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ऑनलाइन खेल के शौकीनों पर चढ़ा कारोबारी रंग

निकिता पुरी /  November 23, 2018

लगभग एक दशक पहले अंकित 'वेनम' पंत के सामने अजीबोगरीब स्थिति सामने आ गई। वह मुंबई में अपने घर पर 500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये के बीच रकम ले आते थे। बाकी समय में वह माउसपैड और कीबोर्ड पर किसी काम में व्यस्त रहते थे। उनके माता-पिता को लगता था कि उनका बेटा या तो सट्टेबाजी कर रहा है या फिर चोरी। पंत ने उन्हें बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग टूर्नामेंट में रुपये जीतते हैं लेकिन उन्होंने इस पर कभी विश्वास नहीं किया।  अभी 29 साल के पंत कहते हैं, 'मैं एक मध्यम-वर्गीय आय वाले परिवार से आता हूं। वह अब भी अपने माता-पिता के उस इनकार पर मुस्कुरा देते हैं कि कोई वीडियो गेम मैच जीतने पर उनके बेटे को इनाम में रुपये दे सकता है।' वह बताते हैं, 'मुझे अपनी बात सच साबित करने के लिए कुछ ऑनलाइन खेल आयोजकों से अपनी मां की बात करानी पड़ी।'

 
आयोजकों ने भी पंत को सहायता दी। आखिरकार 15 साल का पंत स्थानीय मैचों और साइबर कैफे में खेल के लिए काफी लोकप्रिय हो गया था। मुंबई के कांदिवली स्थित साइबर कैफे पर किसी भी खेल में सभी के सामने यह चुनौती दी जाती थी, 'उसको हरा के दिखा।' ऑनलाइन गेमिंग में पंत का जुनून तेजी से बढ़ता गया। उन्होंने वर्ष 2008 में एक और खिलाड़ी आकाश 'रिक्स' के साथ मिलकर ई-स्पोर्ट स्क्वैड बनाया जो भारत में लोकप्रिय काउंटर स्ट्राइक खेल में विरोधियों के सामने खेलने के लिए उतारा जाता है। काउंटर स्ट्राइक खेल में बहुत से लोग एक दूसरे के खिलाफ शूटिंग करते हैं जो दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय ई-स्पोट्र्स में से एक है। 
 
मैच में एक अच्छी पुरस्कार राशि जीतने के साथ ही ये दोनों ने देश तथा विदेश में अपनी प्रतिभा की धाक जमाई है। खेलों में पंत की आक्रामकता को अब एक ऐसी संस्था प्रायोजित करती है जिसे डेल, एलियनवेयर, कॉर्सएयर, इंटेल और गोल्ड्स जिम का सहयोग प्राप्त है। ई-गेमिंग की आभासी दुनिया में पंत को उनके खेल के नाम 'वेनम' से जाना जाता है। यहां सभी खिलाडिय़ों के अपने अलग नाम होते हैं। छोटे शहरों से शुरु हुई ऑनलाइन गेमिंग को पिछले तीन साल में काफी गति मिली। भारतीय उद्योग संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में ऑनलाइन खेल बाजार 54 करोड़ डॉलर से अधिक रहा और इसमें आगे एक अच्छी प्रगति की उम्मीद है। 
 
भारत की प्रमुख ई-गेमिंग कंपनी नजारा टेक्नोलॉजीज के सीईओ मनीष अग्रवाल कहते हैं कि इंटरनेट की तेज गति, अधिक आय और वैश्विक सीमाओं के कमजोर पडऩे से यह तेजी आई है। भारत में ई-गेमिंग के भविष्य पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली नजारा टेक्नोलॉजीज ने भारत में ई-स्पोट्र्स लीग बनाने के लिए 1.36 अरब रुपये का निवेश करने की घोषणा की है। भारतीय खिलाड़ी ई-गेमिंग के लिए पहले से ही दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप की यात्रा कर रहे हैं। पिछले दिनों मुंबई की डोटा 2 टीम ने सिंगापुर में एक खेल के दौरान 10,000 डॉलर की इनामी राशि जीती।  
 
