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इंटरनेट स्ट्रीमिंग मनोरंजन कारोबार में हलचल का दौर

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  November 23, 2018

'मेरे शब्द बहरे कानों से टकरा रहे हैं।' यह कहना है कि पुनीत गोयनका का। गोयनका ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी हैं। वह बात कर रहे हैं बाजार और विश्लेषकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया की। यह प्रतिक्रिया उनको तब मिलती है जब वह कहते हैं कि 6,685 करोड़ रुपये का ज़ी केवल प्रसारक नहीं है। उसका एक मजबूत फिल्म कारोबार है, एक डिजिटल पोर्टफोलियो है, थिएटर और संगीत शाखा है और हर प्रमुख भारतीय भाषा में चैनल वाला प्रमुख प्रसारण कारोबार भी है। उसने सन 2016 में सैराट और 2014 में टाइमपास जैसी फिल्मों के साथ अकेले दम पर मराठी फिल्म उद्योग की तस्वीर बदल दी। हिंदी मीडियम और सीक्रेट सुपरस्टार जैसी प्रमुख हिंदी फिल्में भी ज़ी स्टूडियोज की देन हैं। सीक्रेट सुपरस्टार ने तो विदेशी बाजारों में भी 1,000 करोड़ रुपये की कमाई की, इसमें अधिकांश राशि चीन से आई। 

 
इसके बावजूद गोयनका से यह सवाल किया जाता है कि उनकी कंपनी नेटफ्लिक्स, एमेजॉन से कैसे निपटेगी। यह सवाल मनोरंजन उद्योग के हर सीईओ से पूछा जाता है। बीते पांच वर्ष के दौरान 1,117 करोड़ डॉलर के नेटफ्लिक्स ने सारे कायदे बदलकर रख दिए हैं। वर्ष 2017 में कंपनी ने 82 फिल्में और 700 नए शो पेश किए। इस प्रकार वह दुनिया की सबसे बड़ी प्रसारक और स्टूडियो बन गई। उसकी पहुंच 190 देशों में 13.7 करोड़ से अधिक लोगों तक है। उसने विषयवस्तु और भूगोल को लेकर बहुत बड़ा बाजार तैयार किया है। 
 
रिक ऐंड मॉर्टी नाम एक ऐनिमेटेड वयस्क साइंस फिक्शन, जो एक शराबी वैज्ञानिक और उसके किशोर पोते के बारे में है, उसे शायद दुनिया भर में कुछ लाख दर्शक मिलते लेकिन नेटफ्लिक्स के प्रसार ने उसे यह अवसर दिया कि वह करोड़ों लोगों तक पहुंच सके। नेटफ्लिक्स एक सबस्क्रिप्शन आधारित सेवा है जो विषय वस्तु पर बहुत पैसे खर्च करती है। उसने इस वर्ष टीवी के लिए तैयार सामग्री पर 800 करोड़ डॉलर खर्च किए। इस सामग्री की गुणवत्ता फिल्मों जैसी थी लेकिन इन्हें इंटरनेट के लिए तैयार किया गया। नेटफ्लिक्स जैसे प्रतिस्पर्धियों की मौजूदगी के कारण ही 21 सेंचुरी फॉक्स (स्टार इंडिया की मालिक) डिज्नी जैसी बड़ी कंपनियों को बिक्री कर रही हैं। अधिकांश मीडिया फर्म को इस क्षेत्र में नेटफ्लिक्स या एमेजॉन अथवा ऐसी किसी भी अन्य कंपनी का मुकाबला करने के लिए तकनीक की समझ होना अत्यंत आवश्यक है। 
 
ओवर द टॉप सामग्री मुहैया कराने वाली अर्थात वीडियो स्ट्रीमिंग करने वाली फर्म को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। ये श्रेणियां हैं प्रसारक/फिल्म, तकनीक और दूरसंचार। इनमें से पहली श्रेणी में सर्वश्रेष्ठï मस्तिष्क होते हैं। परंतु बिना तकनीक की समझ के वे भी कुछ खास नहीं कर सकते। इसी प्रकार तकनीक और दूरसंचार कंपनियों को मीडिया कारोबारियों की आवश्यकता होती है। याद रहे कि एटीऐंडटी का अभी हाल ही में टाइम वार्नर के साथ विलय हुआ है।  ज़ी ने इस महीने के आरंभ में प्रर्वतकों की 41.6 फीसदी हिस्सेदारी में से जिस थोड़ी हिस्सेदारी को एक साझेदार को देने की घोषणा की है, उसे भी इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए। चेयरमैन सुभाष चंद्रा और गोयनका के साथ बातचीत कर  मुझे यही लगा कि वह किसी बड़ी अमेरिकी तकनीकी फर्म को हिस्सेदारी देने वाले हैं। मूल विचार है ज़ी को ग्लोबल बनाना और उसका विस्तार दक्षिण एशिया से परे करना। यह अच्छा विचार है लेकिन सलाहकार, साझेदारी की उसकी क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। 
 
संयुक्त उपक्रम साझेदार की बात तो छोड़ दीजिए ज़ी का प्रदर्शन तो बाहरी सीईओ के साथ भी बहुत अच्छा नहीं रहा है। यह बहुत सफल कंपनी है क्योंकि चंद्रा सही मायनों में दूरदर्शी हैं और उनके बेटे गोयनका ने पिछले 12 वर्ष में क्रियान्वयन के मोर्चे पर एकदम सही ढंग से काम किया है। क्या ज़ी वाकई में निर्णय लेने की क्षमता का किसी बाहरी व्यक्ति के साथ बंटवारा करने को तैयार है? अगर वह ऐसा कर सकती है तो देश की पहली वैश्विक मीडिया कंपनी को देखना खुशी की बात होगी। दूसरी बात यह कि इससे प्रसारकों को बल मिलेगा। 83.6 करोड़ लोगों तक पहुंच और 6,600 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ भारतीय प्रसारण जगत न केवल मुनाफे में है बल्कि वह लगातार दो अंकों में वृद्घि हासिल कर रहा है। परंतु यह पांच कारोबारियों वाला यह सीमित कारोबार बनकर रह गया है। इसका परिणाम कई तरह से हमारे सामने है। बीते तीन वर्ष के दौरान हिंदी के मनोरंजन चैनलों में आई गिरावट इसकी बानगी है। किसी भी प्रोडक्शन कंपनी से जोखिम से बचने वाली बंद जेहन वाली प्रोग्रामिंग टीम के बारे में बात की जा सकती है। इसका एक हिस्सा तो नियामकीय बाधाओं से संबंधित है जबकि दूसरा अक्खड़पन से ताल्लुक रखता है।  डिज्नी द्वारा फॉक्स को खरीदा जाना, ज़ी की नई साझेदारी, सोनी द्वारा नए साझेदार की तलाश आदि बताते हैं कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में हलचल बनी रहेगी। 
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