बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली कंपनियों के विलय पर काम
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बिजली कंपनियों के विलय पर काम

अरूप रायचौधरी और श्रेया जय / नई दिल्ली December 05, 2018

अगर बिजली वित्त निगम (पीएफसी) का अधिग्रहण ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) कर लेती है तो एक सरकारी कंपनी द्वारा एक अन्य सरकारी कंपनी के अधिग्रहण से केंद्र सरकार की विनिवेश प्रक्रिया को बड़ा बल मिल सकता है।  बहरहाल बिजली मंत्रालय का मानना है कि अगर आरईसी लिमिटेड में सरकार की 58 प्रतिशत हिस्सेदारी पीएफसी ले लेती है तो इसका दोनों कंपनियों के लिए वित्तीय मतलब होगा। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) इस पक्ष में है कि आरईसी, पीएफसी में केंद्र की 65.6 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदे। पीएफसी में केंद्र की हिस्सेदारी का मूल्य करीब 160 अरब रुपये है, जबकि आरईसी में उसकी हिस्सेदारी का मूल्य 120 अरब रुपये है। इसके अलावा सरकार इन मूल्यांकनों के प्रीमियम पर भी विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर आरईसी, पीएफसी का अधिग्रहण करती है तो सरकार चाहती है कि इस सौदे का आकार 200 अरब रुपये से ज्यादा हो।
 
बिजली मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, दीपम के अधिकारियों और आरईसी व पीएफसी के प्रतिनिधियों ने पिछले सप्ताह वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर इन दोनों प्रस्तावोंं पर चर्चा की थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इस पर विचार किया गया कि कौन सा सौदा दोनों कंपनियोंं के लिए फायदेमंद होगा। बिजली मंत्रालय इस पक्ष में है कि पीएफसी, आरईसी में केंद्र की पूरी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करे। दीपम का अपना विचार है, लेकिन प्रशासनिक मंत्रालय के विचार अहम होंगे।' 
 
बहरहाल उन्होंने कहा कि अब तक इस मसले पर कोई अंतिम फैसला नहींं हुआ है। अधिकारी ने कहा, 'अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस मसले पर कैबिनेट नोट तैयार करने में कुछ वक्त लगेगा।' इस सिलसिले में अंतिम फैसला जल्द होगा और कुछ सप्ताह में कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया जाएगा।  पीएफसी बिजली क्षेत्र की प्रमुख वित्तपोषण कंपनी है, जो इस समय 14,000 मेगावॉट क्षमता की बिजली परिसंपत्तियों के एनपीए के खतरे से जूझ रही है। वहीं आरईसी सरकार की प्रमुख बिजली परियोजना को देख रही है, जिसने हाल ही में 100 प्रतिशत मकानों के विद्युतीकरण की सौभाग्य परियोजना पर काम पूरा किया है। 
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया में लीडर, एनजी, यूटिलिटी ऐंड माइनिंग कामेश्वर राव ने कहा, 'इन संस्थाओं का गठन विशेष मिशन के लिए किया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी गतिवधियां बदल गईं। इसके अलावा उन का मूल काम जैसे ग्रामीण विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जिस पर राज्य काम कर रहे हैं। अगर किसी विशेष काम के बगैर कई इंस्टीट्यूशंस रहते हैं तो इससे लागत बढ़ती है।' राव ने कहा, 'वहीं दूसरी तरफ नए क्षेत्रों जैसे अक्षय ऊर्जा के लिए पारेषण लिंक तैयार करने, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हाइब्रिड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की मांग बढ़ रही है, जिनकी बिजली क्षेत्र की वृद्धि में अहम भूमिका है। ऐसे में एक नए इंस्टीट्यूशन की जरूरत है, जो उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सके। अगर नई क्षमता के साथ बड़ा वित्तीय संस्थान बनता है तो यह इस क्षेत्र के लिए बेहतर होगा।' 
 
दोनों कंपनियों के वित्तीय आंकड़ोंं पर नजर डालने से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2017-18 के अंत में जहां पीएफसी की बाजार पूंजी ज्यादा थी, वहींं आरईसी नकदी के हिसाब से मजबूत थी। केंद्र का 2018-19 में विनिवेश लक्ष्य 800 अरब रुपये का है। अब तक दीपम ने 322 अरब रुपये जुटाए हैं।
Keyword: power, electric, discom, PFC,,
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