आजकर ई-गेमिंग में सबसे लोकप्रिय खेलों में फीफा, काउंटर स्ट्राइक:गो, डोटा 2, क्लैश रॉयल, लीग ऑफ लीजेंड, ओवरवॉच, पीयूबीजी और कॉल ऑफ ड्यूटी शामिल हैं। इंडोनेशिया में समाप्त हुए एशियन खेलों में प्रदर्शन के साथ ही ई-स्पोट्र्स ने अपनी शुरुआत की है। इसके प्रायोगिक खेल में 18 देशों ने हिस्सा लिया जिसमें भारत भी शामिल था।  चार साल बाद चीन के हांग्जो प्रांत में होने वाले 19वें एशियाई खेलों में ई-स्पोट्र्स को पुरस्कार (मेडल) के साथ शामिल किया जा सकता है। यह भी खबर है कि पेरिस 2024 ओलंपिक में ई-स्पोट्र्स को शामिल किया जा सकता है। हालांकि चयन समिति को अभी खेलों का निर्धारण करना बाकी है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को लगता है कि अधिकांश ऑनलाइन खेलों में दिखाई जाने वाली हिंसा ओलंपिक द्वारा समर्थित मूल्यों का उल्लंघन करती है। एक प्रमुख ई-स्पोट्र्स और गेमिंग सॉल्यूशंस कंपनी नॉडविन गेमिंग के प्रबंध निदेशक अक्षत राठे कहते हैं, 'माउस पैड के लिए स्पॉन्शरशिप से बढ़ते हुए भारतीय ई-गेमिंग ने एक लंबा रास्ता तय किया है।' इस साल की शुरुआत में नजारा ने नॉडविन की 55 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है। कुछ साल पहले तक भारतीय खिलाड़ी किसी प्रतिस्पर्धा के बजाए मनोरंजन के तौर पर ये खेल खेलते थे। यह अब बदल गया है। राठे का अनुमान है कि इस साल भारत में ऑनलाइन गेमिंग में कुल पुरस्कार राशि लगभग 5 करोड़ रुपये होगी। 
 
वह बताते हैं कि इस उद्योग में तेजी आने का सबसे बड़ा संकेत यह है कि ऑनलाइन खेल निर्माता भारत में अपने कार्यालय खोल रहे हैं। वह कहते हैं, 'तीन साल पहले भारत में केवल दो निर्माता (नजारा और इलेक्ट्रॉनिक आर्ट) थे। आज यहां 65 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन खेल निर्माता हैं। यह एक बड़ा विस्तार है।'  कॉमिक्स के खेल और गेमिंग टूर्नामेंट के अलावा कॉलेज स्तर पर होने वाली प्रतिस्पर्धाएं भी खिलाडिय़ों की क्षमता को परखने का एक अच्छा स्थान है। इसके बल पर ही बालाजी 'ब्लिजार-डी' रामनारायण डोटा 2 खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। 
 
23 वर्षीय रामनारायण पुणे से आते हैं और उन्हें कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही ऑनलाइन गेमिंग का शौक चढ़ा। वह कहते हैं, 'इसके कारण मुझे अपनी डिग्री पूरी करने में एक साल अधिक लगा क्योंकि जब एक ऑनलाइन टूर्नामेंट मेरी परीक्षाओं के साथ हुआ तो मैंने ऑनलाइन खेल में भाग लेने को वरीयता दी।' रामनारायण की टीम सिग्निफी के सह-संस्थापक निशांत आहूजा कहते हैं, 'उनकी वरीयताएं स्पष्ट हैं। बालाजी किसी भी चीज से पहले डोटा को रखते हैं।' ई-स्पोट्र्स कंपनी कोब्स गेमिंग सिग्निफी को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। 
 
टैक्सस की एक ई-स्पोट्र्स कंपनी ऑप्टिक गेमिंग के पास भारत में काउंटर स्ट्राइक:गो खेल के लिए अपनी अलग टीम है। इस तरह की साझेदारी और खिलाडिय़ों को सहायता देना बाजार में काफी लोकप्रिय हो रहा है, जो इससे पहले भारत में नहीं देखा जाता था।  एक औसत दर्जे के खिलाड़ी को मासिक 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त मैचों की पुरस्कार राशि होती है, जो जीतने वाली टीम के खिलाडिय़ों में बांट दी जाती है। आज सिग्निफी, एंटिटी और ओप्टिक इंडिया जैसी टीमें वेतन देकर खिलाड़ी रख रही हैं। राठे कहते हैं, 'प्रायोजकों के अलावा इनमें से अधिकांश टीमों के पास कोच, विश्लेषक, प्रबंधक, खिलाडिय़ों के भोजन का ध्यान रखने वाले और फिजिकल थेरेपी प्रशिक्षक शामिल हैं।'
 
रोजाना सुबह 9 बजे बेंगलूरु के एचएसआर में रहने वाले लगभग 20 खिलाडिय़ों की फिजिकल ट्रेनर के साथ एक क्लास होती है। वर्कआउट के बाद वे अगले 8-10 घंटे अपने विशेष कक्ष में कंप्यूटर स्क्रीन के सामने कानों पर हेडफोन लगाकर बिताते हैं। उनको पूरे दिन वीडियो गेम खेलने के एवज में सैलरी दी जाती है। देशभर से 1,400 खिलाडिय़ों का ऑडिशन लेने के बाद अंतत: जून में ओप्टिक इंडिया की काउंटर स्ट्राइक:गो टीम अस्तित्व में आई।  कलकत्ता के 22 वर्षीय खिलाड़ी सब्यासची 'एंटीडॉट' बोस इस टीम के स्नाइपर धारक हैं और तीन महीने से अपने साथियों के साथ यहां रह रहे हैं। यह खिलाडिय़ों के लिए काफी व्यस्त समय चल रहा है। भारत के सबसे बड़े टूर्नामेंट में से एक ईएसएल इंडिया प्रीमियरशिप 2018 में प्रतिस्पर्धाओं का दौैर जारी है जहां इस बार 1 करोड़ रुपये की इनामी राशि रखी गई है। इसके बाद उन्हें एक दूसरे कार्यक्रम के लिए शांघाई जाना है। 
 
