बिजनेस स्टैंडर्ड - लक्ष्य के दायरे में ही रहेगा घाटा
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लक्ष्य के दायरे में ही रहेगा घाटा

अप्रैल-अक्टूबर में राजकोषीय घाटा लक्ष्य के पार पहुंचने के बावजूद सरकार ने जताया भरोसा
अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 12 02, 2018

राजकोषीय घाटे का गणित

सरकार को प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य से करीब 300 अरब रुपये अधिक होने की उम्मीद
जीएसटी प्रतिपूर्ति कानून में हालिया संशोधन से केंद्र इस मद में घटा सकता है भुगतान
अधिकारियों ने कहा, जीएसटी लक्ष्य से रह सकता है 700 अरब से 1 लाख करोड़ रुपये कम
विश्लेषकों ने कहा, राजकोषीय घाटा लक्ष्य से पार पहुंचने की आशंका

बिजनेस स्टैंडर्ड लक्ष्य के दायरे में ही रहेगा घाटाकर संग्रह में नरमी के बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार को उम्मीद है कि उसका प्रत्यक्ष कर संग्रह बजट में तय लक्ष्य से करीब 300 अरब रुपये अधिक रहेगा। सूत्रों के मुताबिक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में केंद्र की हिस्सेदारी से चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि जीएसटी संग्रह का लक्ष्य 700 अरब से 1,000 अरब रुपये कम रह सकता है और वित्त मंत्रालय को चुनाव पूर्व वर्ष में उम्मीद से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। अप्रैल-अक्टूबर में राजकोषीय घाटा 6,490 अरब रुपये पर पहुंच गया जो पूरे साल के लिए तय लक्ष्य 6,240 अरब रुपये से अधिक है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि पूंजीगत व्यय में कटौती किए बिना राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। बीते शनिवार को सरकार ने नवंबर माह के जीएसटी संग्रह का आंकड़ा जारी किया है, जो 976 अरब रुपये है जबकि केंद्र ने 1,000 अरब रुपये मासिक वसूली का लक्ष्य रखा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमें जीएसटी संग्रह में 700 अरब से 1,000 अरब रुपये की कमी रहने का खटका लग रहा है। लेकिन इस 1,000 अरब रुपये की कमी में केंद्र की हिस्सेदारी 500 अरब रुपये ही होगी। बाकी राज्यों का हिस्सा है। इसके साथ ही केंद्र के जीएसटी में से 42 फीसदी राज्यों को जाता है ऐसे में केंद्र सरकार को 290 से 300 अरब रुपये का ही नुकसान होगा।'

अधिकारी ने कहा, 'प्रत्यक्ष कर संग्रह में करीब 300 अरब रुपये से ज्यादा की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में कर संग्रह की कमी की भरपाई हो जाएगी।' इसके साथ ही राज्यों को की गई प्रतिपूर्ति के कुछ हिस्से को कानूनी रूप से वापस लेने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य जीएसटी प्र्रतिपूर्ति कानून में हाल में संशोधन किया है। इसके अनुसार प्रतिपूर्ति वाली रकम का इस्तेमाल नहीं होता है तो 50 फीसदी राशि को पांच साल के दौरान किसी भी साल केंद्र की संचयी निधि में हस्तांतरित किया जा सकता है।  

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'केंद्र सरकार प्रतिपूर्ति निधि में कमी कर सकती है और जब चाहे उसकी आधी राशि वापस ले सकती है। ऐसे में राजकोषीय कमी को पूरा करने के लिए साल के अंत में इससे कुछ रकम लेकर भरपाई की जा सकती है।' 2018-19 के लिए केंद्र के जीएसटी का लक्ष्य 7,400 अरब रुपये रखा गया है। इनमें से केंद्रीय जीएसटी मद में 6,040 अरब रुपये और आईजीएसटी में 500 अरब रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति उपकरण मद में 900 अरब रुपये शामिल हैं। प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर निगमित कर और आयकर संग्रह का लक्ष्य 11,500 अरब रुपये रखा गया है।

अक्टूबर के तीसरे हफ्ते तक के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शुद्घ प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15.7 फीसदी बढ़कर 4,890 अरब रुपये पहुंच गया है, जो पूरे साल के प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य का 42 फीसदी से अधिक है।अधिकारियों ने बताया कि विनिवेश से 800 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य भी पूरा होने का भरोसा है। एक अधिकारी ने कहा, '31 मार्च से पहले कुछ विलय एवं रणनीतिक बिक्री होने की उम्मीद है।' इनमें एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग इकाई के साथ ही साथ आरईसी द्वारा पीएफसी में सरकार की हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल है।हालांकि विशेषज्ञ एवं विश्लेषकों का मानना है कि व्यय को आगे टालने और भारतीय रिजर्व बैंक जैसे संस्थानों से अतिरिक्त अंतरिम लाभांश के बिना राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा।

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, 'जब तक अतिरिक्त पूंजीगत व्यय के कारण घाटा न बढ़े तब तक राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के पार पहुंचने को लेकर मैं चिंतित नहीं हूं। लेकिन व्यय टालकर और बकाये का भुगतान रोककर घाटे के लक्ष्य को पूरा किया गया तो सवाल उठने लाजिमी हैं।' पंत का अनुमान है कि इस साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.5 फीसदी रह सकता है।इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी के बावजूद अप्र्रैल-अक्टूबर में घाटा बढऩे से इस साल राजकोषीय घाटा के बढऩे की आशंका है।' नायर को आशंका है कि जीएसटी तथा उत्पाद शुल्क संग्रह सहित अप्रत्यक्ष कर संग्रह में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि विनिवेश ही नहीं बल्कि गैर-कर राजस्व स्रोतों जैसे कि लाभांश एवं दूरंसचार राजस्व में भी कमी की आशंका है।खबरों के मुताबिक केंद्र इस साल बजटीय लक्ष्य 2,440 अरब रुपये से 450 अरब रुपये ज्यादा खर्च कर सकती है। 
Keyword: GDP, fiscal deficit, dollar, bond, राजकोषीय घाटा जीडीपी,
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