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पूंजी प्रवाह बढऩे से फंडों में दम

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई December 06, 2018

बड़े फंड हाउसों ने पिछले वित्त वर्ष अपने मुनाफे में शानदार वृद्घि दर्ज की। इन फंडों को लगातार मजबूत पूंजी प्रवाह और हाल के वर्षों के दौरान की गई बचत से मदद मिली।  परिसंपत्तियों के संदर्भ में दूसरे सबसे बड़े एएमसी एचडीएफसी एमएफ को 2017-18 में 7.22 अरब रुपये का शुद्घ लाभ दर्ज करने में सफलता मिली जो पूर्ववर्ती वर्ष में हासिल किए गए 5.5 अरब रुपये के शुद्घ लाभ की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। दूसरे सबसे बड़े एएमसी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ का मुनाफा 30 प्रतिशत बढ़कर 6.25 अरब रुपये हो गया  जबकि रिलायंस एमएफ का मुनाफा समान अवधि में 26 प्रतिशत बढ़कर 5.04 अरब रुपये पर रहा। 
 
डीएसपी एमएफ और कोटक महिंद्रा एमएफ ने प्रमुख फंड हाउसों में मुनाफे में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्घि दर्ज की। डीएसपी एमएफ का शुद्घ लाभ 135 प्रतिशत बढ़कर 2.01 अरब रुपये पर पहुंच गया जबकि कोटक महिंद्रा एमएफ का मुनाफा 112 प्रतिशत की वृद्घि के साथ 0.81 अरब रुपये रहा।  एचडीएफसी एमएफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ और एसबीआई एमएफ ने 2017-18 के दौरान 500 अरब रुपये से अधिक की परिसंपत्तियां जोड़ीं, जो विभिन्न फंड हाउसों में सर्वाधिक हैं। मॉर्निंगस्टार इंडिया में पोर्टफोलियो स्पेशलिस्ट के निदेशक धवल कपाडिया ने कहा, 'पिछले 2-3 वर्षों में परिसंपत्तियों में तेजी वृद्घि से बड़े एएमसी के लिए किफायत और बचत में मदद मिली है। मुनाफे में वृद्घि की अन्य वजह डायरेक्ट फंड परिसंपत्तियों के अनुपात में तेजी आना भी है, जिनमें कमीशन नहीं चुकाया जाता है।'
 
डायरेक्ट प्लान निवेशकों को वितरकों के बजाय प्रत्यक्ष रूप से निवेश करने की अनुमति देते हैं और मौजूदा समय में कुल एमएफ परिसंपत्तियों में डायरेक्ट एमएफ योजनाओं का लगभग 40 प्रतिशत योगदान है। मार्च 2018 के अंत में फंड उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां 22 प्रतिशत बढ़कर 21.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं जो एक साल पहले की समान अवधि तक 17.54 लाख करोड़ रुपये थीं। इक्विटी परिसंपत्तियां समान अवधि में 38 प्रतिशत तक बढ़कर 7.49 लाख करोड़ रुपये पर रहीं और निवेशकों ने इक्विटी योजनाओं में लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये लगाए।
 
अनुमानों के अनुसार फंड हाउस इक्विटी योजनाओं के लिए 100-150 आधार अंक के बीच परिसंपत्ति प्रबंधन शुल्क वसूलते हैं जबकि डेट योजनाओं के लिए यह 5-100 आधार अंक के बीच है। इक्विटी परिसंपत्तियां डेट योजनाओं की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव से जुड़ी होती हैं।  जहां सभी प्रमुख 10 फंड हाउसों ने अच्छा मुनाफा दर्ज किया है, वहीं छोटे आकार के कई फंड हाउसों को लगातार संघर्ष का सामना करना पड़ा है। इनमें से 9 फंडों ने नुकसान और 8 ने एक अंक के दायरे में मुनाफा दर्ज किया। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों द्वारा शानदार प्रतिफल के लिए अच्छे ब्रांडों और योजनाओं पर ध्यान दिए जाने से बड़े और छोटे फंडों के बीच प्रतिफल अंतर भविष्य में बढऩे की आशंका है। 
 
यदि इक्विटी प्रवाह मजबूत नहीं रहता है और कुछ नियामकीय बदलाव लागू होते हैं तो भविष्य में मुनाफा मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, टीईआर, या टोटल एक्सपेंस रेशियो अगले कुछ महीनों में बदल सकता है, बड़ी योजनाओं में वसूला जाने वाला खर्च सीमित हो सकता है। नियामक ने 500 अरब रुपये तक की इक्विटी परिसंपत्तियों वाले फंड हाउसों के लिए टीईआर 1.05 प्रतिशत पर सीमित किया है जो पहले 1.75 प्रतिशत था। वहीं कम परिसंपत्ति वाले फंडों के लिए टीईआर में स्लैब के आधार पर कमी भी की गई है। क्लोज-एंड इक्विटी-आधारित योजनाओं के लिए यह 1.25 प्रतिशत पर सीमित किया गया है। 
 
म्युचुअल फंडों को पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट और गोल्ड जैसी पारंपरिक परिसंपत्तियों से निवेश वित्तीय परिसंपत्तियों में स्थानांतरित होने से भी फायदा हुआ है। एसआईपी के जरिये निवेश इस साल में 40-70 अरब रुपये पर रहा है।  विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है, 'इक्विटी निवेश की संस्कृति लोकप्रिय हो रही है और इसका स्वरूप अधिक औपचारिक हुआ है। कई नए निवेशक पेशवेर हैं और वे अन्य उद्योगों में आजीविका कमा रहे हैं, शेयर बाजार उनकी बचत के लिए सामान्य तौर पर एक माध्यम हैं। दक्षता, संसाधन और समय के अभाव की वजह से ये निवेशक बीमा योजनाओं और म्युचुअल फंडों के जरिये निवेश कर रहे हैं।' 
Keyword: fund house, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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