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देश में ऑनलाइन खेल का बढ़ता कारोबार

शमीन अलाउद्दीन /  November 23, 2018

दस वर्षीय यश चांदनी काफी समय से वर्चुअल रियलिटी ग्लास के साथ वीडियो गेम खेलती हैं। 47 साल की शमीमा अख्तर मोबाइल गेम कैंडी क्रश खेलने पर 10,000 रुपये से अधिक खर्च कर चुकी हैं। पिछले दो साल में बढ़ते स्मार्टफोन और तेज होते डिजिटलीकरण के कारण भारतीय ऑनलाइन खेल बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है।  एक मोबाइल वीडियो विज्ञापन प्लेटफॉर्म पीओकेकेटी की एक रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल गेमिंंग के क्षेत्र में भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल है। इस समय भारत के ऑनलाइन खेल उद्योग का आकार 89 करोड़ डॉलर को पार कर गया। साल 2010 में इस क्षेत्र में लगभग 25 खेल निर्माता कंपनियां थीं जिनकी संख्या बढ़कर आज 250 से अधिक हो चुकी हैं। इस समय हर सप्ताह लगभग दो नए स्टार्टअप खुल रहे हैं। 

 
ऑनलाइन खेल उद्योग तेजी से अरबों डॉलर के कारोबार की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में न केवल पेटीएम, टेनेंट, यूजू, नजारा जैसी तकनीकी कंपनियां निवेश कर रही हैं बल्कि विराट कोहली और ह्वतिक रोशन जैसी हस्तियों के विज्ञापन भी दिखाई दे रहे हैं। 
 
क्षेत्र का विकास 
 
वर्ष 2018 के अंत तक भारत में 53 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता होंगे। स्मार्टफोन के बढ़ते चलन से ऑनलाइन खेल उद्योग में अचानक तेजी आई है। इस तेजी की शुरुआत साल 2016 में हुई जब रिलायंस जियो के आने से देश में कम कीमत पर 4जी डेटा मिलने लगा। इससे एयरटेल, वोडाफोन जैसी दूसरी दूरसंचार कंपनियों को भी डेटा की दरों में कटौती करनी पड़ी।  साल 2012 में मुंबई में परिचालन शुरु करने वाली ड्रीम11 कंपनी ऑनलाइन फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल और कबड्डी जैसे खेल उपलब्ध कराती है। साल 2008 में कर्नाटक में शुरू हुई 99गेम्स को वड्र्सवर्थ, स्टारशेफ, स्पेलअप जैसे ऑनलाइन खेलों के कारण काफी प्रसिद्धि मिली। ओक्ट्रो (साल 2006) ने तीन पत्ती और इंडियन रूमी जैसे पुराने खेलों को फिर से लोकप्रिय बनाया। 
 
हालांकि ऑनलाइन खेल क्षेत्र के बहुत विस्तृत और विविध होने के कारण प्रत्यक्ष तुलना करना काफी कठिन है लेकिन फिर भी छोटा भीम, स्पीड रेसिंग तथा मोटू-पतलू जैसे खेलों को बनाने वाली नजारा को इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी माना जा सकता है। नजारा की स्थापना साल 2000 में  हुई थी और इस समय 61 देशों में कारोबार कर रही है। मासिक आधार पर कंपनी के 1 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। नजारा ने बाजार से अभी तक 6.4 करोड़ डॉलर की राशि की उगाही की है और वह अब प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की योजना बना रही है। कंपनी ने ऑफलाइन वर्चुअल रियलिटी गेमिंग स्टार्टअप इंस्टास्पोट्र्ज में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीद ली है। ऑनलाइन खेल क्षेत्र की दूसरी कंपनियों में लोको, पैशन गेमिंग, प्ले सिंपल, फ्लिक्सी गेम्स, गेमएक्सएस, रेडमॉन्सटरगेम्स, पाई इन्टरेक्टिव, अपार गेम्स और क्रेशियो सॉफ्ट शामिल हैं। 
 
