बिजनेस स्टैंडर्ड - चुनावी मांग से महंगी हो रही बिजली
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चुनावी मांग से महंगी हो रही बिजली

श्रेया जय और अमृता पिल्लई / नई दिल्ली/मुंबई December 03, 2018

कोयले की आपूर्ति दुरुस्त नहीं हो पाई है और आम चुनाव अगले साल की पहली छमाही में होने की उम्मीद है। राज्य सरकारें बिजली खरीद बढ़ा रही हैं। बड़े राज्यों ने अप्रैल 2019 तक की आपूर्ति के लिए कम अवधि (3-4 महीने) के लिए 23 गीगावॉट के कॉन्ट्रैक्ट किए हैं। ऐसे मं अचानक बढ़ी मांग से बिजली के दाम बढ़ गए हैं।  महाराष्ट्र, उत्तराखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित ज्यादातर राज्यों को 6 रुपये या उससे ऊपर की बोली मिली है। बाजार के विशेषज्ञों ने संकेत दिए हैं कि सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर दबाव रहेगा, जिन पर चुनाव के मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति का दबाव है। राज्यों का कहना है कि उनकी इकाइयों को कोयला नहीं मिल रहा है और मांग बढ़ी है, जिसके कारण कम और मध्यम अवधि के सौदों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। 

 
इस मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जिसे 9 गीगावॉट बिजली के लिए 5 से 7.5 रुपये प्रति यूनिट के भाव बोली मिली है। राज्य में बिजली की अधिकतम मांग की स्थिति में 23 गीगावॉट की मांग है। अधिकारियों का कहना है कि खरीद बढ़ाने की वजह उनके ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी है। महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी (एमएसईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार ने कहा, 'संयंत्रों में कोयले की कमी की वजह से अक्टूबर महीने में हमने दीर्घावधि खरीद के माध्यम से 4 गीगावॉट बिजली खरीदी। अन्यथा हमने मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त बिजली खरीद समझौता किया है।' 
 
 राजस्थान में चुनाव हो रहे हैं, जहां 4 गीगावॉट बिजली खरीद हुई है, जबकि पश्चिम बंगाल में भी इतनी ही मात्रा में खरीद हुई है। एक अन्य चुनाव वाले राज्य छत्तीसगढ़ ने 1.5 गीगावॉट के लिए समझौता किया है। इन सबको 6 रुपये प्रति यूनिट से ऊपर की बोली मिली है। पश्चिम बंगाल में तो अधिकतम बोली 12 रुपये यूनिट की मिली है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि कम अवधि की बिजली खरीद की मांग आगे और बढ़ सकती है, क्योंकि आम चुनाव होने वाले हैं। एक दशक पहले 2009 के आम चुनाव में बिजली के हाजिर बाजार में मांग बहुत बढ़ गई थी और कीमतें दो अंकों में पहुंच गई थीं, यहां तक कि अब तक के सर्वोच्च स्तर 17 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई थीं। 
 
मांग की वजह यह होती है कि वितरण कंपनियों पर निर्बाध बिजली का दबाव होता है, जिससे कटौती से बचा जा सके और मतदाताओंं को लुभाया जा सके।  भारत में अगले साल आम चुनाव होने हैं, क्योंकि मौजूदा सरकार का कार्यकाल मई 2019 में पूरा हो रहा है।  
Keyword: power, electric, coal,,
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