बिजनेस स्टैंडर्ड - रियल एस्टेट क्षेत्र कर सकता है चूक
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रियल एस्टेट क्षेत्र कर सकता है चूक

राघवेंद्र कामत / मुंबई 12 06, 2018

नकदी संकट से दुबला हो रहा रियल एस्टेट

कुल रियल एस्टेट उधारी में एचएफसी और एनबीएफसी का हिस्सा 61 प्रतिशत
प्रमुख एनबीएफसी के रियल एस्टेट को दिए जाने वाले कर्ज में 24-70 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है
एनबीएफसी को नकदी का संकट होने की वजह से डेवलपर उनसे कर्ज लेकर बैंकों का बकाया नहीं भुगतान कर पा रहे हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड रियल एस्टेट क्षेत्र कर सकता है चूकगैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को नकदी का संकट होने की वजह से प्रॉपर्टी डेवलपर अपने पुनर्भुगतान में चूक कर सकते हैं। बैंक से कर्ज न मिलने की स्थित में एनबीएफसी ही डेवलपरों के लिए बड़े कर्जदाता रहे हैं।  सीएलएसए की ओर से हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2018 कुल मिलाकर वाणिज्यिक रियल एस्टेट उधारी में हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के साथ एनबीएफसी की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत है। प्रमुख एनबीएफसी द्वारा रियल एस्टेट को दिए जाने वाले कर्ज में वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2018 के बीच 24 से 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 

तमाम डेवलपर किसी अन्य की उधारी चुकाने के लिए एनबीएफसी से कर्ज ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एनबीएफसी को नकदी का संकट होने की वजह से इस पर लगाम लग गई है।  रेटिंग फर्म क्रिसिल की ओर से मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस क्षेत्र को बैंक से होने वाले वित्तपोषण में वित्त वर्ष 2018 के दौरान 2 प्रतिशत की सीमित बढ़ोतरी के कारण एनबीएफसी और एचएफसी इस डेवलपरों को बचा रहे हैं। बहरहाल एनबीएफसी पर नकदी के मौजूदा दबाव की वजह से चुनिंदा डेवलपरों व परियोजनाओं पर इसका व्यापक असर पड़ रहा है और इससे उनके लिए धन जुटाना और कठिन हो गया है।'

रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित करने वाले डेवलपर अपने नकदी के प्रबंधन करने में सफल हो जा रहे हैं और उम्मीद है कि भविष्य में भी वे ऐसा कर सकेंगे। मुंबई के रुनवाल समूह के निदेशक संदीव रुनवाल ने कहा, 'एनबीएफसी के संकट की वजह से कर्ज का पुनर्वित्तपोषण रुक गया है। इससे डेवलपर चूक की ओर बढ़ेंगे।' रुनवाल समूह पर पडऩे वाले असर के बारे में उन्होंने कहा कि अगर बाजार पर दबाव होता है तो उसका असर सभी डेलवपरों पर होगा, किसी पर कम, किसी पर ज्यादा। 

मुंबई की एक रियल एस्टेट कंपनी के चेयरमैन ने कहा कि एनबीएफसी दूसरे बैंकों के कर्ज के भुगतान के लिए कर्ज दे रही थीं। उन्होंने कहा, 'जब कर्ज देने में चूक होती थी तो उसका प्रबंध दूसरे एनबीएफसी से होता था।' उन्होंने कहा कि आरबीआई यह जांच कर सकता है कि एनबीएफसी ने किन रियल एस्टेट डेवलपरों को अंधाधुंध कर्ज दिया है।  नोटबंदी, जीएसटी जैसे मसलों के कारण पिछले 2 साल से मकान की बिक्री सुस्त रही है। मकानों के खरीदार खरीद के अपने फैसले में देरी कर रहे हैं। नाइट फ्रैंक के मुताबिक सालाना आधार पर 2017 में मकानोंं की बिक्री 7 प्रतिशत गिरी है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के मुताबिक इस साल के पहले 9 महीनिों में प्रमुख 7 शहरों में सिर्फ 8 प्रतिशत की तेजी आई है। संपत्ति सलाहकार नाइट फ्रैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक और पूंजी बाजार के प्रमुख राजीव बैराठी ने कहा, 'त्योहारी सीजन खराब रहा। पूरी हो चुकी परियोजनाओंं जैसी कुछ श्रेणियों में ही बिक्री हुई।' 

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2018 के बीच मकानों की मांग 5 प्रतिशत कम हुई है और उम्मीद की जा रही है कि वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2021 के बीच यह 4 प्रतिशत बढ़ेगी।  फंड प्रबंधकों का कहना है कम कर्ज मिलने की वजह से डेवलपरों को भी संकट से जूझना पड़ रहा है। मुंबई की रियल एस्टेट निवेश फर्म निसुस फाइनैंस के प्रबंध निदेशक अमित गोयनका ने कहा कि होम लोन की वृद्धि दर पहले के 35 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

आवास ऋण का बाजार 7 लाख करोड़ रुपये का है, ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि वृद्धि में कमी करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये रहेगी, जो डेवलपरों के लिए बड़ा मुद्दा है। गोयनका ने कहा, 'वे (डेवलपर) कर्ज लेने के लिए कर्जदाता नहीं पा रहे हैं। अगर कर्ज के माध्यम से परियोजनाओं को नकदी नहीं मिलती है तो बिक्री का कोई मूल्य नहीं है। वे इस धन का इस्तेमाल निर्माण और ब्याज के भुगतान के लिए करती हैं।' एनारॉक कैपिटल के प्रबंध निदेशक शोभित अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट में मौजूदा संकट आईएलऐंडएफएस की वजह से है न कि डेवलपरों ने कोई चूक की है। अग्रवाल ने कहा, 'सितंबर से नकदी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। डेवलपर एक या दो तिमाही तक प्रबंध कर सकते हैं। मुझे नहीं पता कि आने वाले महीनों मेंं वे कैसे इंतजाम करेंगे। अगर यही स्थिति जारी रही तो वे आगे चूक करेंगे।'  बहरहाल एनबीएफसी का कहना है कि नकदी के मसले का हल निकल रहा है। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के प्रवक्ता ने कहा, 'पूरे एनबीएफसी-एचएफसी क्षेत्र में नकदी की स्थिति सामान्य हो रही है, खासकर एएए रेटिंग वाली एचएफसी की।'
Keyword: real estate, property, NBFC,,
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