देश के शीर्ष ई-स्पोट्र्स फीफा खिलाड़ी सुदिन 'दी हेडमास्टर' दिनेश कहते हैं, 'भारत में टीमों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा सहायता उपलब्ध कराना काफी पहले शुरू हो चुका है लेकिन वर्ष 2012 में हुई घटना ने हमें एक कदम पीछे धकेल दिया था।' दिनेश ने साल 2015 में पेरिस में हुए इलेक्ट्रॉनिक स्पोट्र्स वल्र्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।  दिनेश जिस कार्यक्रम की बात कर रहे थे वह इंडिया गेमिंग कार्निवाल 2012 था। हालांकि 3 लाख डॉलर से अधिक की इनाम राशि वाला यह कार्यक्रम एक स्कैम साबित हुआ। खिलाड़ी जब यहां आए तो आयोजक कहीं भी नहीं थे। राठे याद करते हैं, 'इससे उबरने में हमें 3 साल लगे। न्यूयॉर्क, हॉन्गकॉन्ग और मॉस्को से भी लोग यहां आए थे। यह भारतीय गेमिंग पर एक कलंक था।' 
 
यहां अधिकतर खिलाड़ी 20-30 वर्ष के बीच की उम्र के हैं जिनमें अधिकांश पुरुष हैं। हालांकि कुछ महिला कमेंटेटर और खिलाड़ी हैं लेकिन भारत में उनको अभी काफी आगे बढऩा होगा। पेशेवर तौर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली महिलाओं की संख्या काफी कम है।  इन सबके अतिरिक्त, पेशेवर गेमिंग में नाम और शोहरत दोनों हैं। अनुज शर्मा का उदाहरण लिया जा सकता है। साल 2009 में नवी मुंबई के एक आम खिलाड़ी अनुज 'अमातेरसु' शर्मा 2014 में एक पेशेवर खिलाड़ी बन गए। कंप्यूटर साइंस इंजीनियर और साथ में एनीमेशन की डिग्री लिए हुए शर्मा उस समय से मोबाइल गेम बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं। नौकरी के अलावा वह अलग से टूर्नामेंट भी खेलते हैं। 27 वर्षीय शर्मा कहते हैं, 'यह जानते हुए भी कि मैं एक सामान्य नौकरी में वापस जा सकता हूं, मैंने पेशेवर गेंमिंग को एक मौका दिया।' वह अभी 2016 में अस्तित्व में आई एंटिटी टीम के काउंटर स्ट्राइक:गो खिलाड़ी भी हैं। इस क्षेत्र के कई प्रशंसकों के लिए वह एक सेलिब्रिटी हैं। 
 
अग्रवाल बताते हैं कि ई-स्पोट्र्स कारोबार के भी कई अपने विराट कोहली हैं। गेमिंग के शौकीन अग्रवाल अपनी मां के साथ छह घंटे का सफर करके दिल्ली में पंत से मिलने आते हैं। पंत बताते हैं वह अपने प्रशंसकों और नए खिलाडिय़ों से पहले अपनी शिक्षा पूरी करने और एक बैकअप प्लान बनाने के लिए कहते हैं जिसके लिए कई माता-पिता उनको धन्यवाद देते हैं।  पूरी तरह से ऑनलाइन खेल को समर्पित खिलाड़ी रोजाना औसतन 8-12 घंटे खर्च करता है। दिनेश कहते हैं, 'यह खतरनाक हो सकता है।' शर्मा आगे कहते हैं कि भारत में अकेले काउंटर स्ट्राइक:गो की 2,000-3,000 टीमें हैं। वह कहते हैं, 'इन सभी टीमों में 5 खिलाड़ी होते हैं और केवल कुछ टीमों के खिलाडिय़ों को वेतन मिलता है। हर कोई शीर्ष पर पहुंचना चाहता है।' टीवी, यूट्यूब और हॉटस्टार पर पूरे विश्व में बहुत से अभ्यास मैच और लगभग सभी टूर्नामेंटों का सीधा प्रसारण होता है। शर्मा कहते हैं, 'इससे खिलाडिय़ों पर दबाव बढ़ जाता है।' कोहनी में समस्या और तनाव जैसी बीमारियां लगातार आम होती जा रही हैं। साथ ही, यह कम समय का करियर होता है। 
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