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महंगाई में टिकाऊ गिरावट पर दरों में कटौती

बीएस संवाददाता /  December 05, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक नीति के बाद संवाददाता सम्मेलन में गवर्नर और डिप्टी गवर्नरों ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब दिए। बातचीत के अंश: 

 
अगर महंगाई में बढ़ोतरी के जोखिम सही साबित नहीं होते हैं तो दरों में कमी का फैसला कब लिया जाएगा। क्या यह अगले वित्त वर्ष के अनुमानों पर आधारित होगा? 
 
गवर्नर ऊर्जित पटेल  : हमने साफ कहा है कि पिछले कुछ समय में महंगाई कुछ घटी है। मगर यह इस स्तर पर टिकी रहेगी या नहीं, इसके लिए हमें कुछ और आंकड़ों की जरूरत है। विशेष रूप से तेल के मामले में, जिसमें इस समय अक्टूबर की तुलना में उतार-चढ़ाव अधिक है। हालांकि तेल की कीमतें नीचे आई हैं। आने वाले आंकड़ों के आधार पर हमारे अनुमान बदलेंगे और हम जरूरत पडऩे पर दरों में कमी का फैसला लेंगे। 
 
महंगाई के अनुमान में भारी कटौती की गई है। असल में दूसरी छमाही के अनुमान का मध्य बिंदु 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे है। ऐसे में मौद्रिक नीति को सख्त क्यों रखा जा रहा है? 
 
डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य : आंकड़ों में उतार-चढ़ाव से फैसला लेना मुश्किल हो जाता है। हमें देखना होगा कि महंगाई लक्ष्य पर मध्यम अवधि के लिए बनी रहे। मेरा मानना है कि 2019-20 की दूसरी तिमाही का महंगाई का आंकड़ा 4.2 फीसदी पर रहेगा। इसका मतलब है कि हम 12 महीने की अवधि के लक्ष्य से थोड़ा ऊपर हैं। 
 
आपने कहा है कि गैर-खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी का रुझान है। गैर-खाद्य महंगाई को लेकर आपका क्या अनुमान है? आप अपने अनुमान में कच्चे तेल की कितनी कीमत मानकर चलेंगे? 
 
गवर्नर ऊर्जित पटेल : प्रस्तावना में गैर-खाद्य और गैर-ईंधन का अनुमान पेश किया गया है। हम जिस दिन अनुमान पेश करते हैं, उसी दिन कच्चे तेल की कीमतें तय करते हैं। ये कीमतें पिछले दिन की वायदा कीमतों पर आधारित होती है। 
 
विश्लेषकों ने आर्थिक तंत्र में नकदी बढ़ाने के लिए नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कटौती की बात कही है। क्या इसे लेकर मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में चर्चा हुई? 
 
गवर्नर ऊर्जित पटेल : सीआरआर मौद्रिक नीति समिति के दायरे में नहीं आता है। दूसरा, हमें नहीं लगता कि सीआरआर को इस्तेमाल करने की जरूरत है, जब हमारे पास अन्य कई विकल्प हैं। हमने पिछले दो महीनों के दौरान नकदी के प्रबंधन में इन विकल्पों का इस्तेमाल किया है। 
 
क्या आपने ओपन मार्केट ऑपरेशन के स्थान पर लंबी अवधि की रीपो के बारे में विचार किया? 
 
गवर्नर ऊर्जित पटेल : ओपन मार्केट ऑपरेशन से लंबी अवधि की नकदी दिक्कतें दूर होती हैं, जबकि लंबी अवधि की रीपो से लघु अवधि की नकदी की किल्लत दूर करने में मदद मिलती है। हमने 28 दिन और 56 दिन की रीपो का इस्तेमाल किया है। 
 
सरकार के साथ संबंधों को लेकर आप क्या कहेंगे? 
 
गवर्नर ऊर्जित पटेल : मैं पहले भी कह चुका हूं कि मैं ऐसे सवालों का जवाब नहीं दूंगा क्योंकि हम यहां मौद्रिक नीति समिति के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं। 
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