बिजनेस स्टैंडर्ड - कच्चे तेल जितने नहीं घटे ईंधन के दाम
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कच्चे तेल जितने नहीं घटे ईंधन के दाम

अमृता पिल्लई / नई दिल्ली 11 26, 2018

कच्चे तेल का दाम 30 प्रतिशत गिरा, जबकि पेट्रोल 9 प्रतिशत घटा

बिजनेस स्टैंडर्ड कच्चे तेल जितने नहीं घटे ईंधन के दामकच्चे तेल के दाम में गिरावट हो रही है, लेकिन भारत के विभिन्न शहरों में पेट्रोल व डीजल के खुदरा भाव पर उसका असर नहीं दिख रहा है। इसके लिए भारत में कीमतों के लिए अपनाए जा रहे जटिल फॉर्मूले को जिम्मेदार बताया जा रहा है, वहीं कुछ इसे एक महीने पहले दी गई छूट की भरपाई के उचित मौके के रूप में देख रहे हैं।

सोमवार को ब्रेंट क्रूड के दाम 59.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुए, जो 13 महीने का निचला स्तर है। वहीं दिल्ली में पेट्रोल का खुदरा भाव 74.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 69.29 रुपये प्रति लीटर रहा। पेट्रोल डीजल के सीऐंडएफ मूल्य पर खुदरा भाव निर्भर होता है, जिसमें आयात की स्थिति में ढुलाई की लागत शामिल होती है। इसके साथ ही इस मूल्य में तेल कंपनियों का विपणन मुनाफा और डीलरों का कमीशन, केंद्र व राज्य सरकार के कर भी शामिल होते हैं।

हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा संबंध उत्पाद के मूल्य से है, लेकिन 9 अक्टूबर से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत गिरावट आई है, जबकि पेट्रोल के दाम 9 प्रतिशत और डीजल के दाम 7 प्रतिशत गिरे हैं। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'इस अंतर की वजह 15 दिन का रोलिंग एवरेज (कच्चे तेल के दाम के लिए) का फॉर्मूला हो सकता है, जिसे भारत में पेट्रोल व डीजल के खुदरा दाम के लिए तैयार किया गया है।'

इस सिलसिले में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रभारी निदेशकों से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। हर कोई इस बात से सहमत नहीं है कि भारत में गणना के जटिल ढांचे का असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है। एक अन्य तेल व गैस विश्लेषक ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'एक वजह 15 दिन की औसत को बताया जा सकता है, लेकिन असल वजह कुछ और है।

इस समय ओएमसी के हाथ तंग हैं, जहां रिफाइनिंग मुनाफे पर दबाव है और विपणन मुनाफा करीब करीब खत्म हो गया है, क्योंकि अक्टूबर में 1 रुपये प्रति लीटर की छूट दी गई थी। ऐसे में यह संभव है कि कीमतों में गिरावट का लाभ विपणन कंपनियां उठा रही हों और छूट दिए जाने से हो रहे घाटे की भरपाई कर रही हों।'

सरकार की ओर से तेल कंपनियों को दिए गए दिशानिर्देशों के बाद ओएमसी ने 4 अक्टूबर को डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों में 1 रुपये प्रति लीटर कमी की थी, जिससे कि दाम में हो रही तेज बढ़ोतरी पर काबू पाया जा सके। विश्लेषकों को भी साफ नहीं है कि आने वाले सप्ताहों में पेट्रोल व डीजल के खुदरा भाव क्या होंगे। उपरोक्त उल्लिखित पहले विश्लेषक ने कहा, 'भारत में आने वाले सप्ताहों में दाम में और गिरावट आ सकती है, जो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट पर निर्भर होगा।'

बहरहाल कुछ का मानना है कि 1 रुपये प्रति लीटर छूट देने से मुनाफे पर लगी चपत की भरपाई के लिए तेल विपणन कंपनियों के लिए कुछ हफ्ते पर्याप्त होंगे। दूसरे विश्लेषक ने कहा, 'अगर कल्पना करें कि तेल विपणन कंपनियां प्रति दिन 5 पैसे बचा रही हैं तो ऐसे में वे 1 रुपये घाटे की भरपाई एक महीने से भी कम समय मे कर पाने में पूरी तरह से सक्षम होंगी।'

ऐसा पहली बार नहींं हो रहा है कि भारत में ईंधन के खुदरा दाम कच्चे तेल के दाम में बदलाव से अलग राह पर जा रहे हैं। उदाहरण के लिए इस साल सितंबर की स्थिति देखें तो सालाना आधार पर डीजल की कीमतों में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और पेट्रोल के दाम 15 प्रतिशत बढ़े, जबकि ब्रेंड क्रूड के दाम में इस अवधि के दौरान 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी इस साल सितंबर महीने में शुरू हुई, जिसकी कीमतें अब कम हो रही हैं। 
Keyword: Crude Oil, Brent Crude, Petrol, diesel, C&F, Price, Petroleum,
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