बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्यातकों को नहीं मिल रहा है रिफंड
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निर्यातकों को नहीं मिल रहा है रिफंड

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 12 06, 2018

6,000 करोड़ रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान नहीं

निर्यातकों के शीर्ष निकाय ने कहा कि नकदी संकट से जूझ रही राज्य सरकारें नहीं स्वीकार कर रही हैं आवेदन
40 प्रतिशत रिफंड के लिए अब तक आवेदन ही नहीं कर पाए हैं निर्यातक
1.16 लाख निर्यातकों को अब तक नहीं मिल पाया इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड

बिजनेस स्टैंडर्ड निर्यातकों को नहीं मिल रहा है रिफंडतकनीकी दिक्कतों और राज्य के कर विभाग द्वारा भुगतान के इच्छुक न होने की वजह से देश भर के निर्यातकों को अभी भी करीब 6,000 करोड़ रुपये नहीं मिल सका है, जो उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड के रूप में मिलना है।  निर्यातकों के संगठन फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने कहा कि फाइलिंग की प्रक्रिया में जहां दिक्कतें जारी हैं, वहीं तमाम छोटे व मझोले निर्यातकों को राज्यों द्वारा यह कहकर रिफंड नहीं दिया जा रहा है कि उनके पास नकदी नहीं है।  जिस इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान फंसा हुआ है, नई कर व्यवस्था के तहत उनमें से ज्यादातर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) के तहत आता है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'कुल रिफंड में से 40 प्रतिशत के लिए अभी आवेदन नहीं दिया जा सका है। देश भर में करीब 1.16 लाख लोगों को रिफंड नहीं मिला है।' 

राज्यों से लेवी में हिस्सेदारी पाना भी कठिन बना हुआ है। फियो ने कहा कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का कहना है कि निर्यातकों को देने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं।  उद्योग जगत के एक और सूत्र ने कहा, 'पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे खराब है। महाराष्ट्र में आवेदनोंं की स्वीकार करने की दर 5 प्रतिशत है, जबकि दिल्ली में सिर्फ 10 प्रतिशत है।' फियो ने सरकार से कहा है कि दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें निर्यातकों के समय और लागत का नुकसान हो रहा है। 

उद्योगों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि सरकार द्वारा वापसी की रफ्तार कम है और जीएसटीएन पोर्टल में गड़बड़ी की वजह से रिफंड के दावे की पूरी प्रक्रिया बहुत मुश्किल है। बहरहाल वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि रिफंड अटके रहने की प्रमुख वजह है कि तमाम कारोबारी सही तरीके से रिफंड फाइल नहीं कर रहे हैं।  एक निर्यातक को पहले ऑनलाइन आवेदन दाखिल करना होता है और उसके बाद नकदी खाते में से उसे निकाल दिया जाता है। फिर कारोबारी से भौतिक प्रिंटआउट मांगा जाता है, जो उसे अधिकारियों को देना होता है। लेकिन काम के बोझ में दबे कर अधिकारी सामान्यतया इसे इतनी तेजी से उसे स्वीकार नहीं करते।

देश भर के कर विभाग का कहना है कि वे कर्मचारियों की कम संख्या की वजह से झूझ रहे हैं। निर्यातकों का आरोप है कि उनका जायज दावा नहीं मिल रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'हमने आईटीसी दावोंं की की मांग पूरी तरह से ऑटोमेटिक माध्यम से पा रहे हैं और इसका आकलन कर रहे हैं। जीएसटी में निर्यात रिफंड व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए हम भविष्य मेंं सभी सुझावों को स्वीकार करेंगे।' 
Keyword: refund, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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