बिजनेस स्टैंडर्ड - रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही पर एकराय नहीं
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रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही पर एकराय नहीं

सुदीप्त दे /  November 26, 2018

कानूनी और नियामकीय विशेषज्ञों ने भले ही क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, लेकिन इस संबंध में कई देशों के अनुभव मिश्रित रहे हैं। जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन के इंस्टीट्यूट ऑफ प्राइवेट इंटरनैशनल ऐंड कंपैरेटिव लॉ के निदेशक माटियस लेमन ने कहा, 'क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को उनकी गलतियों के लिए जिम्मेदार ठहराना कठिन है।' उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए यह साबित करना आसान नहीं है कि रेटिंग एजेंसी ने गलती की है। साथ ही निवेशकों के लिए यह साबित करना भी उतना ही कठिन है कि उन्हें जो नुकसान हुआ है उसकी वजह रेटिंग एजेंसी की गलती है क्योंकि प्रतिभूतियों के मूल्य निर्धारण में कई कारकों की भूमिका होती है।

हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिष्ठा जोखिम के साथ-साथ मुकदमेबाजी का जोखिम डालने से क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का अनुशासन बेहतर करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनी अधिनियम 2013 में ऐसे प्रावधान दिए गए हैं जिनके तहत अंकेक्षकों की जवाबदेही तय की जा सके। शोधकर्ता प्रतीक दत्ता ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि समान जवाबदेही क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों पर लागू क्यों नहीं होनी चाहिए।'

विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी के शोधार्थी श्रेया प्रकाश कहती हैं कि बाजार नियामक सेबी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को विनियमित करने के लिए शक्तियों का दायरा पहले ही बढ़ा चुका है। उन्होंने कहा, 'हालांकि भारतीय संदर्भ में इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया है कि निवेशकों के लिए एक समयबद्ध एवं कुशल तंत्र तैयार किया जाए जो क्रेडिट रेटिंग पर भरोसा करे और इन एजेंसियों को उनके मुआवजे के लिए जवाबदेह बनाया जाए।' फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक-मैनेजिंग पार्टनर संदीप पारेख ने कहा कि हाल के महीनों में क्यों तमाम रेटिंग एजेंसियों की चाहत निवेशकों को सलाह देने की रही। उन्होंने कहा, 'भारत में कंपनियों के विनियमन में यही एक खामी रही है जिसे अब सुधारा जा रहा है। हल्के कानून के कारण हाल तक कंपनियां और बैंक डिफॉल्ट को पूरी तरह रिपोर्ट करने के लिए बाध्य भी नहीं थे।'

ऐसे में डिफॉल्ट मामलों का पता लगाने में रेटिंग एजेंसियों को कठिनाई होती थी। लेकिन नियामकीय सख्ती के बाद अचानक बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट के मामले सामने आने लगे जो वर्षों से छिपे हुए थे। इससे रेटिंग में उल्लेखनीय बदलाव हुआ जो निवेशकों को अचंभित करने लगा।

पारेख ने कहा, 'रेटिंग एजेंसियों को अक्षमता के लिए जरूर दंडित किया जाना चाहिए लेकिन उन मामलों में नहीं जहां उन्हें कंपनियों से सही जानकारी न मिली हो।' उन्होंने कहा कि इस समस्या को तीन मोर्चे- बैंक, कंपनी और रेटिंग एजेंसी- पर निपटाए जाने की जरूरत है। एलऐंडएल पार्टनर्स लॉ ऑफिसेज के पार्टनर वैभव कक्कड़ का भी मानना है कि बेहतर यही रहेगा कि इस पर प्रतिक्रियावादी न बनें और किसी को बलि का बकरा न बनाया जाए। लेकिन क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को विनियमित करने वाली मौजूदा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को मजबूती दी जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को निवेशकों के प्रति जिम्मेदार बनाने में कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। रेटिंग किसी प्रतिभूति की साख को लेकर केवल राय है और उसे किसी प्रतिभूति में निवेश के लिए सलाह नहीं मानी जा सकती है। प्रकाश ने कहा, 'इसलिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां कुछ हद तक यह दलील दे सकती हैं कि उन्हें महज एक राय जाहिर करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता अथवा यह उनकी वाक-स्वतंत्रता के अधिकारों उल्लंघन होगा।' 

'इश्यूअर पे' मॉडल के तहत इश्यूअर यानी जारीकर्ता को रेटिंग आवंटित करने के साथ ही क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां अनुबंधात्मक दायित्व से बंध जाती हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि वे यह पूर्वानुमान नहीं लगा सकती हैं कि कौन रेटिंग पर भरोसा करेगा और शुल्क के रूप में होने वाली उनकी कमाई को संभावित देनदारी में समायोजित नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को निवेशकों के प्रति जवाबदेह बनाए जाने से उन पर तमाम अप्रत्याशित देनदारियों का बोझ लद जाएगा।

