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छत्तीसगढ़ में धान की फसल बिक्री रोक रहे किसान

आर कृष्णा दास /  November 28, 2018

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के चेचेडा गांव के एक मझोले किसान भगवती वर्मा नवंबर के पहले सप्ताह में पिक-अप वैन पर अपनी धान की बोरियां लादते समय काफी व्यथित थे। वह धान की उन बोरियों को गांव के ही सहकारी समिति केंद्र तक ले जा रहे थे जहां उन्हें उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा। 

अपनी उपज को सहकारी समिति केंद्र तक ले जाना 40 वर्षीय वर्मा सहित छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आमतौर पर जश्न का समय होता है लेकिन किसान इस बार मायूस दिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जो धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करता है। वर्मा ने कहा, 'लेकिन इस साल सुखद स्थिति नहीं है।' उन्होंने कहा कि धान की उपज को करीब एक महीने तक रोकने से बेहतर मूल्य मिल सकता है लेकिन उन्हें अपनी बीमार मां के लिए पैसों की सख्त जरूरत होने के कारण उपज बेचनी पड़ रही है।

कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि राज्य में उसकी सरकार बनने पर किसानों का ऋण माफ कर दिया जाएगा और उन्हें 2,500 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। राज्य में पिछले 15 वर्षों से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता संभाल रही है और उसे उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस ने इन वादों के साथ किसानों को आकर्षित करने की कोशिश की है। राज्य में 12 नवंबर को पहले चरण के मतदान से ठीक दो दिन पहले की गई इस घोषणा को कांग्रेस पार्टी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद बड़ी तादाद में किसान अपनी फसल का भंडारण कर रहे हैं। धान की खरीद के लिए राज्य में कुल मिलाकर 1998 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। लेकिन अधिकतर केंद्र खाली पड़े हैं। छत्तीसगढ़ के किसान एक-ग्रेड के धान के लिए प्रति क्विंटल 2,070 रुपये हासिल करने के लिए पात्र हैं। जबकि सामान्य ग्रेड के धान के लिए उन्हें 2,050 रुपये प्रति क्विंटर मूल्य मिलेगा।

इस मूल्य में 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी शामिल है जिसकी घोषणा भाजपा सरकार ने राज्य के 15 लाख पंजीकृत किसानों को लुभाने के लिए की थी। राज्य में कुल करीब 32 लाख किसान हैं। खरीफ विपणन सत्र 2018-19 के लिए 75 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।

इस साल बंपर फसल और राज्य सरकार द्वारा बोनस दिए जाने के बावजूद किसान अपनी उपज की बिक्री से परहेज कर रहे हैं। हालांकि समितियों ने 13 लाख टन धान की खरीद होने की उम्मीद जताई थी लेकिन अब तक खरीद केंद्रों तक महज 5.49 लाख टन धान ही पहुंचे हैं। जबकि अधिकतर क्षेत्रों में फसल की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है।

वर्मा ने कहा, 'मुझे पैसों की जरूरत थी इसलिए मैंने धान बेच दिया लेकिन गांव के अधितर किसान इससे परहेज कर रहे हैं।' सरकारी खरीद केंद्रों पर धान की बिक्री करने वाले किसानों की संख्या सीमित है और वे मजबूरी के कारण वहां बिक्री कर रहे हैं। कबीरधाम जिले के एक किसान रामू चंद्रवंशी ने कहा, 'कई किसानों ने निजी ऋणदाताओं से कर्ज ले रखा है और उन्हें जल्द से जल्द चुकाना है।'

उन्होंने कहा कि इसलिए वे मजबूरी के कारण अपनी उपज बेच रहे हैं। अधिक एमएसपी हासिल करने के अलावा किसान सरकारी समितियों में धान बेचने से परहेज भी कर रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने महज 10 दिनों में ऋण माफ करने का वादा किया है। चंद्रवंशी ने कहा, 'यदि धान की बिक्री हुई तो समिति बीज और उर्वरक के लिए आवंटित ऋण की रकम में से उसे घटा देगी।' चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि ऋण माफ होने के बाद किसान पूरी रकम के लिए पात्र हो जाएंगे। यदि किसानों द्वारा धान की बिक्री न करने को चुनावी संकेत माना जाय तो कांग्रेस के लिए यह एक शुभ संकेत है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस मुद्दे से पार्टी को सत्ताधारी भाजपा के मुकाबले बढ़त मिल सकती है जो आगामी 2018 चुनाव परिणामों के लिए काफी महत्त्वपूर्ण होगा। भाजपा को भी इसका आभास है और इसलिए वह पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी ने कर्नाटक को भी इस विवाद में घसीट लिया और कांग्रेस पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, 'चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र का मामूली प्रभाव रहा और किसान यह भलीभांति जानते हैं कि भाजपा उन्हें धान के लिए 2,600 से 2,700 रुपये का एमएसपी देगी।'

छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रमुख भूपेश बघेल ने इसका खंडन किया और कहा कि पार्टी यह चुनाव किसान मुद्दे पर लड़ी है और उसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले एक पत्र वायरल हो गया था जिसमें कांग्रस ने रेखांकित किया था कि ऋण माफी से किसे फायदा होगा। उसमें कहा गया था कि दो एकड़ कम खेती वाले किसान इसके लाभार्थी होंगे। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि वह पत्र नकली है और उसने चुनाव पैनल में इसकी शिकायत की है।

बघेल ने कहा, 'हम कांग्रेस पार्टी के पत्र का दुरुपयोग करने और उसका मसौदा तैयार करने के लिए भाजपा के लिए काम करने वाली एक एजेंसी के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी कर रहे हैं।'
Keyword: Chhattisgarh, Farmer, Paddy, MSP, State, Yield, Crop, Election, BJP, Congress,
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