यह पिछले सीजन की समान अवधि से अधिक है। स्टार ने तब से काफी प्रमोशन किया है, ऐसे में आगे दर्शक और बढ़ेंगे।' शायद यही वह मौका है जब स्टार को ध्यान देने की आवश्यकता थी। मीडिया पाटर्नर्स एशिया के मुताबिक पीकेएल मे कुल निवेश 700 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। स्टार इसके आयोजन में हर वर्ष औसतन 180 से 200 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। माना जा रहा है कि वर्ष 2021-22 से यह आयोजन नफा-नुकसान की बराबरी की स्थिति में आ जाएगा। काफी लंबे समय तक पीकेएल की सफलता का श्रेय इस बात को दिया जाता रहा कि अन्य खेलों के उलट स्टार का इस पर पूरा नियंत्रण है। वह इस खेल के मीडिया अधिकारों का मालिक है, प्रसारक है और लीग मालिक भी। परंतु मौजूदा हालात ने हितों के टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। अधिकांश टीम मालिकों को लगता है कि  मीडिया अधिकार ( वर्ष 2019 और 2020 के लिए बोली चालू है) सर्वाधिक बोली लगाने वाले को जाने चाहिए। वर्ष 2013 में जब स्टार ने पीकेएल की शुरुआत की तो इसमें किसी की रुचि नहीं थी इसलिए उसे अधिकार सस्ती दर पर मिल गए। उसने इस खेल को स्थापित करने में जो पैसा और प्रयास खर्च किए, अब उनका असर सामने आ रहा है और कई प्रसारक और वीडियो दिखाने वाली कंपनियां अब पीकेएल में रुचि दिखा रही हैं।
 
इससे यह सवाल उठता है कि अगर स्टार अन्य बोलियों का मुकाबला नहीं कर पाया तो क्या होगा? क्या वह बतौर लीग मालिक काम कर पाएगा जो वह मीडिया अधिकार मालिक और इस खेल को आगे बढ़ाने वाले के रूप में नहीं कर सकता? याद रहे मशाल के पास राजस्व के केंद्रीय पूल की 20 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा मीडिया अधिकार में है। शेष 80 फीसदी अन्य टीमों के बीच बंटा हुआ है। इस वर्ष और अगले वर्ष कहीं न कहीं स्टार को यह तय करना होगा उसे कबड्डी खेलते वक्त किस भूमिका में रहना है, मीडिया कंपनी की या लीग मालिक की? 
Keyword: kabaddi, league, PKL, IPL,,
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