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रिटर्न नहीं किया दाखिल तो हो जाएगी मुश्किल

तिनेश भसीन /  November 26, 2018

किसी वित्त वर्ष में आप आयकर रिफंड के हकदार तो हो सकते हैं, लेकिन अगर आप  उस बार आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो आप पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसले में कहा है कि अगर आयकर अधिनियम की धारा 139 (1) के अनुसार तय तारीख के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है तो व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

फैसला तब आया, जब एक व्यक्तिगत करदाता आकलन वर्ष 2003-04 से 2005-06 के लिए अपने रिटर्न आयकर अधिनियम की धारा 139 (1) के तहत तय समय के भीतर दाखिल नहीं कर पाया। इतना ही नहीं, रिटर्न दाखिल नहीं करने पर जब उसे (करदाता से कर रिटर्न दाखिल करने और कुछ अन्य जानकारी देने के लिए कहने वाली) धारा 142 (1) के तहत नोटिस भेजे गए तो उसने उनका जवाब भी नहीं दिया। इस पर कर निर्धारण अधिकारी ने धारा 276 सीसी के तहत करदाता के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही शुरू कर दी। 

इस पर करदाता निचली अदालत में पहुंचा, जहां फैसला उसके खिलाफ आया। उसके बाद वह उच्च न्यायालय गया और कहा कि आकलन वर्ष 2004-05 और 2005-06 में उस पर किसी तरह का कर बकाया नहीं था। उसने यहां तक कहा कि उसने निर्धारित कर राशि से अधिक रकम बतौर कर जमा कराई थी, इसीलिए उसे तो रिफंड मिलना चाहिए। इस बारे में अपना फैसला सुनाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शशि एंटरप्राइजेज मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला दिया। उस मामले में अदालत ने कहा था कि आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर धारा 276 सीसी के तहत मुकदमा चलाने का मामला बनता है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आयकर रिटर्न नहीं भरकर करदाता ने अधिनियम की धारा 139 (1) का उल्लंघन किया है और उस सिलसिले में भेजे गए नोटिसों का जवाब भी नहीं दिया है। इस तरह दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा।

पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर एवं लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'सरकार अनुपालन पर बहुत जोर दे रही है। इसे देखते हुए करदाताओं के लिए तय तारीख के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है। अगर कर अधिकारियों को गड़बड़ी का पता चल जाता है और वे अभियोजन की कार्यवाही शुरू कर देते हैं तो आयकर अधिनियत का वह प्रावधान भी करदाता को नहीं बचा पाता कि अगर बकाया कर 3,000 रुपये से अधिक नहीं है तो करदाता पर किसी तरह का मुकदमा नहीं चल सकता।' कर विशेषज्ञ बताते हैं कि देर हो जाने के बाद भी अगर कर अधिकारियों को पता चलने से पहले रिटर्न दाखिल कर दिया गया तो कोई बात नहीं है। लेकिन अगर रिटर्न दाखिल नहीं हुआ तो मुकदमा चलाया जा सकता है। साथ ही अगर आपने अपने रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं तो नोटिस आने पर उनका जवाब एकदम समय से दे दें। अगर आप नोटिस का जवाब भी नहीं देते हैं तो आपको खमियाजा भुगतना पड़ सकता है।

आयकर अधिनियम की धारा 276 सीसी कहती है कि यदि करदाता रिटर्न दाखिल नहीं करता है और आयकर नोटिस का जवाब भी नहीं देता है तो उसके खिलाफ दायर मामले के आधार पर उसे 3 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद हो सकती है।

रिटर्न दाखिल करने में कोताही आपकी जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ सकती है क्योंकि सरकार ने रिटर्न देर से दाखिल करने के एवज में लगने वाले जुर्माने की राशि चालू आकलन वर्ष से बढ़ा दी है।

अगर आप आखिरी तारीख के भी बाद रिटर्न दाखिल करते हैं तो आपको 10,000 रुपये तक का जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। यदि आप रिटर्न देर से दाखिल करते हैं लेकिन इस साल यानी 2018 में दिसंबर से पहले कर देते हैं तो आप पर केवल 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। दिसंबर, 2018 के बाद रिटर्न दाखिल करने की सूरत में जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया जाएगा।

लेकिन आयकर विभाग ने छोटे करदाताओं का ध्यान भी रखा हैऔर उन्हें जुर्माने के मामले में ठीकठाक राहत दे दी है। उसने कहा है कि अगर करदाता की कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है तो रिटर्न दाखिल करने में देर होने पर अधिकतम 1,000 रुपये का ही जुर्माना वसूला जाएगा।
Keyword: Income tax, Delhi high court, Tax payer,
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