बिजनेस स्टैंडर्ड - 'बहुत बेरहम थी नोटबंदी'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 16, 2018 05:27 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

'बहुत बेरहम थी नोटबंदी'

ईशान बख्शी / नई दिल्ली 11 29, 2018

सुब्रमण्यन ने नई किताब में उठाए कई सवाल

सुब्रमण्यन ने लिखा है कि नोटबंदी व्यापक, विध्वंसकारी मौद्रिक झटका
नोटबंदी के बाद वृद्धि दर पर बड़ा असर न पडऩे और 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा की जीत को बताया पहेली
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि नोटबंदी का अनौपचारिक क्षेत्र के कारोबार पर पड़ा व्यापक असर
अधिकार देने के बारे में रिजर्व बैंक का किया समर्थन, पीसीए को बताया सही फैसला

बिजनेस स्टैंडर्ड मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद से इस्तीफे की घोषणा के कुछ महीने बाद अरविंद सुब्रमण्यन ने अब नोटबंदी जैसे विवादास्पद मसलों के बारे में खुलकर राय दी  है। उन्होंने अपनी नई किताब में लिखा है, 'नोटबंदी व्यापक, विध्वंसकारी मौद्रिक झटका था। यह एक अप्रत्याशित कदम था और हाल फिलहाल के इतिहास में किसी भी देश ने सामान्य स्थिति में इस तरह के  कदम नहीं उठाए हैं।' 

सुब्रमण्यन ने लिखा है कि 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट प्रचलन से बाहर करने की वजह से आर्थिक गतिविधियां मंद पड़ गईं। नोटबंदी के बाद 7 तिमाहियों में औसत वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रह गई, जबकि इसके पहले की 6 तिमाहियों का औसत 8 प्रतिशत था। इस कदम का अनौपचारिक क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ा, जिसको लेकर दो पहेलियां हैं। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि पहला तो वृद्धि पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और दूसरे इस कदम के बाद 2017 में उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा की जीत हुई।

नोटबंदी के अलावा सुब्रमण्यन ने कई अन्य मसलों पर भी लिखा है, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया जाना, दोहरे बैलेंस शीट की समस्या, कृषि क्षेत्र में संकट शामिल है। उनकी नई किताब 'आफ काउंसिल: द चैलेंजेज आफ द मोदी-जेटली इकनॉमी' पेंगुइन ने प्रकाशित की है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक में चल रही खींचतान पर भी प्रकाश डाला है। सुब्रमण्यन, जिन्हें केंद्र सरकार से रिजïर्व बैंक में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव था, ने लिखा है कि केंद्रीय बैंक के पास 4.5 से 7 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी है। सुब्रमण्यन का तर्क है कि इसका इस्तेमला सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों के पूंजीकरण में किया जा सकता है। 

पिछले कुछ साल से बढ़ती हुई गैर निष्पादित परिसंपत्तियों के बारे में सुब्रमण्यन ने लिखा है कि 'रिजर्व बैंक को भी जानकारी थी कि 2010 की शुरुआत से यह समस्या बढऩी शुरू हुई।' उन्होंने कहा, 'विस्तार और बहाना, पुनर्भुगतान टालने आदि जैसे रिजर्व बैंक के कदमों से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई।' उन्होंने नीरव मोदी की लंबे समय से चल रही धोखाधड़ी को न पकड़ पाने या कर्ज भुगतान समस्याओं पर गंभीरता न होने के लिए रिजर्व बैंक को घेरा है और कहा है कि 'बेहतर छवि होने का मतलब हमेशा सही नहीं होता।'

वहीं त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) और सरकारी बैंकों को लेकर रिजर्व बैंक के अधिकार के मामले में उन्होंने रिजर्व बैंक का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा है कि त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) प्रक्रिया के को लेकर 'सत्यनिष्ठा बरकरार रखने के लिए रिजर्व बैंक को श्रेय दिया जाना चाहिए', जबकि सरकार की ओर से इसे कमजोर करने का दबाव था। उन्होंने कहा है कि जब भटके हुए सरकारी बैंकों के साथ निपटना हो तो रिजर्व बैंक को अतिरिक्त शक्तियों की जरूरत होती है, जिससे वह बैंकों को अर्थपूर्ण स्वीकृति दे सके। उदाहरण के लिए रिजर्व बैंक बोर्ड के सदस्यों को हटाने, बोर्ड की बैठक बुलाने या सरकारी बैंकों के बोर्ड को नजरंदाज करने का अधिकार होना चाहिए, जैसा कि वह निजी क्षेत्र के बैंकों के मामले में कर सकता है। 

सुब्रमण्यन का मानना है कि एनपीए को लेकर शुरुआती वर्षों में सरकार का सतर्क दृष्टिकोण कई वजहों से था। जब आर्थिक वृद्धि तेज थी, तो यह माना गया कि समस्या खुद हल हो जाएगी। यह सवाल भी आया कि अगर वृद्धि बहुत अच्छी रहती है तो यह समस्या कितनी गंभीर हो सकती है? कमोबेश वित्तीय समेकन में सरकार ने माना कि उसे अंतर पाटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसके साथ 'सूट बूट की सरकार' के आरोप से समस्या और जटिल हो गई।

Keyword: Chief Economic Advisor, Arvind Subramanay, Demonetisation, Monetary Setback, Currency, BJP, Election, GST,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राफेल सौदे पर अब थम जाएगा विवाद?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.