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सालाना जीएसटी रिटर्न को लेकर उद्योग जगत चिंतित

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 03, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत सालाना रिटर्न दाखिल करने में कारोबारियों को प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं से जूझना पड़ रहा है। यह रिटर्न 2017-18 के लिए दिसंबर तक दाखिल किया जाना है। ऐसा इसलिए है कि जीएसटी के तहत मासिक रिटर्न दाखिल करने की तुलना में सालाना रिटर्न दाखिल करने के लिए बहुत ज्यादा विस्तार से ब्योरोंं की जरूरत होती है। बड़ी कंपनियां, जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उन्हें दो मासिक रिटर्न दाखिल करना पड़ता है और इससे कम कारोबार करने वालों को तीन महीने में एक बार रिटर्न दाखिल करना होता है.।  उन्हें एक जीएसटीआर-1 दाखिल करना होता है, जिसमें आपूर्ति और जीएसटीआर-3बी के  ब्योरे की जरूरत होती है। इसमें कंपनी की आपूर्ति, खरीद, इनपुट टैक्स क्रेडिट दावे और शुद्ध कर देनदारी के ब्योरे की जरूरत होती है। बहरहाल सालाना रिटर्न जीएसटीआर-9 में खरीद का तीन प्रारूपों में ब्रेकअप की जरूरत होती है, जिसमें कच्चा माल, इस्तेमाल की गई सेवाएं और पूंजीगत वस्तुएं शामिल हैं। क्लीयरटैक्स के सीईओ अर्चिस गुप्ता ने कहा, 'बहरहाल मासिक या तिमाही रिटर्न मं आपको ब्रेकअप नहीं देना होता है। ऐसा होने पर प्रक्रिया संबंधी मुश्किलें बढ़ती हैं।' 
 
उन्होंने कहा कि कारोबारियों को कारोबार व सेवाओं पर करों का अलग अलग रिकॉर्ड रखना होता है, क्योंकि पहले के कर के दौर मेंं अलग कर था। बहरहाल उसके बाद से सभी कंपनियां अलग अलग रिकॉर्ड नहीं रख रही हैं। उन्होंने कहा कि सालाना रिटर्न में इनपुट टैक्स क्रेडिट के ब्योरे की भी जरूरत होती है, जिससे अनुपालन का बोझ बढ़ता है। इसके अलावा जीएसटीआर-9 में कंपनियों को उनके द्वारा की गई खरीद के लिए हार्मोनाइज्ड सिस्टम नॉमनक्लेचर (एचएसएन) कोड देना होता है।  मासिक रिटर्न के तहत एचएसएन कोड की जरूरत सिर्फ बिक्री के मामले में पड़ती है, खरीद में नहीं। साथ ही जिनका कारोबार 1.5 करोड़ से कम है, उनके लिए एचएसएन कोड की जरूरत नहीं होती है। जिनका कारोबार 1.5 से 5 करोड़ रुपये के बीच है, उन्हें दो अंक का एचएसएन कोड देना होता है और जिनका कारोबार 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का है उन्हें 4 अंकों का एचएसएन कोड देना होता है। सालाना रिटर्न में सभी कंपनियों को खरीद के लिए एचएसएन कोड देना होता है। गुप्ता ने कहा, 'यह श्रमसाध्य कवायद है। बड़ी कंपनियों को भी समस्या हो सकती है, लेकिन छोटी और मझोली कंपनियोंं को ज्यादा जूझना पड़ता है।' 
 
केपीएमजी में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि कि उम्मीद यह होती है कि सालाना रिटर्न साल के दौरान दाखिल किए गए मासिक रिटर्न का योग होगा। उन्होंने कहा, 'बहरहाल अतिरिक्त ब्योरे की जरूरत, जैसे आपूर्ति के लिए एचएसएन कोड, इनपुट सेवा, पूंजीगत वस्तुओंं की जानकारी  आदि की जरूरत होती है, जो मासिक-तिमाही रिटर्न का हिस्सा नहींं होता है। यह उद्योग के लिए चिंता का विषय है।' 
Keyword: industry, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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