बिजनेस स्टैंडर्ड - बेचनी है पुरानी कार तो इन बातों पर करें विचार
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बेचनी है पुरानी कार तो इन बातों पर करें विचार

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  12 02, 2018

कार बाजार

उम्दा कीमत चाहिए तो खुद ही बेचने की कोशिश करें। अगर झंझट नहीं चाहिए तो पुरानी कारें बेचने वाले डीलर या कंपनी के पास पहुंच जाएं

बिजनेस स्टैंडर्ड बेचनी है पुरानी कार तो इन बातों पर करें विचारराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हवा की गुणवत्ता बुरी तरह से बिगड़ गई है, जिसके कारण उच्चतम न्यायालय ने 29 अक्टूबर को आदेश दिया कि 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन तथा 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहन जब्त कर लिए जाएं। अगर आपके पास भी कोई पुरानी कार पड़ी हुई है और वह अदालत द्वारा तय की गई सीमा से भी अधिक पुरानी है तो आपको उससे पल्ला छुड़ाने की तरकीब पर सोचना पड़ेगा। आपको देखना पड़ेगा कि उस कार को बेचने का कौन सा रास्ता आपको अच्छी से अच्छी कीमत दिलाएगा। आइए हम आपकी मदद करते हैं।

कीमत का चक्कर

चूंकि प्रदूषण करने वाले वाहनों का मुद्दा काफी दिनों से चर्चा में है, इसलिए पुरानी कारों की कीमतें भी लगातार कम हो रही हैं। पेट्रोल कारों के मुकाबले डीजल से चलने वाली कारों की कीमत पर ज्यादा चोट पड़ी है क्योंकि बाजार में उनकी आवक बहुत ज्यादा है। कार्स24 के सह-संस्थापक और उपाध्यक्ष गजेंद्र जांगिड़ बताते हैं, 'अक्टूबर में अंत में यह फैसला आने के बाद डीजल वाहनों की कीमत में करीब 10 फीसदी गिरावट देखी गई है और पेट्रोल वाहनों के दाम 5 फीसदी गिरे हैं।' आने वाले दिनों में कीमतें और भी कम होंगी। टीम-बीएचपी डॉट कॉम के रुष पारेख का कहना है, 'जिन वाहनों को अदालत द्वारा तय की गई उम्र तक पहुंचने में अभी दो साल लगेंगे, उनकी भी रीसेल कीमत में कमी आई है।'

अगर आपके पास सात या आठ साल पुरानी डीजल कार है तो उसे बेचने से पहले छह महीने या साल भर इंतजार करना अच्छा रहेगा। ट्रूबिल के सह-संस्थापक शुभ बंसल आगाह करते हैं, 'डीजल आपसे कह सकते हैं कि कीमतें गिर रही हैं। लेकिन कुछ महीनों में ही कीमतें ठहर जाएंगी। सात-आठ साल पुरानी कार आम तौर पर अच्छी हालत में होती हैं। इसलिए घबराहट में औने-पौने दाम पर उन्हें बेचना ठीक नहीं है।' अगर आपकी कार पर भी उच्चतम न्यायालय के फैसले की चोट पड़ी है तो उसे दिल्ली-एनसीआर से बाहर बेचना आपके लिए अच्छा हो सकता है। पारेख कहते हैं, 'भारत बहुत बड़ा देश है, जहां कारों की संख्या बहुत कम है। यहां 1,000 नागरिकों पर केवल 40 कार हैं। इसीलिए आसपास के राज्यों या उनसे भी आगे जाने पर सस्ती कारों के लिए बहुत बड़ा बाजार मिल जाता है।' पुरानी कारों के बाजार में छोटी कारों या मल्टी-यूटिलिटी व्हीकल की मांग दूसरी गाडिय़ों के मुकाबले ज्यादा ही रहती है।

कबाड़ में बेचें पुरानी कार

अगर आपकी कार उच्चतम न्यायालय के आदेश में तय सीमा से भी अधिक पुरानी है तो उसे कबाड़ में बेचना ही सबसे अच्छा विकल्प है क्योंकि उससे अधिक कीमत देने वाला ग्राहक मिलना आसान नहीं होगा। कारदेखो जैसे कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रिटेल बाजार के लिए इस तरह की सेवा शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं। कारदेखो में यूज्ड कार कारोबार के मुख्य कार्य अधिकारी रजत साहनी की सलाह है, 'कार को कबाड़ में बेचते समय इस बात का ध्यान रखें कि डीलर से आपको कबाड़ यानी स्क्रैप सर्टिफिकेट मिल जाए। साथ ही वे पुर्जे भी ले लीजिए, जिन पर इंजन और शैसि नंबर लिखा है। उन पुर्जों को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में जमा कर दीजिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि आपकी कार का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।'

कीमत का अंदाजा लीजिए

अपनी कार बेचने से पहले पूरी तैयारी कर लीजिए और पता लगाइए कि आपकी कार की कितनी कीमत मिल सकती है। इसके लिए ऑनलाइन जांच-पड़ताल करना सबसे अच्छा रहता है। पारेख बताते हैं, 'कमोबेश सभी ऑटोमोटिव वेबसाइट पर पुरानी कार की कीमत जांचने की सुविधा रहती है। उसके जरिये आपको पता चल जाएगा कि आपकी कार की करीब कितनी कीमत मिल सकती है। साथ ही यह भी देखिए कि ऑनलाइन वर्गीकृत विज्ञापनों में आपकी कार जितने पुराने मॉडलों की क्या कीमत मांगी गई है।'

