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ट्रांजिशनल क्रेडिट न दिए जाने के मामले में याचिका

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली November 28, 2018

दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके मुताबिक अप्रत्यक्ष कर लागू होने के 90 दिन बाद दावा करने पर करदाता को ट्रांजिशनल क्रेडिट दिए जाने से इनकार किया गया है। याचिका में कहा गया है कि क्रेडिट करदाता का हक है और सरकार उसे समय सीमा में बांधकर उसके दावे को खारिज नहीं कर सकती है।

खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर और याची के वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'पहले की श्रेणी में समय से रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता का अधिकार है कि वह क्रेडिट ले। न्यायालय इस पर फैसला करेगा कि क्या नियमों में तय समसीमा की वजह से लाभ से वंचित किया जा सकता है या नहीं।'  

तकनीकी खामियां होने के कारण न्यायालयों ने पहले ही ट्रांजिशनल क्रेडिट का दावा करने की समय सीमा बढ़ा दी है। लेकिन यह मामला 90 दिन बाद दावा करने को लेकर है, भले ही तकनीकी वजहें न हों। उदाहरण के लिए मसला यह है कि अगर करदाता 90 दिन के भीतर दावा करना भूल जाता है, तो क्या उसे क्रेडिट देने से मना कर दिया जाएगा?

उन्होंने कहा कि 90 दिन के बाद इस अधिकार से मना करने का नियम जीएसटी कानूनों में दिया गया है। बहरहाल कोई भी नियम वैधानिक अधिकारों को खारिज नहीं कर सकता है, जो सीजीएसटी अधिनियम के नियम 174 के तहत दिया गया है। इसमें कहा गया है कि करदाता के पहले के कर के दौर के अधिकार जीएसटी व्यवस्था में भी जारी रहेंगे। इसके पहले इसी तरह की याचिका विलोवुड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से गुजरात उच्च न्यायालय में दायर की गई थी। 

न्यायालय ने कंपनी का तर्क खारिज कर दिया था। अब यह देखना है कि दिल्ली उच्च न्यायालय इस मामले में अलग फैसला देता है या गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को जारी रखता है। 
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