बिजनेस स्टैंडर्ड - आईटी: एच1बी में सख्ती से बदली रणनीति
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आईटी: एच1बी में सख्ती से बदली रणनीति

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु December 05, 2018

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियां अमेरिका के बीजा नियमों में सख्ती के मद्देनजर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए आसपास के देशों में विकल्प तलाशने लगी हैं। वे अपने अमेरिकी ग्राहकों को आसपास के देशों से सेवाएं मुहैया कराने की योजना बना रही हैं क्योंकि अपने इंजीनियरों को अमेरिका भेजना उनके लिए कठिन हो गया है। यही कारण है कि भारतीय आईटी कंपनियों के बीच नियरशोरिंग का चलन बढ़ा है।  नियरशोरिंग एक आउटसोर्सिंग मॉडल है जिसके तहत आईटी कंपनियां अपने ग्राहकों के आसपास की जगहों अथवा देशों में केंद्र स्थापित कर अपने कर्मचारियों को तैनात करती है और जरूरत पडऩे पर सेवाएं मुहैया कराती हैं। विश्लेषकों का माननना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा नियमों में हालिया सख्ती के बाद नियरशोरिंग में और तेजी आएगी। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संस्थानों से डिग्री हासिल करने वाले स्थानीय लोगों को तकनीकी रोजगार में प्राथमिकता देने के लिए वीजा नियमों में सख्ती की है। लंदन की फर्म ओवम रिसर्च की वरिष्ठ विश्लेषक हंसा आयंगर ने कहा, 'नियरशोरिंग के लिए निवेश में तेजी दिख रही है और कनाडा के अलावा मेक्सिको में भी भारतीय वेंडरों की दिलचस्पी बढ़ रही है।' उन्होंने कहा, 'अन्य नियरशोर गतिविधियां यूरोप में केंद्रित हैं जहां पूर्वी यूरोप और नॉर्डिक देश कहीं अधिक व्यावहारिक जगह के तौर पर उभर रहे हैं।'

 
हालांकि घरेलू आईटी सेवा कंपनियों के लिए नियरशोरिंग कोई नई बात नहीं है लेकिन अमेरिका में मौजूदा ट्रंप प्रशासन के तहत सख्त आव्रजन नीति लागू किए जाने के कारण तमाम भारतीय आईटी कंपनियां अपने अमेरिकी ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराने के लिए इस विकल्प पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही हैं। उन्हें अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों का आधार तैयार करने के बजाय नियरशोरिंग बेहतर विकल्प दिख रहा है। भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है और उनके कुल राजस्व में उत्तर अमेरिकी महाद्वीप का योगदान 60 फीसदी से अधिक है। भारतीय आईटी कंपनियां आमतौर पर अमेरिका में अपने ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराने के लिए एच1बी वीजा पर इंजीनियरों को वहां भेजती रही हैं। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी 60 फीसदी एच1बी वीजा भारतीय कंपनियों को जाता है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने स्थानीय लोगों की नियुक्तियों पर जोर दिया है और इसलिए आईटी कंपनियां आसपास के केंद्रों में स्थानीय कर्मचारियों का आधार तैयार कर रही हैं ताकि प्रतिभाओं के प्रमुख स्रोत के तौर पर एच1बी वीजा पर निर्भरता घटाई जा सके। मझोली आकार की आईटी कंपनी हेक्सावेयर ने कहा है कि वह अपने मेक्सिको केंद्र के जरिये अमेरिकी ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराएगी। इसी प्रकार, टेक महिंद्रा ने इसी साल कनाडा में अपना एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की थी जिस पर वह 10 करोड़ कनाडाई डॉलर का निवेश करेगी। इस नए केंद्र में ग्राहकों के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी में कारोबारी समाधान तैयार किए जाएंगे।
 
आईटी आउटसोर्सिंग सलाहकार पारीख जैन ने कहा, 'आईटी कंपनियां अब कनाडा में निवेश कर रही हैं क्योंकि कनाडा से वीजा हासिल करना अमेरिका के मुकाबले कहीं अधिक आसान है। सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए आप कनाडा में काम कर रहे हैं लेकिन जरूरत पडऩे पर अमेरिकी ग्राहकों को सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।' जैन ने कहा, 'इसकी झलक आंकड़ों में पहले ही दिख चुकी है क्योंकि 2017 में भारत ने फिलीपींस को पछाड़कर सबसे अधिक प्रवासियों को कनाडा भेजा।' विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका से मिल रही वीजा चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियां नियरशोरिंग का विकल्प तलाश रही हैं। ऊंची लागत के कारण यह समाधान भी अधिक टिकाऊ नहीं दिख रहा है। आयंगर ने कहा, 'ऑफशोरिंग के मुकाबले नियरशोरिंग सस्ता नहीं है, लेकिन यह उन सौदों के लिए जरूरी है जहां वेंडर-ग्राहक टीमों के बीच करीबी निकटता की जरूरत होती है।'
Keyword: IT, firm, jobs, visa,,
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