प्रकाश ने कहा, 'हालांकि उचित कानून बनाकर इन चुनौतियों से निपटा जा सकता है लेकिन क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा रेटिंग गतिविधियां बंद किए जाने जैसी व्यावहारिक चुनौतियां तब भी बरकरार रहेंगी।' क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में अन्य देशों का अब तक का अनुभव अधिक सकारात्मक नहीं रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही पर बाजार की उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं रही और के्रडिट रेटिंग एजेंसियों ने जमानत वाली प्रतिभूतियों के पंजीकरण विवरण में रेटिंग देने से इनकार कर दिया।

इस पर यूएस सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन ने कानून के इस हिस्से को लागू करना फिलहाल टाल दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि ब्रिटेन में निवेशकों का ऐसा कोई भी दावा सफल नहीं रहा है क्योंकि निवेशकों के प्रति देनदारी को साबित करना कठिन है।  यूरोपीय संघ में भी इसी तरह का अनुभव रहा है। लेमन ने कहा, 'यूरोपीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी कानून के तहत कार्रवाई शायद ही कभी हुई है।'

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियामक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की जवाबदेही तय करने का निर्णय लेता है तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि जवाबदेही केवल उन मामलों में तय होनी चाहिए जहां एजेंसी ने अपना कर्तव्य न निभाया हो और खुद के रेटिंग मानदंडों का उल्लंघन किया हो। दत्ता ने कहा, 'तथ्यात्मक एवं प्रक्रियात्मक लापरवाही के लिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को अवश्य जवाबदेह बनाया जाना चाहिए लेकिन महज एक राय जाहिर करने के लिए जो सही साबित न हो, के लिए उसे जवाबदेह नहीं बनाया जा सकता।' उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रावधानों का इस्तेमाल केवल चरम मामलों में होना चाहिए। हालांकि इसे कहना आसान है लेकिन करना कठिन।

पहला, उल्लंघन की पहचान करना काफी महत्त्वपूर्ण है। प्रकाश ने कहा, 'कर्तव्यों के खास उल्लंघन की पहचान होनी चाहिए ताकि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जा सके।' विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्पष्टï होना चाहिए कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने जानबूझकर उल्लंघन किया है अथवा अनजाने में। ब्रिटेन जैसे कुछ देशों में जवाबदेही तय करने के लिए यह देखना जरूरी है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने जानबूझकर उल्लंघन किया है अथवा अनजाने में।

चूंकि सबूत जुटाने की जिम्मेदारी निवेशकों की होगी, इसलिए निवेशकों के लिए सभी शर्तें स्पष्टï होनी चाहिए ताकि वे मुआवजे का दावा कर सकें। प्रकाश ने कहा, 'यूरोपीय संघ जैसे जगहों पर यह साबित करना जरूरी है कि रेटिंग पर भरोसा करने के कारण निवेशक को नुकसान उठाना पड़ा।' साथ ही जवाबदेही की सीमा की पहचान करना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा भुगतान किए जाने वाले मुआवजे नुकसान के अनुमान आदि पर आधारित होने चाहिए। प्रकाश ने कहा, 'ब्रिटेन में इस प्रकार की परिस्थितियों की विस्तृत सूची दी गई है।'

कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अन्य देशों के अनुभवों से सीख ले सकता है। लेमन कहीं अधिक सीधा और सरल प्रक्रिया लागू करने की सलाह देते हैं जो किसी अन्य देश का अनुकरण न हो। उन्होंने कहा, 'यूरोपीय मॉडल का अनुकरण न करें क्योंकि वह काफी जटिल है। सबूतों का बोझ गलत रेटिंग वाली प्रतिभूतियों की खरीद अथवा बिक्री करने वाले निवेशकों के पक्ष में होना चाहिए।' दत्ता क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को निवेशकों के प्रति कहीं अधिक जवाबदेह बनाने के लिए वैकल्पिक नीतिगत समाधान तलाशने के पक्ष में हैं। प्रकाश का कहना है कि यदि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को जवाबदेह बनाने का प्राथमिक उद्देश्य उसके कामकाज को दुरुस्त करना है तो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को इस प्रकार की एजेंसियों पर सख्ती के लिए खुद की क्षमता बढ़ाने और देश में निवेशक मुकदमेबाजी संस्कृति में सुधार लाने पर ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए नियामकीय माहौल बनाने लिहाज से उपचारात्मक मुद्दों के लिए सुधार पैकेज के तहत इन मामलों को निपटाने पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इनमें रेटिंग मॉडल से संबंधित हितों के टकराव के मुद्दे भी शामिल हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के साथ अंकेक्षकों की तरह व्यवहार करना सही नहीं होगा। एक कानून विशेषज्ञ ने कहा, 'रेटिंग और गैर-कारोबार से पैदा होने वाली हितों के टकराव की स्थिति को दूर किया जाना चाहिए, रेटिंग के लिए ग्राहकों की संख्या को सीमित किया जाना चाहिए अथवा कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि वे हरेक तीन साल बाद अपनी रेटिंग एजेंसी को बदलें।' विशेषज्ञों का कहना है कि इन सब सुधारों के बल पर व्यापक नियामकीय परिदृश्य में सुधार लाया जा सकता है।

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