बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार कंपनियों पर बढ़ेगा भुगतान बोझ
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दूरसंचार कंपनियों पर बढ़ेगा भुगतान बोझ

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 11 26, 2018

चुकाने होंगे 245 अरब रुपये

बिजनेस स्टैंडर्ड दूरसंचार कंपनियों पर बढ़ेगा भुगतान बोझदूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम के स्थगित भुगतान के लिए अगले साल 245 अरब रुपये की भारी भरकम राशि चुकानी होगी जो इस वित्त वर्ष के उनके अनुमानित एबिटा के बराबर है। इसमें से करीब आधी राशि का भुगतान वोडाफोन-आइडिया को करना है। कंपनी को 122 अरब रुपये का भुगतान करना है।

हालांकि कंपनी को गंभीर वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर तिमाही में उसका एबिटा मार्जिन केवल छह फीसदी था जबकि दूरसंचार उद्योग का औसत एबिटा मार्जिन 20-22 फीसदी था। कंपनी के बढ़ते कर्ज और कर्ज भुगतान के बोझ को इसी बात से समझा जा सकता है कि उसका ऋण बनाम एबिटा अनुपात 14 से अधिक है जबकि प्रतिद्वंद्वी भारती एयरटेल का ऋण बनाम एबिटा अनुपात केवल चार है। कंपनी के प्रवर्तकों ने इस संकट से उबरने और नेटवर्क विस्तार में निवेश के लिए 3.5 अरब डॉलर इक्विटी जुटाने का फैसला किया है। इसमें ज्यादा राशि प्रवर्तक ही लगाएंगे।

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के आंकड़ों के मुताबिक उद्योग का कुल राजस्व 2500 अरब रुपये रहने की संभावना है जिसमें से समायोजित सकल राजस्व (कर चुकाने के बाद) 1500 अरब रुपये है। लेकिन अनुमानित एबिटा के औसतन समायोजित सकल राजस्व के 20-22 फीसदी रहने की उम्मीद है जो सालाना 300 अरब से 330 अरब रुपये बैठता है।  इसका मतलब यह है कि इससे केंद्र सरकार को अपने बजट में संतुलन बैठाने में अच्छी खासी राशि मिलेगी लेकिन दूरसंचार कंपनियों की मुश्किलें बढ़ेंगी।  

बिजनेस स्टैंडर्ड दूरसंचार कंपनियों पर बढ़ेगा भुगतान बोझउन्हें ब्याज देने के साथ-साथ नेटवर्क विस्तार में निवेश के लिए पैसों का इंतजाम करना होगा। साथ ही कड़ी प्रतिस्पर्द्धा में अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए भी जद्दोजहद करनी है। सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यू कहते हैं, 'उद्योग के मौजूदा एबिटा से सरकार के ऋण की भरपाई होनी मुश्किल है। इसका मतलब है कि नेटवर्क के विस्तार में किसी भी निवेश से कंपनी पर कर्ज बढ़ेगा। इससे उद्योग की हालत और खस्ता हो जाएगी।'

इसमें कोई दोराय नहीं है कि अगर प्रवर्तकों ने इस कारोबार में और ज्यादा इक्विटी नहीं झोंकी तो उद्योग की स्थिति और बदतर होगी। दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि वे अपने नेटवर्क के विस्तार और कड़ी प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए अगले दो साल के दौरान सालाना 750 अरब रुपये का निवेश करेंगी। 2018 में स्पेक्ट्रम के स्थगित भुगतान के लिए कंपनियों ने 196 अरब रुपये देने पड़े थे। 2019 में उन्हें इससे करीब 25 फीसदी अधिक राशि चुकानी होगी। 

वोडाफोन-आइडिया ने इस भुगतान को और आगे बढ़ाने के लिए वित्त और दूरसंचार मंत्रालय में पैरवी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिडला ने अगले साल मार्च में होने वाले नौ अरब रुपये के भुगतान को स्थगित करने की मांग की है और इसे 12 किस्तों में देने का सुझाव दिया है।   मैथ्यू ने कहा कि सीओएआई सरकार ने कई तरह की रियायतों की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम 2019 और 2020 में भुगतान को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं ताकि ऋण भुगतान की कुल अवधि 18 से बढ़कर 20 साल हो जाए।'उन्होंने साथ ही कहा कि उद्योग ने ब्याज दर में भी कटौती की मांग की है जो अभी नौ फीसदी है। साथ ही कंपनियां 250 अरब रुपये की जीएसटी का रिफंड मांग रही हैं। 

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