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आसान नहीं है किराये को कारोबारी आमदनी बताना

तिनेश भसीन /  December 02, 2018

करदाताओं और आयकर अधिकारियों के बीच विवाद का एक मुख्य बिंदु यह है कि प्रॉपर्टी से प्राप्त किराये को किस मद में माना जाना चाहिए। करदाता ऐसे किराये को कारोबारी आय के रूप में दिखाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे उन्हें मूल्यहृास, खर्चों की ज्यादा कटौती का लाभ मिलता है। मालिक को उस समय कोई अनुमानित किराया नहीं देना पड़ता, जब प्रॉपर्टी किराये पर नहीं चल रही होती है। इससे राजस्व का नुकसान होता है, इसलिए आयकर विभाग यह देखने के लिए हर मामले की गहराई से जांच करता है कि करदाता को कारोबारी आय के रूप में किराये का दावा करने की मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं। इन विवादों का मुख्य कारण यह है कि आयकर अधिनियम इस बारे में कोई सुनिश्चित जवाब नहीं देता है कि किसी प्रॉपर्टी से प्राप्त होने वाले किराये को किस मद में माना जाना चाहिए। इसलिए यह प्रत्येक मामले में परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव ने कहा, 'अदालतों ने फैसला दिया है कि किराये से आमदनी का वर्गीकरण इस बात पर निर्भर करता है कि क्या किराया आमदनी के लिए प्रॉपर्टी को किराये पर दिया गया है या मालिक इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहा है।'

 
आयकर अपील न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के दिल्ली पीठ ने अपने एक हालिया फैसले में कहा कि गोदाम को लीज पर देने से प्राप्त होने वाली आय को मकान संपत्ति से प्राप्त होने वाली आय की मद में माना जाना चाहिए, न कि कारोबार या पेशे से प्राप्त होने वाली आय के मद में। अगर करार का मुख्य उद्देश्य किराया आमदनी हासिल करना है तो मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) के प्रावधान भी कोई मायने नहीं रखते हैं। गोदाम एवं परिवहन और सामान ढुलाई के कारोबार से जुड़ी एक कंपनी ने एक गोदाम खरीदा, जो पहले से ही किराये पर चल रहा था। करदाता ने किराया आमदनी को कारोबारी आय के रूप में दिखाया और खर्चों का वित्त लागत, मूल्यहृास और अन्य खर्चों की मद में दावा किया। लेकिन आकलन के दौरान कर अधिकारी ने लीज दस्तावेज के विभिन्न प्रावधानों पर विचार किया और यह पाया कि इसका मुख्य उद्देश्य किराया आमदनी हासिल करना है। अधिकारी ने करदाता के कारोबारी खर्च के दावों को खारिज कर दिया। 
 
आयकर आयुक्त (अपील) ने अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद यह मामला दिल्ली आईटीएटी में गया। करदाता ने कहा कि उसका मुख्य कारोबार गोदाम है और मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में इसका स्पष्ट जिक्र किया गया है। लेकिन न्यायाधिकरण ने भी पिछला आदेश बरकरार रखा। पीडब्ल्यूसी के एक नोट में कहा गया है, 'न्यायाधिकरण ने पाया कि यह गोदाम पहले से किराये पर था और इसे खरीदने के बाद भी गोदाम का उपयोग और भुगतान पूर्ववत बना रहा। इस तरह लेनदेन की प्रकृति या गोदाम से प्राप्त आय (स्वामित्व में बदलाव के बाद) पहले के समान बनी रही।'
 
अगर आप किसी व्यक्ति या कंपनी के रूप में कोई संपत्ति किराये पर देते हैं तो ज्यादातर मामलों में आपको इससे प्राप्त किराये का उल्लेख आयकर रिटर्न फॉर्म में 'मकान संपत्ति से आय' के वर्ग में करना होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह घर (आवासीय) या कार्यालय (व्यावसायिक) है। टैक्समैन डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा ने कहा, 'किराये को कब कारोबारी आय के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, यह हर मामले पर निर्भर करता है। हालांकि कुछ ऐसे दिशानिर्देश हैं, जो एक करदाता के लिए किराये को कारोबारी आमदनी मानने या न मानने का फैसला लेने में मदद कर सकते हैं।'
 
किराया आमदनी उस स्थिति में कारोबारी आय हो सकती है, जब व्यवसाय और उसकी संपत्तियों को चालू हालत में लीज पर दे दिया जाता है या संपत्तियों को फर्नीचर एवं फिटिंग और अन्य संबंधित ढांचे सहित लीज पर दिया जाता है या संपत्तियों को लीज पर देने के साथ ही लिफ्ट, सुरक्षा, मशीनरी, कैंटीन, सफाई जैसी अन्य बहुत सी सेवाएं नियमित रूप से मुहैया कराई जाती हैं। 
Keyword: home rent, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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