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मध्यम और भारी ट्रकों की बिक्री नवंबर में 20 फीसदी घटी

शैली सेठ मोहिले / मुंबई December 04, 2018

मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों (एमएचसीवी) के ज्यादातर विनिर्माताओं की बिक्री में नवंबर में भारी गिरावट आई है। हालांकि पिछले एक साल से बिक्री तेजी से बढ़ रही थी। इससे पूरी अर्थव्यवस्था में मंदी का संकेत मिलता है।  वाहन कंपनियों द्वारा जारी बिक्री के मासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि चार शीर्ष विनिर्माता कंपनियों- टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, वोल्वो आयशर कॉमर्शियल व्हीकल, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की बिक्री नवंबर में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 20 फीसदी घटकर 20,324 रही। ऋण की ऊंची लागत, ढोने के लिए कम माल मिलने और मालभाड़ा घटने से बिक्री में गिरावट आई है। इन सब वजहों से ट्रांसपोर्टरों के मुनाफे पर असर पड़ा है। भारत में वाहन कंपनियां डीलरों को माल भेजने को बिक्री मानती हैं। 
 
टाटा मोटर्स के मध्यम और भारी ट्रकों की बिक्री नवंबर में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 24 फीसदी घटकर 9,793 रही। कंपनी ने इसकी वजह माल की बिक्री में गिरावट बताई है। माल की बिक्री इसलिए कम रही क्योंकि उपभोक्ताओं के कमजोर रुझान के कारण कारोबारियों ने अपनी खरीद टाली। कंपनी ने कहा कि वाहनों के बेड़े की क्षमता में बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान वाहनों को अधिक भार ढोने के लिए पंजीकृत कराया जा रहा है, जिससे बिक्री पर असर पड़ा है। हालांकि टाटा मोटर्स ने कहा है कि टिपर खंड में नवंबर के दौरान पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इस खंड की बिक्री पर तुलनात्मक रूप से कम असर पड़ा है। इस खंड को सड़क निर्माण, किफायती आवास, सिंचाई परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सरकार के खर्च से मदद मिल रही है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि की रफ्तार 2018-19 की दूसरी तिमाही में सुस्त पड़ी है। आलोच्य तिमाही में वृद्धि 7.1 फीसदी रही है, जो पहली तिमाही में 8.2 फीसदी रही थी। जीडीपी में गिरावट की मुख्य वजह विनिर्माण में सुस्ती रही है। भारत के आठ प्रमुख उद्योगों की उत्पादन वृद्धि अक्टूबर, 2018 में बढ़कर 4.8 फीसदी रही, जो सितंबर में 4.3 फीसदी थी। लेकिन सालाना आधार पर आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की वृद्धि पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले कम रही। पिछले साल अक्टूबर में इन आठ प्रमुख उद्योगों की उत्पादन वृद्धि 5 फीसदी रही थी। 
 
टाटा मोटर्स के अध्यक्ष (वाणिज्यिक वाहन कारोबारी इकाई) गिरीश वाघ ने एक बयान में कहा, 'नवंबर, 2018 उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण महीना रहा क्योंकि बाजार में कम नकदी, ऊंची ब्याज दरों और ईंधन की बढ़ती लागत के कारण उपभोक्ताओं का रुझान सुस्त रहा। कुछ मामलों में छोटे ऑपरेटरों के मुनाफे पर असर पड़ा है। इसकी वजह यह है कि जीएसटी से संबंधित क्रेडिट के कारण बड़े ऑपरेटरों को फायदा हुआ है। उन्होंने यह फायदा ग्राहकों को देने के लिए मालभाड़ा कम किया है।' वाघ का मानना है कि आगामी महीनों में बिक्री सुधरेगी क्योंकि नकदी की स्थिति सुधरने लगी है और वैश्विक कच्चे तेल के दाम घटने से तेल की कीमतें भी कुछ कम हुई हैं। 
 
इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) में सीनियर फैलो एसपी सिंह ने कहा कि वर्तमान मंदी अनुमान के मुताबिक ही है। सिंह ने कहा, 'हमारा ऐसा अनुमान पहले से इसलिए था क्योंकि बाजार में पहले ही जरूरत से अधिक क्षमता थी।' 
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