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से कीमत का सही अंदाजा नहीं मिलता है। जांगिड़ का कहना है, 'विज्ञापन वाली साइट पर वही कीमत दी होती है, जो गाड़ी बेचने वाला चाहता है। यह कीमत आम तौर पर ज्यादा होती है और उसे असल में कम कीमत मिलती है।' कभी-कभी गाड़ी बेचने वाला बीमा के कागज देखता है और बीमा में घोषित कीमत (आईडीवी) को ही अपनी कार की असली कीमत माल लेता है। यह भी सही नहीं है क्योंकि आईडीवी तय करते समय यह नहीं देखा जाता कि कार कितने किलोमीटर चल चुकी है, उसमें अभी तक कितनी बार खराबी या नुकसान हो चुका है और कितनी बार उसकी मरम्मत हो चुकी है। बाजार मूल्य तय करते समय इन सब पहलुओं को भी देखा जाता है। सबसे अच्छा यही रहेगा कि कई स्रोतों से बात कर कीमत का अनुमान लगाएं और उसके बाद खरीदार के साथ मोलभाव शुरू करें।

खुद बेचें या किसी की मदद लें?

इसके बाद सवाल आता है कि आपको कार खुद ही बेचने की कोशिश करनी चाहिए या किसी ऐसी एजेंसी के मार्फत बेचना चाहिए, जो पुरानी कारों की खरीदफरोख्त करती हो। इसका जवाब इस सवाल से मिलेगा कि आपको क्या चाहिए - कीमत या सुविधा? पारेख समझाते हैं, 'अगर आप अपनी कार खुद बेचते हैं तो आपको सबसे अच्छी कीमत मिलेगी। लेकिन उसमें आपको मेहनत भी करनी पड़ेगी और वक्त भी लगेगा। दूसरी ओर अगर आप इन सबसे बचकर सहूलियत के साथ कार बेचना चाहते हैं तो अपनी कार उस डीलर को ही बेच दीजिए, जिससे आप नई कार लेने जा रहे हैं। आप पुरानी कारों का कारोबार करने वाली संगठित क्षेत्र की कंपनियों मसलन ट्रू वैल्यू, महिंद्रा फस्र्ट चॉइस, कार्स 24 आदि के पास भी अपनी कार बेच सकते हैं।' लेकिन इन सब तरीकों में कुछ न कुछ खामी है। खुद कार बेचेंगे तो आपको कई अजनबियों से बात करनी पड़ सकती है। आपकी रकम फंस भी सकती है। हो सकता है कि पूरी रकम एक बार में आपको न मिल पाए। हो सकता है कि कुछ रकम चेक आदि के जरिये मिले और बाकी आपको नकद ही लेनी पड़े। गाड़ी के कागजों में मालिक का नाम बदलवाने का झंझट भी आपके मत्थे पड़ेगा।

कई लोग अपनी गाड़ी उस डीलर को दे देते हैं, जिससे वे नई कार खरीदने जा रहे हैं। इसमें भी जोखिम है। डीलर आपको पुरानी कार का तो अच्छा दाम दे देगा, लेकिन हो सकता है कि नई कार पर मिलने वाली छूट कम कर दी जाए। सबसे अच्छा यही होगा कि पुरानी कार एक डीलर को बेचिए और नई कार दूसरे से खरीदिए। लेकिन साहनी कहते हैं, 'अगर कार कंपनी ही एक्सचेंज डिस्काउंट दे रही हो तो उसे लपक लीजिए। अगर आप एक्सचेंज डिस्काउंट और कार की कीमत को जोड़ लेंगे तो पुरानी कार की कीमत ज्यादा ही पड़ेगी।' महिंद्रा फस्र्ट चॉइस और ट्रू वैल्यू ऐसी कीमत लगाती हैं, जिस पर आप उन्हें सीधे कार बेच सकते हैं। कार्स 24 जैसी कंपनियां कीमत लगाने के बाद सेवा शुल्क भी वसूलती हैं, जो 1,000 से 5,000 रुपये तक होता है। 

बेचने से पहले चमका लें गाड़ी

आपको अपनी कार की मरम्मत और सर्विस आदि अधिकृत डीलरशिप पर ही करानी चाहिए और उसके बिल आदि भी अपने पास रखने चाहिए। इससे आपको बेहतर कीमत मिल सकती है। गाड़ी के सभी दस्तावेज जैसे रजिस्ट्रेशन के कागज (आरसी) आपके पास होने चाहिए। अंत में ध्यान रखें कि कार अच्छी दिख रही हो। गाड़ी की मरम्मत करा लें। छोटा-मोटा खर्च करने पर गाड़ी बेहतर लग रही हो तो खर्च कर दीजिए क्योंकि पहली झलक आपको बेहतर कीमत दिलाती है। लेकिन बंसल की सलाह है, 'नए टायर लगाने या कार पर पेंट कराने के झंझट से बचें। कार खरीदने वाला यह सब नहीं देखता और न ही इससे कीमत बढ़ती है, इसलिए आपका खर्च बेकार हो जाएगा।'
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel,,
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