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सीमित संसाधनों के साथ आगे बढ़ती नौसेना

दोधारी तलवार
अजय शुक्ला /  December 05, 2018

मंगलवार को वार्षिक नौसैनिक दिवस था। इस दिन हमारी नौसेना 4 दिसंबर, 1971 की ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता का उत्सव मनाती है। उस दिन नौसेना के किलर स्क्वाड्रन की तीन रूस निर्मित मिसाइल बोट ने कराची बंदरगाह पर बमबारी की थी। इस हमले में पाकिस्तान का एक विध्वंसक पोत डूब गया, एक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। जबकि एक सुरंगभेदी पोत तथा हथियारों से लदा एक मालवाहक पोत डूब गए।  इससे पहले के युद्घों में नौसेना हाशिये पर रही थी। सन 1971 की जंग आते-आते देश के एडमिरल अधिकारी यह जान गए थे कि नौसेना को अपनी भूमिका खुद दर्शानी होगी। कराची बंदरगाह पर हमले ने सबका ध्यान खींचा। कराची मुंबई से 900 किलोमीटर दूर है। यह दूरी हथियारबंद मिसाइल बोट के लिए बहुत अधिक है इसलिए नौसेना ने अपना सफर गुजरात के ओखा से शुरू किया जो कराची से 340 किमी दूर है। यह संभवत: इकलौती घटना है जहां कोई बेड़ा ऐसी जंगी कामयाबी हासिल कर सका। 

 
अब तक काफी वक्त बीत चुका है। सोमवार को जब एक संवाददाता ने नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा से कहा कि पेंटागन के अनुसार चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना (पीएलएएन) 2050 तक एक विश्वस्तरीय शक्ति होगी, भारतीय नौसेना कहां होगी? उन्होंने कहा कि उस समय तक भारतीय नौसेना के पास 200 से अधिक युद्धपोत और 500 विमानों का हवाई बेड़ा होगा और हमारी नौसेना भी विश्वस्तरीय होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना, पाकिस्तान की नौसेना से हर क्षेत्र में बेहतर है। चीन के साथ संतुलन के बारे में उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में शक्ति संतुलन हमारे पक्ष में है जबकि दक्षिण चीन सागर में वह चीन के पास है।
 
देश की थलसेना और वायुसेना चीन से पीछे हैं। नौसेना इकलौता ऐसा क्षेत्र है जहां भारत को श्रेष्ठता हासिल है। नौसेना देश की सुरक्षा के अहम पहलू के रूप में उभरी है। युद्ध में ही नहीं बल्कि शांति के समय सुरक्षा कायम रखने में भी इसकी अहम भूमिका है। देश की समुद्री सुरक्षा नीति का लक्ष्य ऐसा माहौल सुनिश्चित करना है जो हर प्रकार की पारंपरिक-गैर पारंपरिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। सन 2008 के बाद से करीब 70 भारतीय युद्धपोत अदन की खाड़ी और अरब सागर में समुद्री डकैतों से निपटने में लगे रहे। 413 भारतीय युद्धपोतों समेत उन्होंने 3,440 से अधिक पोतों को सुरक्षा प्रदान की। इस दौरान नौसेना ने समुद्री डकैती के 44 प्रयास नाकाम किए और 120 डकैतों को पकड़ा। नौसेना हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्र संचार लाइनों की भी रक्षा करती है। इसके जरिये करीब एक लाख पोत दुनिया भर की तेल आपूर्ति ढोते हैं। नौसेना गुडग़ांव के अपने आईमैक सिस्टम के जरिये इनकी रियल टाइम ट्रैकिंग करती है। वाणिज्यिक पोत परिवहन की ट्रैकिंग के लिए भारत ने 19 देशों के साथ समझौता किया है जिनमें से 12 पर अमल हो चुका है। नौसेना की बढ़ती पेशेवर प्रतिष्ठा को देखते हुए हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में उसकी प्रशिक्षण अकादमी की मांग बढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों के दौरान नौसेना ने अपने विदेशी प्रशिक्षुओं की तादाद 699 से बढ़ाकर 1,056 कर दी।
 
गत वर्ष हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए नौसेना ने मिशन आधारित नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाने की शुरुआत की।  इसमें भारत के समुद्री हित वाले हर क्षेत्र में एक या अधिक युद्धपोतों की तैनाती शामिल है। इसमें मलक्का की खाड़ी से लेकर होर्मूज की खाड़ी तक का क्षेत्र शामिल है। भारतीय नौसेना के साथ सैन्य प्रशिक्षण की मांग भी बढ़ रही है। नौसेना ने अकेले इस वर्ष साझेदार देशों के साथ 20 ऐसे अभ्यासों में शिरकत की है। इसमें फ्रांस के साथ, जापान और अमेरिका के साथ मालाबार अभ्यास, हवाई में बहुराष्ट्रीय रिंपैक्ट, भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका अभ्यास, श्रीलंका के साथ अभ्यास, सिंगापुर के साथ अभ्यास आदि शामिल हैं। इस वर्ष नौसेना यूएई और इंडोनेशिया के साथ अभ्यास कर रही है। अगले वर्ष मलेशिया और बांग्लादेश के साथ इसकी शुरुआत की जाएगी। इसके अलावा वह मालदीव, सेशल्स और मॉरीशस में संयुक्त निगरानी करता है।
 
नौसेना अपनी प्रमुख भूमिका के अलावा यह सारा कुछ करती है, वह भी सेना बजट के मात्र 15 फीसदी के साथ। विश्लेषकों के मुताबिक उसे कम से कम 18 फीसदी हिस्सा मिलना चाहिए। नौसेना को सर्वाधिक किफायती होने का खमियाजा चुकाना पड़ता है। उसने देश में युद्धपोत निर्माण की दिशा में काफी प्रगति की है। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 से अब तक नौसेना के कुल अनुबंधों में से 72 फीसदी भारतीय वेंडरों के साथ थे। यानी नौसेना के कुल पूंजीगत बजट का दोतिहाई देश में ही व्यय हुआ। 2014 के बाद से पोत निर्माण कार्यक्रमों में से 82 फीसदी भारतीय वेंडरों को दिए गए। हालांकि ये आंकड़े बढ़ाचढ़ा के पेश किए गए लगते हैं क्योंकि भारतीय वेंडर अपने सिस्टम, सब सिस्टम और अन्य घटक विदेशों से मंगाते हैं।
 
इसके बावजूद नौसेना के पास युद्घपोतों की कमी है। अभी उसके पास केवल 132 युद्घपोत हैं जबकि जरूरत 197 की है। 24 पनडुब्बियों की जरूरी क्षमता के स्थान पर केवल 14 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं। चीन की नौसेना करीब 50 पनडुब्बियां संचालित करती है और पाकिस्तान को चीन से जल्दी 8 नई पनडुब्बियां मिलने वाली हैं। इस बीच हमारे यहां देसी पनडुब्बी निर्माण कार्य में लगातार देरी हो रही है।  कराची पर हमले की उस शाम के बाद से हमारी नौसेना ने लंबी दूरी तय की है। आज अमेरिका तक भारत के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी को उत्सुक है। अगर चीन के साथ जंग होती है तो नौसेना भारत को वह सामरिक विकल्प मुहैया कराएगी जो सन 1962 में नदारद था। सेना के अन्य अंगों की तरह नौसेना भी उच्च स्तर पर ध्यान न दिए जाने की समस्या से जूझ रही है। वक्त आ गया है कि इसे इसका हक दिया जाए।
Keyword: defense, military, navy,,
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