अवसर 
 
वैश्विक आउटसोर्सिंग सलाहकार फर्म थॉलॉन्स के वैश्वीकरण इंडेक्स 2018 में अमेरिका को पछाड़ते हुए भारत शीर्ष डिजिटल देश के स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में भारत में 22.2 करोड़ से अधिक सक्रिय खिलाडिय़ों ने मोबाइल गेम खेलने पर रोजाना औसतन 42 मिनट बिताए हैं। 15 वर्ष से अधिक उम्र वाले पुरुष खिलाडियों ने रोजाना औसतन 15-15 मिनट के 4-5 सत्र मोबाइल खेलों पर खर्च किए। इसी श्रेणी की महिला खिलाडिय़ों ने रोजाना 8-12 मिनट के लगभग 7 सत्र खर्च किए। दर्शकों के मामले में यहां 15 वर्ष से अधिक के 3.8 करोड़ पुरुष और 2.14 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। 
 
भारत तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में ऐसे समय में यह तेजी आ रही है, जब अमेरिका तथा चीन का ऑनलाइन खेल उद्योग पूर्णता की ओर जाता दिख रहा है। एनालिटिक्स कंपनी ऐप एनी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में भारतीयों ने अपने मोबाइल और टैबलेट में 12.1 अरब ऐप डाउनलोड किए, जबकि अमेरिका मेंं यह संख्या 11.3 अरब रही। रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2015-2017 के बीच भारत में ऐप डाउनलोड की संख्या तिगुना हो गई, जबकि समान अवधि में अमेरिका में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। भारतीयों द्वारा  97 प्रतिशत ऐप ऐंड्रॉयड के गूगल प्ले से डाउनलोड किए गए। 
 
भारतीय खेल निर्माता स्थानीय स्तर पर कई ऑफर देकर इन संभावनाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुफ्त में खेलने वाले खेलों की सुविधा देकर ये स्टार्टअप उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने में लगे हैं। साल 2017 में लूडो किंग भारत का शीर्ष ऑनलाइन खेल रहा, जो रोजाना 1 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ताओं की सीमा को पार कर गया। इसके मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 7 करोड़ रही। सबवे सफर (50 लाख) और टेंपल रन (25 लाख) इस सूची में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। 
 
राजस्व व आगे की राह 
 
गूगल-केपीएमजी के एक अध्ययन के अनुसार, देश में साल 2021 तक 73.5 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता होने का अनुमान है। साथ ही, 2012 तक ऑनलाइन खेल कारोबार 1 अरब डॉलर को पार कर जाएगा तथा साल 2020 तक डिजिटल विज्ञापन कारोबार 190 अरब डॉलर से अधिक का हो जाएगा। हालांकि इस समय ऑनलाइन खेलों का काफी प्रसार हो रहा है लेकिन इनमें से अधिकांश को अभी लंबी दूरी तय करनी बाकी है।  राजस्व के लिए स्टार्टअप डिजिटल विज्ञापनों का सहारा ले रहे हैं। लाइव क्विज ऐप, प्रतियोगिता कराने वाले प्लेटफॉर्म और लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग खेल भारतीय ऑनलाइन खेल बाजार में अपनी पैठ बना रहे हैं। ओक्ट्रो, नजारा टेक्नोलॉजीज, मूनफ्रॉग लैब्स, प्ले सिंपल, रेड मॉन्सटर और सिक्स रेड गन्स जैसी कंपनियां ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के साथ अपने अनुभव का लाभ उठा रही हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर काफी उपयोगकर्ता ऑनलाइन खेल खरीदने पर रुपये खर्च कर रहे हैं लेकिन भारत में अभी बहुत कम लोग ही ऑनलाइन खेल खरीदने पर रुपये खर्च करते हैं। किसी भी प्रसिद्ध खेल पर रोजान सक्रिय होने वाले उपयोगकर्ताओं में 1 प्रतिशत से भी कम ही रुपये खर्च करते हैं जिस कारण खेल निर्माताओं को 'फ्रीमियम मॉडल' अपनाना पड़ रहा है। ऐप पर विज्ञापनों की प्रकृति भी बदल रही है। पारंपरिक पॉपअप मेसेज की जगह अब हम रिवॉर्ड वीडियो पाते हैं, जहां उपयोगकर्ता को बिना रुपये खर्च किए खेल जारी रखने के लिए एक वीडियो देखनी पड़ती है।
Keyword: online, game, sports,,
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