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दिवाला कानून में संशोधन कर आईबीबीआई को अधिकार देने पर विचार

वीणा मणि / नई दिल्ली November 28, 2018

कंपनी मामलों का मंत्रालय (एमसीए) भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) को ज्यादा शक्तियां देने की योजना बना रहा है। इसका मसकद राष्ट्रीय कंपनी  कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मंजूरी के बाद के दिवाला मामलों के बाद भी लेन देन की अनियमितता पर नजर रखने का अधिकार देना है। एमसीए से जुड़े सूत्रों ने कहा कि इस मकसद से दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के नियमों में भी संशोधन किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा, 'आईबीबीआई को किसी शिकायत को तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाने तक के लिए शक्तियां मिल सकती हैं।' अगर शिकायत सही पाई जाती है तो आईबीबीआई अपराध करने वाले को दंडित करने में सक्षम होगा। 

इस समय आईबीबीआई को उन पेशेवरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है, जो समाधान प्रक्रिया शुरू होने तीन दिन के भीतर संबंधित पक्ष से अपने संबंधोंं की घोषणा नहीं करते हैं। 

अंतरिम पेशेवर (आईपी) को यह खुलासा करना होता है कि क्या वह या उसके परिवार का सदस्य कर्ज लेने वाले का शेयरधारक या निदेशक है या नहीं।  कर्ज देने वालों की समिति गठित होने के बाद उसे कर्जदाता के साथ संबंधों का भी खुलासा करना होता है। 

हाल के दिनों में गलत आचरण के कारण आईडीबीआई ने तमाम दिवाला पेशेवरों के लाइसेंस रद्द किए हैं और उन्हें दंडित किया है। आईबीसी की धारा 219 और 220 के मुताबिक आईबीबीआई गलत करने वाले पेशेवरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। वह अनुशासन समिति का गठन कर सकता है, जो जांच रिपोर्ट पर विचार करे। बहरहाल यह प्रक्रियाएं एनसीएलटी से समाधान योजना को मंजूरी मिलने के पहले क रनी होती है। 

सूत्रों ने कहा कि अगर आईबीसी में संशोधन होता है तो एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अनियमितता के मामले में दंडात्मक कार्रवाई के सिलसिले में बने नियम में विसंगतियां खत्म हो जाएंगी। सूत्रों ने कहा कि संशोधन होने के बाद आईबीबीआई स्वत: संज्ञान में लेकर या शिकायत पर मामले को खोल सके गा और दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा। 

दिवाला विशेषज्ञों के मुताबिक आईबीबीआई, आईबीसी के माध्यम से काम करता है, ऐसे मेंं पहला प्राधिकारी आईबीबीआई है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह संशोधन होता है तो अंतिम विकल्प एनसीएलटी में जाने का रहेगा। 

बहरहाल आईबीबीआई ने एनसीएलटी द्वारा समाधान योजना पेश किए जाने के बाद कोई मामला अपने हाथ नहीं लिया है। एनसीएलटी के आदेश के बाद पक्षकार राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील न्यायाधिकरण (एसीएलएटी) या उच्चतम न्यायालय में जा सकती हैं। 
Keyword: NCLT, IBBI, IBC, Resolution Scheme, MCA,
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