बिजनेस स्टैंडर्ड - 'कच्चा तेल 2018-19 में रहेगा 70 डॉलर से नीचे'
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'कच्चा तेल 2018-19 में रहेगा 70 डॉलर से नीचे'

शाइन जैकब / नई दिल्ली December 03, 2018

कतर के ओपेक से बाहर निकलने और इस सप्ताह आपूर्ति में कटौती के फैसले से कच्चे तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस पर हिंदुस्तान  पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एम के सुराणा ने आज कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, लेकिन ये वित्त वर्ष 2018-19 की बची हुई अवधि में 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे ही रहेंगे। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की अटकलें इसलिए तेज हुई हैं क्योंकि आज कच्चे तेल के दाम एक समय 2.7 फीसदी बढ़कर 62.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। इससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के हाल के रुझान पर अंकुश लगा है। सुराणा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'कतर अपने निजी हितों के आधार पर बाहर निकल रहा है। इन सब भूराजनीतिक हालातों के बावजूद कीमतें इस वित्त वर्ष की शेष अवधि में 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहेंगी।' 
 
हाल में कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल काबी ने कहा था कि उनका देश 1 जनवरी, 2019 तक पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह (ओपेक) से बाहर निकलेगा और गैस उत्पादन पर ध्यान देगा। इसके अलावा इस सप्ताह ओपेक की बैठक होनी है, जिसमें कीमतों में गिरावट रोकने के लिए आपूर्ति में कमी का फैसला लिए जाने के आसार हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'अति आपूर्ति की चिंताओं के कारण पिछले कुछ सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। हालांकि अगर ओपेक अपनी अगली बैठक में प्रतिदिन करीब 10 से 15 लाख बैरल की कटौती करने में सफल रहा तो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है। हमारा मानना है कि ओपेक की तेल आपूर्ति में इतनी कटौती कैलेंडर वर्ष 2019 में बाजार को संतुलित करने के लिए पर्याप्त होगी।'
 
इसने कहा है कि अमेरिका के ईरान के कच्चे तेल के निर्यात पर मई 2019 से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की स्थिति में आपूर्ति सरप्लस भी नीचे आ सकता है। कुछ ऐसी भी खबरें आई हैं, जिनमें कहा गया है कि कतर ने यह कदम सऊदी अरब के जून, 2017 में उसका आर्थिक बहिष्कार करने के कारण उठाया है। सऊदी अरब ने कतर का आर्थिक बहिष्कार करते हुए कहा था कि वह आतंकवाद और उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान को बढ़ावा दे रहा है। कतर इस तेल समूह का 1961 से सदस्य है।  हाल में तेल की कीमतें इसलिए गिरी हैं क्योंकि सऊदी अरब तथा रूस जैसे देशों ने उत्पादन बढ़ाया है, अमेरिका में शेल तेल का उत्पादन बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से तेल आयात करने के लिए भारत सहित आठ देशों को 180 दिन की छूट दी है। यह अवधि 5 नवंबर से शुरू होगी। 
 
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5 अक्टूबर से 26.9 फीसदी गिरी हैं। ये 5 अक्टूबर को 85.12 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब करीब 62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।  अक्टूबर में तेल के कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाने के कारण केंद्र सरकार को उत्पाद शुल्क में 1.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने के लिए बाध्य होना पड़ा था। वहीं तेल विपणन कंपनियों को भी अपने मार्जिन में 1 रुपये प्रति लीटर की छूट का भार उठाना पड़ा ताकि ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में राहत दी जा सके। 
Keyword: crude oil, price, iran, america, अमेरिका, भारत, चीन,
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