बिजनेस स्टैंडर्ड - कोरे आश्वासन से परेशान
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कोरे आश्वासन से परेशान

अर्चिस मोहन और संजीव मुखर्जी /  11 29, 2018

परेशान किसान

बिजनेस स्टैंडर्ड कोरे आश्वासन से परेशानराज्य सरकारें किसानों को कर्ज माफी और बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद के लिए आश्वस्त करने का प्रयास कर रही हैं, इसके बावजूद पिछले दो सालों में अनेक राज्यों में किसानों के अंदर भरा गुस्सा और निराशा धरना-प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान किसानों की समस्याएं बड़ा भावनात्मक मुद्दा बनी हुई हैं। इन राज्यों का दौरा करने से पता चलता है कि क्यों कर्जमाफी (अगर दिया जाता है तो) केवल अस्थायी समाधान है और कृषि क्षेत्र में बहुत सी समस्याएं मौजूद हैं। 

राजस्थान के चुरू जिले के किसान उम्मेद चौधरी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के खराब कार्यान्वयन के बारे में शिकायत करते हैं। यह जिला मौसम की खराब परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। चौधरी कहते हैं, 'पहले अगर तापमान शून्य डिग्री से नीचे चला जाता था तो फसल खराब होने पर मुझे मुआवजा मिल जाता था। अब बीमा कंपनियों का कहना है कि तापमान के माइनस 2.7 डिग्री से नीचे जाने पर ही मुआवजा मिलेगा। जबकि तापमान के शून्य डिग्री से नीचे जाने पर ही फसलें खराब हो जाती हैं।'

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के देवरी गांव के घनश्याम दंडोतिया का कहना है कि बीज और उर्वरक खरीदने के लिए स्थानीय कृषि सहकारी सोसाइटी से लिए गए कर्ज का समय से भुगतान करने पर मिलने वाली 10 प्रतिशत की छूट नहीं मिल रही। दंडोतिया समय से किस्तों का भुगतान करते रहे हैं लेकिन 2015-16 के बाद उन्हें यह छूट नहीं मिली। 

इन दोनों राज्यों के लाखों किसानों के सामने घुमंतू जानवर एक बड़ी समस्या हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। किसान शिकायत करते हैं कि कैसे सरकारी सहायता से चल रही गौशालाएं या गाय आश्रय स्थलों से रात्रि के समय पास के खेतों में खड़ी फसल खाने के लिए गायें खोल दी जाती हैं। बीकानेर जिले के नोखा में रहने वाले किसान अशोक सिहाग सरकार द्वारा बढ़े हुए एमएसपी पर बाजरा, उड़द और मूंग दाल खरीदने के बारे में पूछने पर हंसते हैं। वह कहते हैं, 'बाजरा 1,100-1,200 रुपये क्विंटल पर बेचा जा रहा है जबकि इसका एमएसपी 1,900 रुपये है। उड़द और मूंग का भी यही हाल है।'

मध्य प्रदेश में 5 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और इस बार मतदान के दौरान उनके दिमाग पर कृषि उत्पादों की गिरती कीमतें, ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी की कमी और कृषि संकट जैसी बातों का प्रभाव रहा। जब राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होगा तो वहां के किसानों की मनोदशा भी कुछ इसी तरह की होगी। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार ने भावांतर भुगतान योजना, गेहूं पर बोनस और खाद्यान्न की सीधी खरीद से किसानों को संतुष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और खराब कार्यान्वयन से उन्हें लाभ मिलने में कठिनाई हुई। 

पड़ोसी राज्य राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने किसानों के प्रदर्शन के बाद 29.3 लाख किसानों का सहकारी बैंकों से लिया गया 50,000 रुपये तक का कर्ज माफ कर दिया। इस कर्ज राशि की कुल कीमत 84 अरब रुपये है। सरकार का दावा है कि उसने 4,33,000 किसानों से एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 50 अरब रुपये और किसानों को मुहैया कराए जाने वाले बिजली अनुदान पर 330 अरब रुपये खर्च किए हैं। हालांकि कई बार केवल बहुत कम किसानों को कर्ज माफी देना, पानी की समस्या और फसल खरीदने में एमएसपी को नजरअंदाज करने जैसी शिकायतें लगातार आ रही हैं। 

राजस्थान और मध्य प्रदेश, दोनों मुख्य रूप से ग्रमीण राज्य हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश की 7 करोड़ जनसंख्या में से 29 प्रतिशत ही शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। इसी तरह, राजस्थान की 6.8 करोड़ आबादी में से 25 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में रहती है। किसानों के बीच जागरूकता के चलते अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) की अगुआई में किसान देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं। ऑल इंडिया किसान सभा के उपाध्यक्ष अमरा राम कहते हैं, 'हालिया भाजपा सरकार ने फसल बीमा योजना के नाम पर निजी बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाया है और किसान बढ़ाए गए एमएसपी के वादे की असलियत भी जानते हैं।' स्वराज अभियान और किसान सभा, दोनों ही एआईकेएससीसी के प्रमुख अंग हैं। इस समय किसान जातियों में बंटने के बजाय एक अलग वर्ग की तरह अपने अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। 

दिल्ली में उमड़ा किसानों का बड़ा हुजूम

किसानों को कर्जमाफी और फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को लेकर देश भर से किसान दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे। किसान गुरुवार को रामलीला मैदान और शुक्रवार को संसद मार्ग तक मार्च करेंगे। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसान ट्रेनों, बसों एवं अन्य माध्यमों से दिल्ली आए। तमिलनाडु के किसान समूह ने कहा है कि अगर उन्हें शुक्रवार को संसद भवन नहीं जाने दिया गया तो वो नग्न होकर मार्च करेंगे। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार की रैली के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं। फरीदाबाद से होते हुए रामलीला मैदान पहुंच रही किसान मुक्ति यात्रा की अगुआई सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और पी साईनाथ ने की। साईनाथ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को राफेल घोटाले से बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ कॉरपोरेट जगत के हितों के लिए काम कर रही है। भाषा

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