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'न्यायाधीशों की नियुक्ति में इरादतन देरी करना न्याय कार्य में हस्तक्षेप'

आशीष आर्यन / नई दिल्ली November 30, 2018

केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने आज कहा कि केंद्र की ओर से उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति में जान बूझकर देरी करना न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप करने जैसा है।  न्यायमूर्ति कुरियन ने अपने आवास पर कहा, 'नियुक्तियों और चयन के मामलों को जिस तरह से जान बूझकर लटकाया और अटकाया गया वह न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप करने का एक तरीका है। आप उन मामलों को देख लीजिए जिन्हें कॉलेजियम ने चुना था और सरकार के पास विचार के लिए भेजा था। कोई व्यक्ति जो वरिष्ठïता के क्रम में पदोन्नति किए जाने योग्य है, यदि उसमें हस्तक्षेप किया जाता है तो यह न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप करने जैसा है।' न्यायमूर्ति के एम जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने के मामले में देरी किया जाना इसका एक उदाहरण है, लेकिन यह केवल इकलौता मामला नहीं है। न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा कि सरकार की ओर से यही रवैया उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में भी दिखाया गया था। 
 
कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नाम की अनुशंसा सबसे पहले 10 जनवरी को की थी, अंतत: उन्हें अगस्त में सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया, उसको लेकर भी सरकार पूरी तरह से संतुष्टï नहीं थी। चयन और पदोन्नति में देरी के अलावा न्यायमूर्ति कुरियन ने सरकार को इस बात पर भी आड़े हाथों लिया कि वह उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया के ज्ञापन (एमओपी) पर विचार करने में भी बेवजह का विलंब करती है।  न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा, 'जहां तक एमओपी का सवाल है, सर्वोच्च न्यायालय का मानना है कि यह निर्णीत है क्योंकि उसने इसकी मंजूरी दे दी है। जबकि सरकार इस पर लगातार कह रही है कि यह अंतिम नहीं है क्योंकि हम सर्वोच्च न्यायालय से कुछ और आने का इंतजार कर रहे हैं। कॉलेजियम केवल एमओपी के ताजे मसौदे पर काम कर रहा है। मुझे आश्चर्य होता है कि सरकार ऐसा क्यों कह रही है कि यह अंतिम नहीं है। 
 
आज के अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने यह भी कहा कि उन्हें 12 जनवरी की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कोई खेद नहीं है जिसमें उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के तीन सेवारत न्यायाधीशों के साथ खुलेआम भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के खिलाफ विद्रोह किया था।
Keyword: supreme court, high court, justice,,
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